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अमित शाह के पंजाब दौरे पर भड़के बलकौर सिंह, मानसा में बोले- राजनीति में आने का दिया था ऑफर, ठुकरा दिया

Published: Tue, 20 Oct 2026 03:07 PM (IST)

सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री के दौरे पर सवाल उठाते हुए कहा कि हत्या की ...और पढ़ें

मानसा में परविंदर सिंह झोटा के पिता के साथ सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह।

मानसा में परविंदर सिंह झोटा के पिता के साथ सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह।

HighLights

  1. बलकौर सिंह ने अमित शाह के पंजाब दौरे पर सवाल उठाए।

  2. मूसेवाला की हत्या के बाद राजनीति में आने का ऑफर मिला।

  3. लॉरेंस बिश्नोई को साबरमती जेल में रखने पर भी सवाल।

जागरण संवाददाता, मानसा। विदेश में ‘साइन टू गाड’ प्रोग्राम रद्द करने के बाद धरने पर पहुंचे सिद्धू मूसेवाला के पिता बलकौर सिंह ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पंजाब दौरे पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि उनके बेटे की हत्या के बाद उन्हें राजनीति में आने और पार्टी में शामिल होकर चुनाव लड़ने का प्रस्ताव दिया गया था, ताकि न्याय मिल सके।

बलकौर सिंह ने उस समय को याद करते हुए कहा कि जब उनके बेटे की चिता की राख भी ठंडी नहीं हुई थी और वे अस्थियां चुनकर लौट रहे थे, तब उन्हें सांसद बनने का लालच दिया गया था। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में उनकी आत्मा ने इसकी बिल्कुल इजाजत नहीं दी, क्योंकि तब उन्हें यह भी नहीं पता था कि उनके बेटे की हत्या किन परिस्थितियों में और किसने की है।

उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बेटे की हत्या की जांच के नाम पर सिर्फ मजाक उड़ाया गया है। एसआईटी जांच और नार्को टेस्ट के बड़े-बड़े दावे किए गए, लेकिन धरातल पर कुछ भी नहीं हुआ।

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लॉरेंस बिश्नोई का उठाया मुद्दा

केंद्रीय गृह मंत्री पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि अमित शाह पीड़ित परिवारों से मिलने आ रहे हैं, लेकिन उन्हें नहीं लगता कि इस दौरे से परविंदर झोटा हत्याकांड मामले में कोई ठोस नतीजा निकलेगा।

उन्होंने सवाल किया कि सरकार उस कुख्यात गैंगस्टर को साबरमती जेल में कब तक सुरक्षित रखेगी और उसे अदालत में पेश क्यों नहीं होने दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि एक तरफ वे लोग डरकर अदालत जाते हैं, दूसरी तरफ जेल से वीडियो जारी कर बेगुनाही का दावा किया जाता है।

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न्यास के नाम पर सिर्फ आश्वासन मिला

मुख्यमंत्री पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि यदि इस मामले की जांच CBI को ही सौंपनी थी, तो पीड़ित परिवार और समर्थकों को एक सप्ताह तक धरने पर बैठने के लिए मजबूर क्यों किया गया। बलकौर सिंह ने साफ कहा कि न्याय के नाम पर केवल आश्वासन दिए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में पीड़ितों को इंसाफ नहीं मिल रहा है।

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