Monsoon Health Tips: बरसात में चाय व लस्सी पीने और राजमा-चावल खाने वाले संभल जाएं; पढ़ें ज्वाइंट पेन एक्सपर्ट की सलाह
Joint Pain in Monsoon बरसात में लोग लोग लस्सी राजमा चावल नॉनवेज छिलके वाली दाल छोले आदि का सेवन कर रहे हैं। अत्यधिक चाय भी पीते हैं। ये सभी चीजे बै करती है। जोड़ों का दर्द बढ़ता है। शरीर में कैल्सियम की कमी वाले मरीजों को ज्यादा दिक्कत होती है।

जासं, लुधियाना। ऐसे लोग जो बरसात के मौसम में रोजाना लस्सी पी रहे हैं, हर तीसरे-चौथे दिन राजमा चावल का स्वाद ले रहे हैं या नॉनवेज खाते हैं या दिन में 3-4 बार चाय पीते हैं, वे संभल जाएं। बरसात के मौसम में खानपान की यह आदतें आपको बेइंतेहा दर्द दे सकती हैं। जी हां, ऐसा ही कुछ कहना है डॉक्टरों का। शहर के हड्डी रोग विशेषज्ञों के पास जोड़ो के दर्द से जूझ रहे काफी मरीज पहुंच रहे हैं। डॉ. जेएल बस्सी यूनिट ऑफ बस्सी नर्सिंग होम के सीनियर ऑर्थोपेडिक डॉ. धीरेन बस्सी कहते हैं कि पिछले दो सप्ताह से जोड़ो में दर्द की शिकायत के साथ काफी मरीज आ रहे हैं।
कई मरीजों का तो पूरे शरीर के जोड़ो में दर्द हो रहा है। दर्द इतना होता है कि मरीज चलने फिरने में भी सक्षम नहीं होते। सहारा लेकर चल पाते हैं। इसकी सबसे बड़ी वजह उनका खानपान है। इस मौसम में बहुत से लोग लस्सी, राजमा चावल, नॉनवेज, छिलके वाली दाल, छोले आदि का सेवन कर रहे हैं। अत्यधिक चाय भी पीते हैं। ये सभी चीजे बै करती है। इनको ज्यादा लेने से जोड़ो में दर्द शुरू हो जाता है। शरीर के सारे जोड़ दुखते हैं।
शरीर में कम कैल्सियम वालों को ज्यादा परेशानी
सबसे ज्यादा दिक्कत उन लोगों को आ रही है, जिनके शरीर में कैल्सियम की कमी होती है। उन्होंने कहा कि बै एक प्रोटीन हैं। जब प्रोटीन ज्यादा हो जाता है, तो आटोमेटिकली जोड़ो में जमा हो जाता है क्योंकि किडनी उसे पूरा साफ नहीं कर पाती है। इसी कारण स्टोन बनने शुरू हो जाते हैं, जिससे जोड़ो में दर्द बढ़ जाता है।
बरसात में चाय और लस्सी न पीएं जोड़ों के दर्द वाले मरीज
डॉ. धीरेन बस्सी ने कहा कि हम मरीजों को सलाह दे रहे हैं कि बरसात के मौसम में इन खाद्य पादार्थों का सेवन न करें। चाय और लस्सी बिल्कुल न लें। जिन मरीजों को जोड़ो में लगातार दर्द महसूस हो रहा है, उन्हें हम यूरिक एसिड, कैल्शियम, सीबीसी करवाने की सलाह देते हैं। फिर, बै वाली चीजें खाने की वजह से अगर यूरिक एसिड बढ़ा हुआ मिलता है, कैल्शियम कम पाई जाती है तो कुछ दवाओं से इलाज करते हैं। मरीज दवाई और परहेज के साथ दो महीने में ठीक हो जाते हैं।
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