समय पर इलाज मिलता तो बच जाती जान! खन्ना सिविल अस्पताल में गायनी डॉक्टर न मिलने से गर्भवती और बच्चे की मौत
खन्ना सिविल अस्पताल में समय पर गायनी विशेषज्ञ न मिलने के कारण सात महीने की गर्भवती महिला और उसके बच्चे की मौत हो गई। परिवार में मातम पसरा है।

मृतक के शव को ले जाते हुए परिवार।
HighLights
खन्ना में गर्भवती महिला व बच्चे की दुखद मौत।
सिविल अस्पताल में गायनी डॉक्टर की अनुपलब्धता।
अस्पताल की आपातकालीन सेवाओं पर उठे सवाल।
संवाद सहयोगी, खन्ना। लुधियाना जिले के खन्ना में सात महीने की गर्भवती महिला की मौत हो गई। उसके पेट में पल रहे बच्चे को भी नहीं बचाया जा सका। इस घटना के बाद सिविल अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था और गर्भवती महिला को समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर की सुविधा मिलने को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
जानकारी के मुताबिक, जब महिला की हालत बिगड़ने पर उसे अस्पताल लाया गया, तो इमरजेंसी में उसे संभालने के लिए गायनी डॉक्टर उपलब्ध नहीं थीं। बताया जा रहा है कि जब तक गायनी डॉक्टर पहुंचीं, तब तक महिला को पटियाला के लिए रेफर किया जा चुका था। अगर, महिला को खन्ना में ही उचित इलाज मिल जाता तो शायद उसकी जान बच जाती।
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गर्भवति होने के चलते नहीं हुआ पोस्टमार्टम
पटियाला पहुंचते इलाज में देरी हो गई। वहीं, महिला और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए पोस्टमार्टम भी नहीं करवाया गया। जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश के जिला गाजीपुर के गांव रामपुर जीवन की रहने वाली करीब 22 वर्षीय बेवी अपने परिवार के साथ खन्ना में मिलिट्री ग्राउंड के पास झुग्गियों में रहती थी।
वह करीब सात महीने की गर्भवती थी। शनिवार रात को अचानक उसकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई। परिवार के सदस्य उसे उपचार के लिए सिविल अस्पताल खन्ना लेकर पहुंचे। परिवार को उम्मीद थी कि अस्पताल में महिला को समय पर उपचार मिल जाएगा, लेकिन उसकी गंभीर हालत को देखते हुए उसे पटियाला रेफर कर दिया गया। बताया जा रहा है कि पटियाला पहुंचते ही महिला की मौत हो गई। उसके गर्भ में पल रहे बच्चे को भी नहीं बचाया जा सका।
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गायनी डॉक्टर की उपलब्धता पर सवाल
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सात महीने की गर्भवती महिला की तबीयत बिगड़ने पर उसे सिविल अस्पताल खन्ना लाया गया, तो उस समय इमरजेंसी में गायनी विशेषज्ञ डॉक्टर क्यों उपलब्ध नहीं थीं? जानकारी के मुताबिक, जब तक गायनी डॉक्टर पहुंचीं, तब तक महिला को पटियाला रेफर किया जा चुका था।
ऐसे में यह जांच का विषय है कि महिला को अस्पताल में किस तरह का शुरुआती उपचार दिया गया और उसे किन परिस्थितियों में रेफर करने का फैसला लिया गया। खन्ना में उसका इलाज क्यों संभव नहीं था ? यह भी जांच का विषय बन गया है।
अंतिम संस्कार के लिए भी नहीं थे पैसे
बेवी का परिवार बेहद गरीब है। महिला की मौत के बाद परिवार के पास उसके अंतिम संस्कार तक के लिए पैसे नहीं थे। ऐसे मुश्किल समय में खन्ना की समाजसेवी संस्थाएं भाई कन्हैया सेवा सोसाइटी और नर सेवा नारायण सेवा मदद के लिए आगे आईं। समाजसेवियों ने रविवार सुबह खन्ना के श्मशानघाट में बेवी का अंतिम संस्कार करवाया।
एक ओर परिवार ने अपने सदस्य को खो दिया, वहीं दूसरी ओर गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत ने इस दुख को और बढ़ा दिया। अब इस घटना में अस्पताल की इमरजेंसी व्यवस्था, गायनी विशेषज्ञ की उपलब्धता और मौत के कारणों की जांच को लेकर स्वास्थ्य विभाग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर डॉ. चिराग ने कहा कि उनकी ड्यूटी में महिला को लाया गया था। ऑक्सीजन काफी कम थी।
फर्स्ट एड देने के बाद महिला को रेफर किया गया और एम्बुलेंस का भी प्रबंध किया गया। ऑन कॉल गायनी डॉक्टर को भी बुलाया गया था। उनके आने से पहले महिला को लेकर एम्बुलेंस निकल गई थी। हमने इलाज में कोई कोताही नहीं की।
