Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    124वां अध्यात्म सत्यार्थ सत्संग और हवन-यज्ञ करवाया

    By JagranEdited By:
    Updated: Sat, 18 Jun 2022 03:36 PM (IST)

    । देवीदास केवल कृष्ण चैरिटेबल ट्रस्ट में 124वां अध्यात्म सत्यार्थ सत्संग एवं हवन-यज्ञ करवाया गया।

    Hero Image
    124वां अध्यात्म सत्यार्थ सत्संग और हवन-यज्ञ करवाया

    संवाद सहयोगी, मोगा

    देवीदास केवल कृष्ण चैरिटेबल ट्रस्ट में 124वां अध्यात्म सत्यार्थ सत्संग एवं हवन-यज्ञ करवाया गया। इस दौरान सुनील कुमार शास्त्री ने हवन यज्ञ की प्रचंड अग्नि में आहुतियां डालकर विश्व भले की कामना की।

    इंदू पुरी ने कहा कि हमें निरंतर अधिकाधिक स्वाध्याय करना चाहिए। इससे हमारा ज्ञान विज्ञान ठीक गलत का पता चलता है। उधर, आचार्य सुनील कुमार ने बताया कि सभी धनों में उत्तम धन 'विद्या धन' है और सब विद्याओं में उत्तम विद्या वेदों की अध्यात्म विद्या है। मनुष्य के दो प्रयोजन हैं। एक-सब दुखों की निवृत्ति हो जाए और दूसरा-उत्तम सुखों की प्राप्ति हो जाए। मनुष्य का सारा प्रयत्न इन्हीं दो प्रयोजनों की सिद्धि के लिए होता है। भोजन, वस्त्र, मकान, धन बल, विद्या, बुद्धि, सम्मान आदि को मनुष्य सब दुखों की निवृत्ति के लिए तथा उत्तम सुखों की प्राप्ति के लिए प्राप्त करना चाहता है। परंतु जो दुख निवृत्ति और सुख की प्राप्ति भोजन वस्त्र मकान आदि भौतिक साधनों से होती है उससे कई गुना अधिक उत्तम दुख निवृत्ति तथा सुख की प्राप्ति वेदों की विद्याओं से होती है।जैसे गणित विद्या, भूगोल विद्या, खगोल विद्या, विमान विद्या, नौका विद्या आदि इन सब विद्याओं से भी जो सुख मिलता है उससे भी कई गुना अधिक उत्तम सुख, अध्यात्म विद्या अथवा योग विद्या से मिलता है। इसलिए व्यक्ति को अपने जीवन यापन के लिए जहां भौतिक धन संपत्ति की आवश्यकता है वहां विद्याओं की भी आवश्यकता है। विशेष रूप से अध्यात्म विद्या की। इस अध्यात्म विद्या की प्राप्ति वेदों और ऋषियों के ग्रंथों से ठीक-ठीक होती है।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें