लुधियाना [मुनीश शर्मा]। Russia Ukraine War: पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय बने यूक्रेन-रूस में लड़ाई का असर पंजाब के उद्योगों पर भी पड़ने लगा है। राज्य से पिछले 3 महीने में एक्सपोर्ट किए गए 1100 करोड़ के आर्डरों में 800 करोड रुपये का भुगतान फंस गया है। इसके चलते कारोबारियों काे आर्थिक नुकसान होने का डर सता रहा है। हाल ही में केंद्र सरकार की ईसीजीसी स्कीम को भी 25 फरवरी को वापस ले लिया गया था। इसके साथ ही पांच मुख्य बैंकों की तरफ से स्विफ्ट बैंक में लेनदेन बंद किए जाने से एक्सपोर्टरों की 800 करोड रुपये की रकम अटक जाएगी। इसमें पंजाब के इंजीनियरिंग गुड्स से लेकर हैंड टूल सहित कई अहम उत्पादों के एक्सपोर्ट्स यूनिट शामिल हैं।

हर साल 1500 करोड़ के करीब हाेता है एक्सपोर्ट

उद्योगपतियों ने केंद्र सरकार से इस विपदा की स्थिति में उनकी फंस गई रकम को निकलवाने या इसके आधार पर उन्हें राहत दिए जाने की मांग की है। बात पंजाब से यूक्रेन और रूस को एक्सपोर्ट की करें, तो हर साल 1500 करोड़ के करीब एक्सपोर्ट पंजाब से इन दोनों देशों को जाती है। जबकि इंपोर्ट की बात करें तो आयल से संबंधित कई उत्पाद 14000 करोड के करीब इंपोर्ट किए जाते हैं। इस युद्ध के चलते पंजाब के एक्सपोर्टरों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

इंडस्ट्री ने सरकार से मदद की लगाई गुहार

ऑल इंडस्ट्री एंड ट्रेड फोरम के अध्यक्ष बदीश जिंदल ने कहा कि सरकार की ओर से दी जाने वाली गारंटी योजना को भी बंद कर दिया गया है। ऐसे में एक्सपोर्टरों के लिए रकम रुक जाने से दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। मेक इन इंडिया को उत्साह देने के लिए कंपनियों की ओर से विभिन्न देशों में एक्सपोर्ट की जाती है। अब ऐसी गंभीर स्थिति में सरकार को आगे आकर इंडस्ट्री को मदद देनी चाहिए। लक्की एक्सपोर्टस के एमडी हरसिमरनजीत सिंह लक्की ने कहा कि इस समय भले ही हमें अपनी पेमेंट को लेकर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन हम इस गंभीर स्थिति में अपने खरीदारों के साथ हैं। इस दौर में केंद्र सरकार को चाहिए कि जिन कंपनियों की पेमेंट्स रुक गई हैं, उनको ब्याज में माफी देकर यहां उनकी पेमेंट्स आने तक लिमिट में बढ़ोतरी की जानी चाहिए।

पंजाब से इस साल हुआ एक्सपोर्ट

  • ऑटो पार्ट्स 50 करोड़
  • इलेक्ट्रिक इक्विपमेंट्स 500 करोड़
  •  हार्डवेयर 300 करोड़
  • फुटवियर 30 करोड़
  •  गारमेंट एंड टैक्सटाइल 500 करोड़
  •  हैंड टूल 50 करोड़
  •  रबर एंड प्लास्टिक पार्ट्स 300 करोड़
  • अन्य उत्पादों में 400 करोड

Edited By: Vinay Kumar

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