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लुधियाना की 16 वर्षीय छात्रा गुनीशा कौर का कमाल, ‘बजिंग ब्लूम्स’ बनाकर पर्यावरण संरक्षण में पेश की मिसाल

Published: Mon, 02 Nov 2026 07:00 AM (IST)

लुधियाना की 16 वर्षीय गुनीशा कौर ने 'बजिंग ब्लूम्स' पहल के तहत परागण उद्यान विकसित किए हैं, जो विशेष बच्चों ...और पढ़ें

बजिंग ब्लूम्स के साथ 16 वर्षीय गुनीशा कौर।

बजिंग ब्लूम्स के साथ 16 वर्षीय गुनीशा कौर।

HighLights

  1. गुनीशा कौर ने 'बजिंग ब्लूम्स' से परागण उद्यान विकसित किए।

  2. विशेष बच्चों के लिए प्रकृति से जुड़ाव का मार्ग प्रशस्त किया।

  3. पर्यावरण संरक्षण में योगदान के लिए कई पुरस्कार जीते।

राधिका कपूर, लुधियाना। प्रकृति से जुड़ाव केवल हरियाली बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संवेदनशीलता का रास्ता भी बन सकता है। लुधियाना के दुगरी में सतपाल मित्तल स्कूल की 16 वर्षीय छात्रा गुनीशा कौर ने अपनी पहल ‘बजिंग ब्लूम्स’ के जरिये इसी सोच को जमीन पर उतारने का प्रयास किया है। उन्होंने ऐसे परागण उद्यान विकसित किए हैं, जहां मधुमक्खियों, तितलियों और दूसरे परागण करने वाले जीवों को अनुकूल वातावरण मिलता है।

इन उद्यानों को विशेष जरूरतों वाले बच्चों के अनुकूल बनाने का प्रयास किया गया है। गुनीशा के मन में इस पहल का विचार अपने छोटे भाई को देखकर आया। आटिज्म से पीड़ित उनका भाई घर में बनाए गए उद्यान के पास बैठकर पढ़ता, पौधों की पत्तियों को छूता और फूलों की खुशबू महसूस करता था।

प्रकृति के बीच उसका सहज व्यवहार गुनीशा के लिए एक अनुभव से बढ़कर सीख बना। उन्हें महसूस हुआ कि प्राकृतिक वातावरण बच्चों को सुकून देने में मददगार हो सकता है।

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अपने सहयोगी विद्यार्थियों के साथ गुनीशा।

2023 में हुई बजिंग ब्लूम्स की शुरुआत

इसी सोच के साथ उन्होंने मार्च 2023 में घर से ‘बजिंग ब्लूम्स’ की शुरुआत की। धीरे-धीरे इस पहल का विस्तार स्कूलों, वेलफेयर सेंटरों और सामुदायिक पार्कों तक हुआ। अब तक लुधियाना में 20 से अधिक परागण उद्यान विकसित किए जा चुके हैं। इन प्रयासों के दौरान दर्ज परागण करने वाली प्रजातियों की विविधता 18 से बढ़कर 46 हो गई। उद्यानों में स्थानीय प्रजातियों के पौधों को अलग-अलग परतों में लगाया जाता है।

जहरीले रसायनों के इस्तेमाल से परहेज किया जाता है, ताकि परागण करने वाले जीवों को सुरक्षित वातावरण मिल सके। बच्चों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए व्यवस्थित रास्ते, छूने के लिए सुरक्षित कांटारहित पौधे और मधुमक्खियों व तितलियों को करीब से देखने के लिए निर्धारित स्थान बनाए जाते हैं।

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500 विद्यार्थी बने बजिंद ब्लूम्स एंबेसडर

उनकी पहल से चार हजार से अधिक विद्यार्थियों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का दावा है। वह लुधियाना के स्कूलों में करीब 25 कार्यशालाएं कर चुकी हैं। अब तक करीब 500 विद्यार्थी ‘बजिंग ब्लूम्स एंबेसडर’ बन चुके हैं।

गुनीशा ने ‘एयरोब्लूम’ नामक एआइ-निर्देशित ड्रोन प्रणाली भी विकसित की है, जिसका उद्देश्य छोटे शहरी क्षेत्रों में कृत्रिम परागण में मदद करना है। इस नवाचार के लिए उन्हें इंडियन साइंस एंड इंजीनियरिंग फेयर में कांस्य पदक भी मिला। उनके शोधपत्र कैम्ब्रिज सेंटर फार इंटरनेशनल रिसर्च के विंटर सिम्पोजियम में भी प्रस्तुत किए गए। वर्ष 2026 के इंटरनेशनल यंग इको-हीरो अवार्ड्स में उन्हें तीसरा स्थान मिला।

 

पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर गुनीशा

प्रिंसिपल सतपाल मित्तल स्कूल भूपिंदर गोगिया ने बताया कि गुनीशा शुरू से ही पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीर और कुछ नया करने के लिए उत्साहित रही हैं। स्कूल की ओर से भी उन्हें अपनी पहल को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया गया। गुनीशा ने यह दिखाया है कि युवा भी अपनी पहल से पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनशीलता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं।

गुनीशा को बचपन से रिसर्च का शौक

मां हरप्रीत कौर ने बताया कि उनकी बेटी गुनीशा को बचपन से ही पढ़ाई और रिसर्च का शौक रहा है। वह जिस भी चीज को हाथ में लेती है, जब तक पूरा नहीं होता, तब तक उसके लिए डटी रहती है। यहां तक रिसर्च कर चेक भी करती है कि उसने सब ठीक किया है या नहीं।

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