बिंदु उप्पल, जगराओं [लुधियाना]। गरीबी की मार से परेशान होकर लोग या तो भगवान को कोसने लगते हैं या पेट भरने के लिए गलत काम करने लग जाते हैं, लेकिन कुछ ऐसे भी होते हैं, जो अपने हुनर को हथियार बनाकर इस अभिशाप को खत्म कर देते हैं। ऐसे ही जीवट वाली एक महिला का नाम है चरणजीत कौर। समराला के गांव भगवानपुरा की रहने वाली चरणजीत ने अपने शुरुआती जीवन में बहुत गरीबी देखी।

पांच बहनों व एक भाई के परिवार में पिता जूते बनाकर घर का खर्च जैसे तैसे चलाते थे। पिता का सहारा बनने के लिए सिलाई केंद्र में काम सीखा। इससे थोड़ी कमाई तो शुरू हुई, लेकिन घर के हालात नहीं बदले। इसी बीच, उनकी शादी हो गई। पति के साथ मिलकर छोटे-मोटे काम करती रहीं। इसके बाद तीन बच्चों की जिम्मेदारी भी आ गई। चरणजीत कौर कहती हैं, 'मैंने घर में पड़े बेकार कपड़ों से बैग बनाने शुरू किए। फिर गांव व शहर की दुकानों पर जाकर बैग दिखाती। दुकानदार डिमांड करने लगे तो मैंने यही काम शुरू कर दिया।

गुरु अर्जुन देव सेल्फ हेल्प ग्रुप के सदस्य काम करते हुए। जागरण

चरणजीत कौर ने बताया कि एक दिन डीसी दफ्तर में काम करने वाली सुखदेव कौर ने मेरे बैग देखे तो उन्होंने सेल्फ हेल्प ग्रुप बनाकर काम बड़े स्तर पर शुरू करने की सलाह दी।'' इसके बाद उन्होंने गुरु अर्जुन देव सेल्फ हेल्प ग्रुप का गठन किया और कई महिलाओं को अपने साथ जोड़ा। उनके ग्रुप में जसविंदर कौर, जसबीर कौर, गुरप्रीत कौर, परमजीत कौर, हरविंदर कौर, दविंदर कौर, बलवीर कौर व हरजीत कौर समेत कई और महिलाएं शामिल हैं।

ग्रुप की ओर से बनाए बैग। जागरण

36 डिजाइन वाले 36 साइज के बैग

चरणजीत कौर अपने सेल्फ हेल्प ग्रुप में 36 डिजाइन वाले 36 बैग तैयार कर रही हैं। इसकी कीमत 50 रुपये से 1200 रुपये तक है। चरणजीत कौर ने बताया कि उनके पास कुछ आठ सिलाई मशीनें हैं। वे जींस, काटन, मैटी, जूट, लेदर व नार्मल कपड़े के बैग तैयार करती हैं, जिन्हें लुधियाना व चंडीगढ़ में लगने वाली प्रदर्शनियों, किसान मेलों में प्रदर्शनी लगाकर बेचती हैं।

ये भी बनाती हैं

  • भिंडी तोड़ने के समय पहने जाने वाले कॉटन के दस्ताने भी तैयार करती हैं। इनकी काफी मांग है। इनकी कीमत 12 से 30 रुपये जोड़ी है।
  • जूट के बैग, वाल हैंगिंग, फुट मैट व दरियां आदि।
  • शहद पैकेजिंग बैग, शहद इकट्ठा करते समय बचाव के लिए हेड कवर, स्पेशल कालर बनाती है। इनकी कीमत 42 से 52 रुपये तक है। मधुमक्खी पालक बड़े पैमाने पर उनसे यह खरीदते हैं।

सरकारी दफ्तरों में जाता है खाना

उनके ग्रुप की हरजीत कौर बताती हैं कि वे सरकारी विभागों में होने वाले समारोहों व पाॢटयों के लिए खाना भी तैयार करती हैं। एक समय मे 1000 लोगों के लिए खाने का आर्डर तैयार होता है। इसमें दही, एक सब्जी, दाल, एक मीठी चीज व चपाती व चावल शामिल हैं। ग्रुप की महिलाएं किसान मेलों मक्की की रोटी, सरसों का साग, लाल मिर्च के अचार के स्टाल लगाती हैं। ग्रुप की इन गतिविधियों से होने वाली आय को बराबर बांट लिया जाता है।

परिवार दे रहा पूरा सहयोग

चरणजीत कौर का कहना है कि अब उनकी जिंदगी काफी बदल गई है। गरीबी के दौर से मिले अनुभवों ने उन्हें काफी कुछ सिखाया है। उनके पति, बेटियों मनजीत कौर, हरजीत कौर व रणजीत कौर का पूरा सहयोग मिलता है। इस बात का सुकून है कि अपने साथ-साथ कई अन्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने में कामयाब हुई हैं।

Edited By: Kamlesh Bhatt