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    स्कूल संचालकों की बताई दुकानों से महंगी किताबें खरीदने को मजबूर परिजन

    By JagranEdited By:
    Updated: Tue, 05 Apr 2022 11:50 PM (IST)

    कस्बे में इन दिनों स्कूल की किताबों कापियों के नाम पर वसूले जा रहे मनमाने दाम को लेकर अभिभावकों में आक्रोश का माहौल है।

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    स्कूल संचालकों की बताई दुकानों से महंगी किताबें खरीदने को मजबूर परिजन

    तरसेम सचदेवा, कोट ईसे खां

    कस्बे में इन दिनों स्कूल की किताबों, कापियों के नाम पर वसूले जा रहे मनमाने दाम को लेकर अभिभावकों में आक्रोश का माहौल है। दुकानदार किताबों के सैट का पक्का बिल भी नहीं दे रहे, पेरेंट्स के लिए मुश्किल बात ये है कि निजी पब्लिशर्स की किताबें स्कूल अपने मनचाहे दुकानदार के पास रखवाते हैं। वहीं से किताबें मिलती हैं, अन्य किसी के पास से नहीं मिलती है, दूसरे शहर में पेरेंट्स किताबें लेने जाते हैं तो वहां आधे से भी कम कीमतों पर किताबें उपलब्ध हो जाती हैं, लेकिन ऐसा करने पर स्कूल में बच्चों को परेशान किया जाता है, बच्चों को स्कूल द्वारा बताई दुकानों से ही किताबें खरीदने को मजबूर होना पड़ता है।

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    कस्बे में एक स्कूल संचालक ने तो स्कूल के निकट ही दुकान खुलवाकर वहां अपने रिश्तेदार को बैठा दिया है। पेरेंट्स का कहना है कि किताबों का जो सैट एनसीईआरटी का 800 से 1000 रुपये में मिल जाता है वही सैट निजी पब्लिशर्स का 3000 से 4000 रुपये में मिल रहा है।

    दैनिक जागरण की टीम ने किताबों के एक होलसेलर दुकानदार से बातचीत की तो उसने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि स्कूल संचालक जालंधर से एक प्रिटिग प्रेस से किताबें खुद मंगवाते हैं। वह प्रिटिग प्रेस वाले सिर्फ प्राइवेट स्कूलों को ही किताबें सप्लाई करते हैं। इन किताबों में प्रिट रेट का 70 प्रतिशत हिस्सा उन्हे स्कूल संचालकों को देना होता है, इसी शर्त पर उन्हें किताबों की सप्लाई का आर्डर दिया जाता है। इसके लिए किताबों पर प्रिट रेट ज्यादा प्रिट किया जाता है। सामान्य दुकनदार को प्रति सैट 50 रुपये ही मिलते हैं, भले ही किताबों की कीमत छह हजार हो या चार हजार रुपये। किताबें पहले स्कूलों से ही बेची जाती थी लेकिन मामले समाचार पत्रों की सुखियां बनने के बाद अब दुकानों से बेची जा रही हैं। क्या कहते हैं लोग

    समाजसेवी कर्मजीत सिंह ढिल्लों ने बताया कि उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से आग्रह किया है कि स्कूल जो भी किताबें बच्चों के लिए लिखें, उनके लिए निर्धारित दुकान न हो, कहीं भी बच्चे को खरीदने की छूट मिल जाए तो इससे भी पेरेंट्स को बड़ी राहत मिल सकती है। अभिभावक राम सहारा का कहना है कि उनका बच्चा जिस स्कूल में पढ़ता है, उस स्कूल से उन्हें सेतिया सिलेक्शन नामक दुकानदार से ही किताबें लाने को कहा गया है। सेतिया सिलेक्शन में किताबें लेने गए तो दूसरी कक्षा का सैट 3098 रुपये, छठी कक्षा का सैट 4276 रुपए में मिला। इसका टोटल बना 7374 रुपये बनती है। इस पर 10 फीसद कटौती से उन्हें यह किताबें 6636 रुपये में मिलीं। जबकि जालंधर में पता करने पर किताबों का यही सैट 2000 से 2500 में उपलब्ध था। वीडियो बनाकर भेजो करेंगे कार्रवाई

    इस संबंध में जब डीईओ सुशील कुमार से बात की तो उन्होंने कहा कि ऐसे दुकानदारों की वीडियो बनाकर भेजो फिर कार्रवाई करेंगे।