भूपेंदर सिंह भाटिया, लुधियाना : औद्योगिक शहर का सबसे पुराने विधानसभा क्षेत्र लुधियाना उत्तरी का गठन आजादी के बाद 1957 में हुआ था और कई चुनाव में संयुक्त पंजाब का हिस्सा रहा। शहर के बीच से गुजरने वाले बुड्ढा दरिया के किनारे बसा यह क्षेत्र हमेशा से ही अनदेखी का शिकार रहा। यही कारण है कि बुड्ढा दरिया की हालत दिन प्रतिदिन बिगड़ती रही और इस क्षेत्र से विधानसभा पहुंचने वाले प्रतिनिधियों ने कभी इसकी सार नहीं ली।

चुनाव से पहले एक बार फिर 650 करोड़ रुपये का बुड्ढा दरिया कायाकल्प प्रोजेक्ट शुरू तो हुआ, लेकिन इसके पूरा होने पर अभी भी सवालिया निशान लगे हैं। इस दरिया को साफ करने के लिए पूर्व केंद्रीय मंत्री जयराम, पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिदर सिंह, पूर्व डिप्टी सीएम सुखबीर बादल जैसे नेताओं ने नींव पत्थर रखे, लेकिन आज तक पूरे नहीं हो पाए। दरिया की गंदगी व बदबू जहां लोगों का जीना दूभर कर रही है, वहीं आसपास के क्षेत्र का पानी भी दूषित हो रहा है। इतना ही नहीं, इस क्षेत्र को आधारभूत सुविधाएं तक नहीं मिला पाई। नगर निगम में कांग्रेस की सत्ता और इस क्षेत्र से कांग्रेस का ही विधायक होने के बावजूद सुविधाओं को नागरिक तरस रहे हैं। कई इलाकों में निर्माण के लिए सड़कें खोदी गई, लेकिन अभी तक पूरी नहीं हुई। बारिश में सड़क तक धंस गई। विधायक राकेश पांडे कई बार निगम अफसरों की ऊपर तक शिकायत कर चुके हैं, लेकिन कोई हल नहीं निकला।

सातवीं बार मैदान में राकेश पांडे

इस क्षेत्र से राकेश पांडे छह बार विधायक रह चुके हैं और सातवीं बार फिर से मैदान में हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने कड़े मुकाबले में भाजपा के प्रवीण बांसल को मात्र 5100 मतों से हराया था, लेकिन इस बार यहां के समीकरण बदले-बदले से हैं। इस बार भाजपा और लिप का उम्मीदवार अभी घोषित नहीं हुआ है, लेकिन शिअद ने भाजपा से ही आए आरडी शर्मा और आप ने शिअद से आए मदनलाल बग्गा को मैदान में उतारा है। बग्गा पिछले चुनाव में शिअद से बागी होकर आजाद उम्मीदवार के रूप में उतरे थे। कुल मिलाकर इस क्षेत्र से इस बार रोमांचक मुकाबला होगा।

छोटी-छोटी बैठकें कर रहे हैं नेता

चुनाव आयोग ने 15 जनवरी तक नुक्कड़ सभाओं और रैलियों पर रोक लगाई है। ऐसे में उम्मीदवार पार्टी वर्करों के साथ चुनावी रणनीति बनाने में व्यस्त हैं। शीर्ष उम्मीदवार इलाके में अलग-अलग स्थानों पर छोटी-छोटी बैठकें कर कार्यकर्ताओं को उत्साहित कर रहे हैं। साथ ही वह डोर-टू-डोर लोगों से मिल रहे हैं. ताकि ज्यादा से ज्यादा लोगों के बीच जा सके। उधर, लोगों का कहना है कि चुनाव के समय सभी पार्टियों के नेता यहां आकर आश्वासन देते हैं, लेकिन चुनाव बीत जाने के बाद कोई सुध तक लेने नहीं आता।

Edited By: Jagran