Punjab News: नहीं चाहिए थी बच्ची तो गोबर में दबाया, कोर्ट ने माता- पिता को सुनाई उम्रकैद की सजा
28 सितंबर 2020 को फतेहगढ़ कोरोटाना में एक नवजात को गोबर में दबाने का मामला सामने आया। इस मामले में पुलिस ने माता पिता के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया था। वहीं इस मामले पर स्थानीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश विक्रांत कुमार की अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद दंपत्ति को उम्रकैद (life imprisonment) की सजा सुनाई है।

संवाद सहयोगी, मोगा। स्थानीय अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायधीश विक्रांत कुमार की अदालत ने नवजात को गोबर में दबाने से उसकी मौत के मामले में माता पिता को उम्रकैद की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, 28 सितंबर 2020 की सुबह फतेहगढ़ कोरोटाना के सरपंच दिलबाग सिंह को गांव के जगतार सिंह ने सूचना दी कि निर्मल सिंह के घर के पास पड़े खाली प्लाट में लगी रूड़ी में एक व्यक्ति नवजात बच्ची को आधा दबा गया है। जिस पर पुलिस को सरपंच ने 112 पर घटना की जानकारी दी।
गोबर में दफनाकर आरोपित हो गए फरार
इस मामले की सूचना पर पहुंची पुलिस ने मौके पर पहुंचकर गणमान्य की उपस्थिति में बच्ची को रूड़ी से निकाल इलाज के लिए सिविल अस्पताल मोगा भेज दिया। वहीं, अज्ञात के खिलाफ धारा 307 तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी। जांच दौरान पुलिस ने गुरदेव सिंह पुत्र नछतर सिंह तथा हरदीप कौर पत्नी गुरदेव सिंह को नामजद कर लिया। लेकिन दोनों आरोपित फरार हो गए।
इलाज के दौरान बच्ची की हो गई थी मौत
वहीं, नवजात बच्ची की जिम्मेदारी बाल सुरक्षा विभाग को सौंपीं गई। लेकिन 6 अक्टूबर को बच्ची की मौत हो जाने के चलते इस मामले में धारा 302 लगा दी गई। 16 नवम्बर को मुख्य आरोपित गुरदेव सिंह तथा उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। जांच में सामने आया था कि दंपत्ति बच्ची नहीं चाहता था और रात के समय गुरदेव सिंह ने उसे जल्दबाजी में रूडी यानी गोबर के ढेर में छिपाकर दिया था।
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पति पत्नी को सुनाई उम्रकैद की सजा
बच्ची के गोबर में से नंगे पड़े अंगों को देखकर वहां से गुजर रहे एक व्यक्ति ने इस संबंधी जानकारी गांव के सरपंच को दी थी। पुलिस ने जांच दौरान हरदीप कौर के गर्भवती होने को लेकर उस द्वारा करवाए इलाज के साक्ष्यों समेत बच्ची व हरदीप कौर का डीएनए टेस्ट करवा उसकी रिपोर्ट तक दर्ज की। बुधवार को अदालत ने साक्ष्यों व अभियोजन पक्ष की दलीलों से सहमत होते हुए गुरदेव सिंह व उसकी पत्नी को उम्रकैद की सजा का फैसला सुनाया है।
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