ये हैं भारत की 'ड्रोन दीदी', महिलाओं और किसानों के लिए बन गईं देवदूत; अब कृषि क्षेत्र में ऐसे मिलेगा नया रोजगार
Drone Didi in Ludhiana पंजाब के लुधियाना की पांच महिलाओं ने ड्रोन पायलट बनकर नारी सशक्तीकरण को नई राह दिखाई है। ग्रामीण परिवेश से संबंधित इन महिलाओं ने मानेसर स्थित प्रधानमंत्री महिला किसान ड्रोन केंद्र से ड्रोन के उपयोग में महारत हासिल की और अब ड्रोन पायलट बन गई हैं। इन्हें ड्रोन दीदी के नाम से जाना जाएगा। इन्हें खेतों में छिड़काव के ऑर्डर मिलने भी शुरू हो गए हैं।

आशा मेहता, लुधियाना। जिले की पांच महिलाओं ने ड्रोन पायलट बनकर नारी सशक्तीकरण को नया आयाम दिया है। ग्रामीण परिवेश से संबंधित इन महिलाओं ने मानेसर स्थित प्रधानमंत्री महिला किसान ड्रोन केंद्र से ड्रोन के उपयोग में महारत हासिल की और अब ड्रोन पायलट बन गई हैं। इन्हें ड्रोन दीदी के नाम से जाना जाएगा।
माछीवाड़ा के गांव रहीमाबाद की गुरिंदर कौर, लापरां की सुखजोत कौर व रूपिंदर कौर, मारेवाल की सिमरनजीत कौर व गांव बडूंदी की मनदीप कौर पन्नू अलग-अलग गांव के किसान परिवार से आती हैं।
खेतों में छिड़काव के ऑर्डर मिलने भी हुए शुरू
यह सभी किसान उत्पादक संगठन एफपीओ से भी जुड़ी हैं। इन्हें भारतीय किसान उर्वरक सहकारी (इफको) के माध्यम से केंद्र प्रायोजित योजना के तहत एग्री ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग दी गई है। शीघ्र ही इन्हें करीब बारह लाख रुपये की कीमत वाले ड्रोन के साथ इलेक्ट्रिकल व्हीकल भी दिए जाएंगे। इसके बाद यह महिलाएं ड्रोन के माध्यम से खेतों में नैनो यूरिया और नैनो डीएपी का छिड़काव करेंगी और किसानों की मददगार बनेंगी। इन्हें खेतों में छिड़काव के ऑर्डर मिलने भी शुरू हो गए हैं।
नया सीखने की ललक ने दिखाई राह: मनदीप कौर
मनदीप कौर बीए पास हैं। पति कंवरदीप सिंह पन्नू खेती करते हैं। पति-पत्नी पांच एकड़ में सब्जियां उगाते हैं। 40 वर्षीय मनदीप ने बताया, 'मैं बडूंदी एग्रो फार्मर प्रोड्यूस कंपनी लिमिटेड की चेयरपर्सन हूं। मुझे इफको के माध्यम से ड्रोन ट्रेनिंग के बारे में पता चला। कुछ नया सीखने की ललक थी, तो परिवार की सहमति मिलने के बाद पंद्रह दिन की ट्रेनिंग पर चली गई।'
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मनदीप ने कहा कि पारंपरिक खेती के तहत जब खेतों में छिड़काव किया जाता है तो अधिक श्रमिकों की आवश्यकता होती है। खासकर आलू, मक्की और गन्ने के फसल में बेहद कठिनाई होती है। यही काम ड्रोन से आसान हो जाता है। यह नया रोजगार भी है और खेती में नवाचार भी।
नई तकनीक से जुड़ने का अवसर: गुरिंदर कौर
गांव हरीमाबांद की 48 वर्षीय गुरिंदर कौर बीए पास हैं। पति परमिंदर सिंह खेती करते हैं। गुरिंदर कहती हैं कि उन्हें भी ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग की ऑफर आई थी। नई तकनीक से जुड़ने का अवसर देख उन्होंने तुरंत हामी भर दी। अब उन्हें ड्रोन का इंतजार है। उन्होंने भी कहा कि ड्रोन से खेतों में छिड़काव में समय, दवा और पानी की काफी बचत हो जाती है। ड्रोन तकनीक से एक बार में ही बड़े क्षेत्र में छिड़काव किया जा सकेगा। दूसरे किसानों के खेतों में छिड़काव करके आय भी अर्जित कर सकते हैं।
सात किसानों के आर्डर भी आ गए हैं: रुपिंदर कौर
गांव लापरा की रुपिंदर कौर ने बाटनी में पीएचडी की है। यह भी किसान परिवार से हैं और इनके पति भी खेती करते हैं। उन्होंने कहा कि ड्रोन पायलट की ट्रेनिंग करना रोमांचक रहा। खेती से जुड़ा होने के कारण अच्छा भी लगा। वह ड्रोन पायलट के रूप में कार्य करने के लिए उत्सुक हैं। उनके पास खेत में छिड़काव के लिए सात किसानों के आर्डर भी आ गए हैं। बस ड्रोन आने का इंतजार है।
ड्रोन तकनीक से नैनो यूरिया व नैनो डीएपी को कर रहे प्रमोट: मोहन स्वरूप
लुधियाना में इफको के क्षेत्र प्रबंधक मोहन स्वरूप ने कहा कि भारत सरकार के सहयोग से नैनो यूरिया और नैनो डीएपी लांच किया गया है। ड्रोन तकनीक के माध्यम से इसे प्रमोट भी किया जा रहा है। इफको इसके छिड़काव के लिए ड्रोन भी उपलब्ध करवा रहा है। 25 से अधिक देशों में इसका निर्यात किया जा रहा है।
इसमें ड्रोन की कीमत 12 से 13 लाख रुपये है, जबकि ड्रोन व दवाओं को ले जाने के लिए पांच लाख रुपये की कीमत का इलेक्ट्रिक वाहन भी दिया जा रहा है। यहां ड्रोन पायलट के लिए अभी प्रति एकड़ छिड़काव का मेहनताना 250 रुपये तय किया गया है। पांच से सात मिनट और लगभग दस लीटर पानी में एक एकड़ में छिड़काव हो जाएगा। श्रमिकों से से यही कार्य करवाने पर 125 से 150 लीटर पानी प्रति एकड़ लग जाता है। ड्रोन पायलटों के लिए पांच ड्रोन आ चुके हैं।
किसान एप के माध्यम से ड्रोन दीदी तक पहुंचा सकते हैं ऑर्डर
मोहन स्वरूप ने बताया कि इफको ने ड्रोन एप बनाया है। यह गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। किसान इस एप को डाउनलोड करके अपना नाम, पता, मोबाइल नंबर, फसल और रकबा सहित अन्य जानकारी इसमें दर्ज करेंगे। यह पूरा करने के बाद अपना ऑर्डर ड्रोन पायलट तक प्रेषित कर सकते हैं। इसके बाद ड्रोन दीदी किसान से संपर्क कर खेत में छिड़काव करेगी। काम पूरा होने के बाद इसकी जानकारी ड्रोन पायलट को एप में ही देना है। इफको इस पूरी प्रक्रिया की मॉनीटरिंग करेगा।
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