लुधियाना में इंटरलाकिंग टाइलें व कंक्रीट नहीं हटाने पर अदालत का कड़ा रुख, ठेकेदारों की पेमेंट रोकने के आदेश
लुधियाना में सड़कों के किनारे पेड़ों के आसपास इंटरलाकिंग टाइलें व कंक्रीट नहीं हटाने पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने निगम व नगर सुधार ट्रस्ट को आदेश दिया है कि इस काम को करने वाले ठेकेदारों की अदायगी रोक दी जाए।

जागरण संवाददाता, लुधियाना : शहर में सड़कों के किनारे पेड़ों के आसपास एक मीटर के दायरे में लगाई गई इंटरलाकिंग टाइलें और कंक्रीट नहीं हटाने पर सिविल जज सीनियर डिवीजन हरसिमरनजीत सिंह की अदालत ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने नगर निगम और नगर सुधार ट्रस्ट को आदेश दिया है कि तुरंत प्रभाव से इस काम को करने वाले ठेकेदारों की अदायगी रोक दी जाए।
यही नहीं जिला वन विभाग अधिकारी को तीन दिसंबर तक पूरे शहर में पेड़ों के आसपास लगाई गई इंटरलाकिंग टाइलों के संबंध में रिपोर्ट अदालत में पेश करने के भी आदेश जारी किए हैं। अदालत के इस सख्त रुख के बाद नगर निगम और ट्रस्ट के अधिकारियों में हड़कंप मचा हुआ है। इस मामले पर अगली सुनवाई तीन दिसंबर को होगी।
इंजीनियर कपिल अरोड़ा ने बताया कि शहर में चल रहे विकास कार्यों के दौरान ठेकेदारों ने पेड़ों के आसपास एक मीटर के दायरे में भी कंक्रीट और इंटरलाकिंग टाइलें लगा दी। उन्होंने इसकी शिकायत नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) से की थी। मार्च 2021 में एनजीटी ने निगम और नगर सुधार ट्रस्ट को आदेश जारी किए थे कि पेड़ों के आसपास एक मीटर जगह को खाली करवाया जाए।
दोनों विभागों के अधिकारियों ने इस मामले में खानापूर्ति करने के अलावा कुछ नहीं किया। इस कारण उन्हें दोबारा एनजीटी में शिकायत करनी पड़ी। 18 अक्टूबर, 2021 को एनजीटी ने यह मामला जिला अदालत को भेजते हुए आदेशों की पालना करवाने के लिए कहा था। इसके बाद अदालत इस मामले पर लगातार सुनवाई कर रही है।
बीती 7 नवंबर को अदालत में सुनवाई के दौरान निगम के चारों जोन के एक्सईएन और नगर सुधार ट्रस्ट के अधिकारी मौजूद थे। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया कि पेड़ों के आसपास से टाइलों को हटा दिया गया है। इस बीच उन्होंने अदालत के सामने माडल ग्राम सहित कुछ अन्य इलाकों की फोटो पेश की, जिसमें पेड़ों के आसपास आज भी इंटरलाकिंग टाइलें लगी हुई हैं।
अदालत ने फोटो को देखने के बाद निगम और ट्रस्ट अधिकारियों को आदेश जारी किए कि वह संबंधित ठेकेदारों की अदायगी को रोक दें। इस संबंध में एक शपथपत्र भी दाखिल करें कि जहां पर लापरवाही दिखाई गई है उन इलाकों में काम करने वाले ठेकेदारों को अदायगी नहीं की गई है।
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