लुधियाना, [आशा मेहता]। Smart Seeder: पंजाब में किसानों के लिए पराली प्रबंधन हमेशा के बड़ी चुनौती रहा है। इसके लिए पंजाब कृषि विश्वविद्यालय (पीएयू) ने कई मशीनें बनाई हैं। इन मशीनों की क्षमता और कुशलता लगातार बढ़ाई जा रही है। इसी कड़ी में पीएयू के फार्म मशीनरी व पावर इंजीनियरिंग विभाग ने स्मार्ट सीडर नाम की मशीन तैयार की है। यह हैप्प्पी सीडर व सुपर सीडर का सुमेल है।

इस मशीन में पराली को संभालने और खेत को जोतने के लिए छोटे-छोटे ब्लेड, बीज-खाद डालने वाला सिस्टम, नई किस्म के डिस्क फाले व बीज को मिट्टी से ढकने वाले रोलर लगे हुए हैं, जो पराली के थोड़े हिस्से को मिटटी में मिलाते हैं, जबकि बाकी बची पराली को मिट्टी की सतह के ऊपर बिछा देते हैं। मशीन के साथ बीजी गई गेहूं की पैदावार हैप्पी सीडर की तुलना में बराबर और सुपर सीडर के मुकाबले ज्यादा होती है।

स्मार्ट सीडर पराली के लगभग 15 से 20 फीसद हिस्से को मिटटी में मिलाता है और बीज को मिट्टी में एक इंच अंदर तक छोड़ता है, जिस कारण गेहूं के बीज पराली के उपर गिरने की संभावना कम हो जाती है और यह बराबर अंकुरित होता है। सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे किसी भी 45 से 50 हार्स पावर क्षमता वाले ट्रैक्टर के साथ इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि सुपर सीडर को चलाने के लिए 55 से 60 हार्स पावर क्षमता वाले ट्रैक्टर की जरूरत होती है।

एक घंटे में एक एकड़ जमीन में गेहूं की बिजाई

स्मार्ट सीडर मशीन एक घंटे में एक एकड़ जमीन में गेहूं की बिजाई 5.5 लीटर डीजल में कर देता है, जबकि सुपर सीडर एक घंटे में करीब 0.75 एकड़ जमीन में बिजाई करता है और सात से आठ लीटर डीजल की खपत करता है। पीएयू के फार्म मशीनरी विभाग के प्रमुख डा. महेश नारंग ने कहा कि इस मशीन की कार्य क्षमता सुपर सीडर से अधिक है, तेल की खपत हैप्पी सीडर और सुपर सीडर से कम है। पंजाब में अलग-अलग जगहों पर किए गए प्रयोग में देखने को मिला है कि स्मार्ट सीडर से बीजी गई गेहूं का झाड़ सुपर सीडर से चार फीसद अधिक है।

इसलिए बेहतर है स्मार्ट सीटर

हैप्पी सीडर बिना खेत जोते गेहूं की बिजाई करता है। वहीं, सुपर सीडर खेत की जुताई के साथ ही बिजाई करता है। दोनों को 55 से 60 हार्स पावर के ट्रैक्टर की जरूरत होती है। डीजल की खपत ज्यादा है। पराली वाले खेतों में बीजी गई गेहूं पैदावार एक जैसी नहीं होते। ज्यादातर दाने मिट्टी के अंदर मिक्स होने के बजाय पराली के ऊपर गिरते हैं, जिससे बीज जल्दी अंकुरित नहीं होता। डा. महेश नारंग कहते हैं कि किसानों को ऐसी मशीन की जरूरत थी, जो कि खेत की जुताई भी करे और छोटे ट्रैक्टर यानी 45 से 50 हार्स पावर के ट्रैक्टर के साथ चल सके। स्मार्ट सीडर इस जरूरत को पूरा करता है।

मशीन की कीमत एक लाख 90 हजार

डा. महेश नारंग ने बताया कि पंजाब के कुछ मैन्युफैक्चरर्स पीएयू स्मार्ट सीडर बना रहे हैं। इनमें एक लुधियाना व एक अमृतसर में है। मशीन की कीमत एक लाख 90 हजार रुपये के करीब होगी। मशीन महंगी है, इसलिए पीएयू ने पंजाब सरकार से कहा है कि इसके लिए किसानों को सब्सिडी दी जाए। पंजाब सरकार ने केंद्र सरकार से अन्य मशीनों की तरह इस पर भी सब्सिडी उपलब्ध करवाने का आग्रह किया है। उम्मीद है कि जल्द ही इस पर सब्सिडी मिलने लगेगी। अभी जो किसान इसे खरीदना चाहते हैं, वो पीएयू के फार्म मशीनरी विभाग या पीएयू के कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क कर सकते हैं।

Edited By: Vipin Kumar