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    लुधियाना में बलिदानी सुखदेव के पुश्तैनी घर को चूहों ने किया खोखला, कभी भी ढह सकती है इमारत

    By Pankaj DwivediEdited By:
    Updated: Fri, 13 May 2022 02:29 PM (IST)

    भगत सिंह और सुखदेव थापर के परिवार के बीच में नजदीकियां पहले से ही थीं। इसी कारण भगत सिंह बपचन में यहां आया करते थे। सुखदेव और भगत सिंह यहां पर इक्ट्ठा खेल कूद किया करते थे मगर जैसे-जैसे बड़े हुए तो वह एक दूसरे से दूर हो गए थे।

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    लुधियाना के नौघरा स्थित बलिदानी सुखदेव के पुश्तैनी घर की हालत जर्जर।

    दिलबाग दानिश, लुधियानाः भारत में औद्योगिक नगरी के नाम से जाने जाते लुधियाना का नौघरा मोहल्ला इतिहास के पन्नाें में विशेष स्थान रखता है। यहां पर ही भारत के वीर सपूत बलिदानी सुखदेव का जन्म 15 मई 1907 को हुआ था। इसी मोहल्ले की गलियों में वह भगत सिंह के साथ खेल कूद किया करते थे और यहीं पर पिता की मौत के बाद उनकी मा ने उनका पालन पोषण किया था। यहां आज भी उनका पुश्तैनी घर मौजूद है, जिसकी देख-रेख पुरात्तव विभाग की तरफ से की जाती है। बलिदानी सुखदेव थापर मेमोरियल ट्रस्ट के नाम से उनके नाम से एक ट्रस्ट भी परिवार की तरफ से बनाया गया है। ट्रस्ट के प्रमुख अशोक थापर, संजीव थापर गोरा, त्रिभुवन थापर समेत पदाधिकारी हैं, जो उनके इस पुश्तैनी घर की देख-रेख और उनके जन्मदिन और शहादत दिवस पर समारोह करवाते हैं।

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    पहले से ही थीं भगत सिंह और सुखदेव थापर के परिवार में नजदीकियां

    अशोक थापर बताते हैं कि बलिदानी सुखदेव थापर के पिता श्रीयुत रामलाल थापर, सुखदेव के जन्म से तीन माह बाद ही उन्हें छोड़ गए थे। इसके बाद उनका पालन पोषण उनकी मां श्रीमती रल्ली देवी ने अन्य रिश्तेदारों के सहयोग से किया था। वह बताते हैं भगत सिंह के परिवार और सुखदेव थापर के परिवार के बीच में नजदीकियां पहले से ही थीं और इसी कारण भगत सिंह बपचन में यहां आया करते थे। सुखदेव और भगत सिंह यहां पर इक्ट्ठा खेल कूद किया करते थे मगर जैसे-जैसे बड़े हुए तो वह एक दूसरे से दूर हो गए थे। बाद में उनका मिलन लाहौर के कालेज में हुआ था और वहीं से बचपन का प्यार गहरी दोस्ती में बदल गया और वह आजादी के परवाने हो निपटे थे। उनकी शहादत के बाद यहां पर उनकी याद में प्रत्येक वर्ष समारोह करवाए जाते हैं। जिसमें देश के कई प्रधान मंत्री और पंजाब के मुख्यमंत्री पहुंच चुके हैं।

    इस वजह से संघर्ष कर रहा परिवार

    ट्रस्ट के सदस्य त्रिभुवन थापर बताते हैं कि प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह भी एक बार समारोह में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे थे। उनकी तरफ से बलिदानी सुखदेव के घर की मुरम्मत के लिए एक करोड़ रुपए देने का वादा किया था मगर यह पैसे अभी तक नहीं मिले हैं। इसके अलावा यहां पर हेरीटेज वाल बनाने, पुश्तैनी घर को सीधा रास्ता दिलवाने और घर की मुरम्मत के लिए वह लगातार संघर्ष कर रहे हैं। हाल ही में परिवार की तरफ से भूख हड़ताल करने पर यहां की मुरम्मत का काम शुरू हुआ है। इस बार जन्म दिवस समारोह में मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान पहुंच रहे हैं और इस कारण यहां सड़क भी बन रही है और रंग रोगन का काम भी किया जा रहा है।

    पुरातत्व विभाग के अधीन है इमारत, नहीं आता कलर्क

    यह इमारत पिछले लंबे समय से पुरात्तव विभाग के पास है। इसे खोलकर रखने के लिए एक कलर्क की ड्यूटी लगाई गई है, जो यहां आने वाले लोगों को इस संबंध में जानकारी देता है। वह पिछले कई दिन से यहां नहीं आया है और न ही किसी ने इसकी सफाई करवाई है। गंदगी का आलम यह है कि यहां अब गंदगी की बदबू आ रही है।

    चूहों ने खोखला कीं घर की नींव, कभी भी ढह सकती है इमारत

    यहां के हालात इस कदर बदतर हैं कि इस घर की नींव को चूहों ने खोखला कर दिया है और यह कभी भी गिर सकता है। अगर समय रहते इसका हल नहीं किया गया तो एक दिन ऐसा आएगा कि भारत के इतिहास में फखर से याद किए जाते शहीद सुखदेव सिंह थापर की यह आखिरी निशानी भी मलबे में तब्दील हो जाएगी।