'पोस्टमार्टम के लिए नहीं दी सहमति, दुकान गिराकर मिटाए सबूत...', CBI से मिलने के बाद परविंदर झोटा की पत्नी का बड़ा बयान
परविंदर झोटा की पत्नी मनप्रीत कौर ने सीबीआई से मिलने के बाद कहा कि पोस्टमार्टम पर फैसला संगत से पूछकर और कमेटी की चर्चा के बाद ही लिया जाएगा।
HighLights
परविंदर झोटा की पत्नी ने पोस्टमार्टम के लिए सहमति देने से इनकार किया।
सीबीआई जांच के बावजूद परिवार ने अभी तक सहमति नहीं दी।
सबूत मिटाने का आरोप लगाया, नशा तस्करों के बहिष्कार की अपील।
डिजिटल डेस्क, मानसा। परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड मामले में नया मोड़ आ गया है। CBI की टीम द्वारा मामले की जांच अपने हाथ में लेने और नए सिरे से FIR दर्ज करने के बाद माना जा रहा था कि आज परविंदर सिंह झोटा के शव का पोस्टमार्टम हो जाएगा। लेकिन, परिवार ने एक बार फिर पोस्टमार्टम के लिए सहमति नहीं दी है।
सीबीआई से मुलाकात के बाद मृतक की पत्नी मनप्रीत कौर संघर्ष की रही संगत के बीच मंच पर पहुंचीं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पिछले सात दिनों से उनका परिवार और संगत धरने पर बैठे हैं, लेकिन उन्होंने अभी तक पोस्टमार्टम के लिए किसी भी कागजात पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं। उन्होंने कहा कि वे कोई भी बड़ा फैसला संगत से पूछ और कमेटी की रजामंदी के बिना नहीं लेंगी।
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सबूत मिटाने के लगाए गंभीर आरोप
मंच से बोलते हुए मनप्रीत कौर ने राज्य सरकार और प्रशासन पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि उनकी तरफ से दुकान गिराने की कोई मांग नहीं की गई थी, लेकिन इसके बावजूद दुकान को गिराकर अहम सबूतों को मिटाने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने चिंता जताई कि जैसे-जैसे समय बीतता जा रहा है, वैसे-वैसे सबूत नष्ट हो रहे हैं। उन्होंने संगत के सामने यह सवाल भी रखा कि शव को मॉर्चुरी में पड़े हुए एक हफ्ता हो चुका है, ऐसे में सबूत बचाने के लिए क्या अब पोस्टमार्टम करवा लेना चाहिए? इस पर पूरी संगत ने अपनी सहमति जताई। लेकिन मनप्रीत ने साफ किया कि वे संगत के फैसले को अब कमेटी में लेकर जाएंगे। अंतिम फैसला कमेटी के साथ ही होगा।
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नशा तस्करों के पूर्ण बहिष्कार की अपील
मनप्रीत कौर ने इलाके के युवाओं और परिवारों से अपील करते हुए कहा कि गांवों और मोहल्लों में नशा बेचने वाले गिने-चुने परिवार ही होते हैं। एक गांव या महल्ले में 2-3 परिवार ऐसे होते हैं। जबकि बाकी घरों की संख्या 100 तक होती है। ऐसे में जब किसी घर का बेटा नशे की भेंट चढ़ता है, तो पूरा समाज खामोश क्यों रहता है?
उन्होंने मांग की है कि समाज को बचाने के लिए नशा बेचने वाले परिवारों का पूरी तरह से सामाजिक बहिष्कार किया जाना चाहिए।
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