श्री राधा कृष्ण मंदिर में कोरोना के खात्मे के लिए प्रार्थना
राजिदरा एस्टेट स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर में श्रद्धालुओं ने श्री दुर्गा स्तुति का पाठ करके कोरोना महामारी के खात्मे के लिए प्रार्थना की।

संवाद सहयोगी, मोगा
राजिदरा एस्टेट स्थित श्री राधा कृष्ण मंदिर में श्रद्धालुओं ने श्री दुर्गा स्तुति का पाठ करके कोरोना महामारी के खात्मे के लिए प्रार्थना की।
पुजारी राहुल शर्मा ने बताया कि मां दुर्गा की भक्ति में वो शक्ति है जो बड़े से बड़े संकट को भी खत्म कर देती है। इसलिए हमें श्रद्धाभाव से माता की पूजा, अर्चना व दुर्गा स्तुति का पाठ करना चाहिए। कोरोना संक्रमण दिन प्रतिदिन बढ़ रहा है ऐसे में आस्था के साथ सतर्कता का भी ध्यान रखना जरूरी है। माता चितपूर्णी का धाम हिमाचल प्रदेश के ऊना में स्थित है जहां 26 मई जयंती के दिन मेला लगता है। उन्होंने कहा कि 26 मई को माता चितपूर्णी का जयंती उत्सव मनाया जा रहा है। मिनी लाकडाउन के चलते भले ही हम हिमाचल प्रदेश में मां चितपूर्णी के दरबार में जयंती पर नहीं पहुंच सकते, ऐसे में हम सबको चाहिए कि हमें अपने घरों में जयंती उत्सव मनाते हुए हवन यज्ञ करना चाहिए। साथ ही सभी लोग प्रार्थना करें कि मां भगवती इस महामारी को समाप्त करे ताकि हम फिर से सामूहिक रूप में इस तरह के समागम मना सकें। शास्त्रों के अनुसार छिन्नमस्तिका अपने भक्तों की समस्त मनोकामना पूर्ण करने के साथ-साथ चिता भी दूर करती है। इसलिए इन्हें चितपूर्णी के नाम से पूजा जाता है। मोहिनी एकादशी पर गोपाल गोशाला मंदिर में करवाया संकीर्तन मोहिनी एकादशी के उपलक्ष्य में श्री गोपाल गोशाला मंदिर में जय मां चितपूर्णी संकीर्तन मंडल अन्य भक्तों ने संकीर्तन किया। प्रधान चमनलाल गोयल, एस के बांसल और रमन गोयल ने ज्योति प्रज्वलित की।
राधिका मीनू और शकुंतला देवी ने मेरे मन मंदिर में आओ सांवरे गिरधारी, प्रभु इतनी कृपा करना तेरा ध्यान रहे हर पल, राधे-राधे श्याम मिला दे, मैं कमली श्याम दी कमली, सतगुरु मैं तेरी पतंग हवा विच उड़ दी जावांगी, ड़ोर हत्थो छड्डी ता मैं कट्टी जावांगी . आदि भजनों का गायन किया। संकीर्तन के पश्चात मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित पवन कौशिक ने मोहिनी एकादशी के महत्व का वर्णन करते हुए बताया कि आज ही के दिन भगवान विष्णु ने समुंद्र मंथन के समय निकले अमृत को पाने के लिए जब देव दानव में संघर्ष छिड़ गया तब उस विवाद को ठीक करने के लिए भगवान विष्णु ने मोहनी रूप लिया और देवताओं को अमृत पान करवा कर दानवों को परास्त किया। देवताओं का हित कार्य किया। यह मोहिनी एकादशी व्रत की महिमा को दर्शाता है। इस मौके पर आई हुई संगत ने कीर्तन का आनंद लेते हुए भगवान की स्तुति श्रवण की।
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