जागरण संवाददाता, लुधियाना : देश की अग्रणी टायर ट्यूब निर्माता ग्रुप रालसन इंडिया लिमिटेड कॉरपोरेट सोशल रिस्‍पॉन्‍स‍िबिलिटी (सीएसआर) के तहत शिक्षा और सेहत पर फोकस कर रहा है। ग्रुप ने कई सरकारी स्कूलों में उम्दा स्तर का इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया करा कर बच्चों को पढऩे का अच्छा माहौल दिया है। सेहत सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए भी रालसन के प्रयास जारी हैं। जिसके तहत शहर के सिविल अस्पताल में आधुनिक चिकित्सा मशीनरी समेत काफी सहयोग किया है।

रालसन समूह के मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव पाहवा का विजन है कि इलाके में कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे। इसी विजन को लेकर आगे कदम बढ़ाए जा रहे हैं। शिक्षा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए रालसन ने गांव बीजा के सरकारी प्राइमरी स्कूल में दो कमरे, बच्चों के टायलेट एवं किचन का ब्लॉक बनवाया है। इसके अलावा सरकारी प्राइमरी स्कूल ढंढारी कलां में किचन शेड एवं पीने के लिए शुद्ध पानी मुहैया कराने के मकसद से आरओ सिस्टम लगवाया गया है। सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल ढंढारी खुर्द में बच्चों के लिए बैंच, टॉयलेट और वाटर कूलर मुहैया कराया है।

गांव भटठा धुआ के सरकारी प्राइमरी स्कूल में दो कमरे और लाईब्रेरी बनवा दी गई है। गांव फतेहपुर अवाना के सरकारी प्राइमरी स्कूल में छह कमरे, किचन ब्लॉक, टॉयलेट और फर्नीचर मुहैया कराया गया है।गांव ललतों कलां के सरकारी प्राइमरी स्कूल में टायलेट बनवाया गया है। गांव थ्रीके के सरकारी प्राइमरी स्कूल में आठ कमरे, टायलेट और किचन बनवाए गए। अयाली खुर्द के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में छह कमरे बनवा कर दिए गए हैं। 

अध्‍यापक का वेतन अदा करती है कंपनी
गांव नया राजापुर के सरकारी प्राइमरी स्कूल में एक अध्‍यापक का वेतन कंपनी अदा कर रही है। सेहत के क्षेत्र में ग्रुप ने सिविल अस्पताल में लाईब्रेरी बनवा दी है। यहां पर मेडिकल की पोस्ट ग्रेजुएट शिक्षा हासिल कर रहे विद्यार्थियों के लिए पुस्तकें मुहैया कराई गई हैं। इसके अलावा फर्नीचर एवं अलमारी भी दी गई हैं। ताकि विद्यार्थी बेहतर माहौल में शिक्षा हासिल कर सकें।

कैंसर पहचान की मशीन भी लगी
विद्यार्थियों को थीसिस बनाने में मदद को एक कोलपोस्कोप मशीन और एक कार्डियोटोको मशीन भी मुहैया कराई गई है। गर्भावस्था के दौरान बच्चे की हार्ट बीट भी रिपोर्ट की जा सकती है। वहीं एक मशीन कैंसर को पहचानने में सहयोग करती है। सेहत के प्रति जागरूक करने के लिए समय समय पर गांवों में जाकर मेडिकल कैंप लगाए जा रहे हैं।

By Krishan Kumar