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    जेएमआइसी राधिका की अदालत ने गवाहों को पेश होने के दिए निर्देश, अगली सुनवाई 21 मई को

    By JagranEdited By:
    Updated: Tue, 05 Apr 2022 11:34 PM (IST)

    रोहतक से जालंधर के बीच नेशनल हाइवे -71 में मोगा जिले की दो सब डिवीजन धर्मकोट व निहालसिंह वाला में जमीन अधिग्रहण में हुए करीब 100 करोड़ से ज्यादा के घोटाले के मामले में जेएमआइसी राधिका की अदालत ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान गवाहों को अदालत में गवाही के लिए पेश करने के आदेश दिए हैं।

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    जेएमआइसी राधिका की अदालत ने गवाहों को पेश होने के दिए निर्देश, अगली सुनवाई 21 मई को

    जागरण संवाददाता, मोगा: रोहतक से जालंधर के बीच नेशनल हाइवे -71 में मोगा जिले की दो सब डिवीजन धर्मकोट व निहालसिंह वाला में जमीन अधिग्रहण में हुए करीब 100 करोड़ से ज्यादा के घोटाले के मामले में जेएमआइसी राधिका की अदालत ने मंगलवार को सुनवाई के दौरान गवाहों को अदालत में गवाही के लिए पेश करने के आदेश दिए हैं।

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    इस बहुचर्चित घोटाले में हालांकि विजिलेंस ब्यूरो लुधियाना की ईओ विग जांच कर रही है, लेकिन मामला लंबे समय से जांच एजेंसी की फाइलों में दबे होने के कारण उपभोक्ता अधिकार संगठन के प्रदेश अध्यक्ष पंकज सूद ने अदालत में इस्तगासा दायर किया था। इसी इस्तगासा पर सुनवाई शुरू हुई है। इस्तगासा में दो पीसीएस अधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार सहित 28 लोगों को नाम सहित पार्टी बनाया गया था। इनमें से एक पीसीएस अधिकारी एडीसी खन्ना के पद पर पदोन्नति के बाद सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि इस मामले में मुख्य सूत्रधार बने कांग्रेस के एक पूर्व सांसद के दामाद नायब तहसीलदार से तहसीलदार के पद पर पदोन्नति पा चुके हैं।

    सुनवाई की अगली तिथि 21 मई

    न्यायाधीश राधिका ने सुनवाई की अगली तिथि 21 मई निश्चित की है। साथ ही निर्देश दिए हैं कि इस मामले में जो भी सरकारी व गैर सरकारी गवाह हैं, उन्हें अदालत में अगली तिथि को पेश किया जाए। सभी को समन जारी करने के आदेश दे दिए हैं। इस मामले में इस्तगासा में शामिल अधिकारियों व अन्य लोगों की पत्नी, बेटा, बेटी या अन्य रिश्तेदारों के खातों में राशि जमा कराई गई थी, ऐसे में गवाही के रूप में बैंक के अधिकारी भी अदालत में पेश होंगे। क्या है मामला

    जालंधर-बरनाला नेशनल हाईवे-71 में मोगा के धर्मकोट सब डिवीजन व निहालसिंह वाला सब डिवीजन में जमीन अधिग्रहण में बड़े पैमाने पर हेराफेरी का मामला सामने आया था। इस मामले में पहले विजिलेंस ब्यूरो लुधियाना (ईओ) विंग ने प्रारंभिक जांच की थी। प्रारंभिक जांच में हेराफेरी के अहम राज खुलें थे। जांच के बीच में ही एक आरोपित नायब तहसीलदार को पंजाब सरकार ने नियम विरुद्ध ढंग से प्रमोशन देकर तहसीलदार बना दिया था। पंचायतों को मिला मुआवजा भी कर गए चट

    विजिलेंस की प्रारंभिक जांच में सिर्फ जमीनों के अधिग्रहण में ही हेराफेरी सामने नहीं आई थी, बल्कि पंचायतों को मिली मुआवजा राशि भी कुछ लोग चट कर गए थे। ग्राम पंचायत धूड़कोट कलां को 56 लाख रुपये का मुआवजा मिला था, ये राशि हजम करने के मामले में तत्कालीन बीडीपीओ जसप्रीत सिंह व पंचायत सचिव एवं तत्कालीन सरपंच के खिलाफ थाना अजीतवाल में केस दर्ज कराया गया था। गांव फतेहगढ़ कोरोटाना को नौ करोड़ रुपये की राशि मुआवजा के रूप में मिली थी उसमें भी गड़बड़ी की शिकायतें हुई थीं। एक रोचक मामला ये भी सामने आया था कि जमीन अधिहग्रहण के समय गांव बुग्गीपुरा के धार्मिक संस्था से जुड़े एक संत ने ज्यादा मुआवजा दिलाने के लिए एक पटवारी को पांच लाख रुपये की राशि रिश्वत के रूप में दी थी। मामला उजागर होने पर पटवारी को ये राशि वापस करनी पड़ी थी।