लुधियाना छोड़ जालंधर कैंट से चुनाव लड़ेंगे रवनीत बिट्टू? पार्टी के भीतर नाराजगी और खींचतान के बाद चर्चाएं तेज
भारतीय जनता पार्टी नेता रवनीत सिंह बिट्टू 2027 का विधानसभा चुनाव जालंधर कैंट सीट से लड़ सकते हैं। पार्टी के ...और पढ़ें

भाजपा नेता रवनीत सिंह बिट्टू।
HighLights
रवनीत बिट्टू 2027 में जालंधर कैंट से चुनाव लड़ सकते हैं।
लुधियाना में पार्टी के भीतर चल रही खींचतान मुख्य कारण।
जालंधर कैंट सीट बिट्टू परिवार के लिए भाग्यशाली रही है।
विजय मौर्य, लुधियाना। भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू 2027 में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में जालंधर कैंट सीट से लड़ सकते है। सूत्रों के अनुसार लुधियाना में पार्टी के भीतर चल रही खींचतान और नाराजगी के चलते बिट़्टू लुधियाना की बजाए जालंधर कैंट विधानसभा सीट पर जा सकते है।
जानकारी के अनुसार राज्यसभा सांसद पद के इस्तीफे के बाद पूर्व केंद्रीय रेल राज्य मंत्री बिट्टू को दुबारा मंत्री नहीं बनाया गया। इसके बाद से वह अपनी जमीन तलाश रहे है। पहले वह लुधियाना की दक्षिण व उत्तरी विधानसभा सीट पर अपनी चुनावी जमीन बनाने पर काम कर रहे थे। लेकिन शहर में संगठन के भीतर उनके प्रति कई नेताओं और कार्यकर्ताओं की नाराजगी सामने आई।
जिसे देखते हुए यहां उनकी राह आसान नहीं मानी जा रही थी। केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रहते हुए बिट्टू की कार्यकर्ताओं से दूरी और कई नेताओं के साथ संवाद की कमी व उनके काम न होने से पार्टी के अंदर असंतोष फैला है। इन चर्चाओं के चलते बिट्टू की नजर जालंधर कैंट सीट पर बनी है। अब चर्चा है कि वे जालंधर कैंट सीट से चुनाव लड़ सकते हैं।
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जालंधर कैंट सीट से क्यों ?
जालंधर कैंट को बिट्टू परिवार के लिए राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। बिट्टू के दादा व पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय बेअंत सिंह ने 1992 में जालंधर कैंट से
कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था और जीत गए थे। इसके बाद वे पंजाब के मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि उनकी परंपरागत सीट पायल थी। लेकिन वे जालंधर कैंट से चुनाव लड़ें। इसके बाद बेअंत सिंह के बेटे तेज प्रकाश सिंह ने 1997 में जालंधर कैंट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की।
यही नहीं पूर्व सीएम बेअंत सिंह की बेटी गुरकंवल कौर ने 2002 में जालंधर कैंट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। बाद में वह कैप्टन अमरिंदर सिंह की अगुवाई वाली कांग्रेस सरकार में मंत्री बनीं। चूंकि बिट्टू के परिवार के लिए जालंधर कैंट सीट लक्की साबित हुई और समर्थक भी है। इसी लिए वे यहां अपनी पुरानी राजनीतिक विरासत के अलावा भावनात्मक और रणनीतिक दोनों स्तर पर महत्वपूर्ण मान रहे है।
पार्टी का प्रगट सिंह को उनके गढ़ में घेरने की रणनीति
जालंधर कैंट प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रगट सिंह का मजबूत राजनीतिक क्षेत्र माना जाता है। वे मौजूदा समय में इस सीट पर विधायक है और दो बार पहले इसी सीट पर चुनाव जीत चुके है। पार्टी का एक धड़ा मानता है कि भाजपा अगर यहां बिट्टू जैसे बड़े चेहरे को चुनावी मैदान में उतारती है तो प्रगट सिंह को घेरा जा सकता है।
चूंकि प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते उन्हें पूरे पंजाब में संगठन और उम्मीदवारों के प्रचार की जिम्मेदारी संभालनी होगी। ऐसे में भाजपा की रणनीति कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष को उनके गढ़ में ही घेरकर प्रदेश स्तर पर उनकी सक्रियता को सीमित करने की हो सकती है।
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जाट-हिंदू के साथ रविदास समाज पर नजर
जालंधर कैंट में जाट और हिंदू मतदाताओं के साथ दलित, विशेषकर रविदास समाज का वोट बैंक भी अहम माना जाता है। भाजपा नए सामाजिक समीकरणों के सहारे इस वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर सकती है। डेरा संत बल्लां से जुड़े समीकरणों और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विभिन्न कार्यक्रमों में डेरा बल्ला में आना भाजपा के पक्ष में बन रहे माहौल के तौर पर देखा जा रहा है।
