साहिल गर्ग, बठिंडा। युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने के लिए पंजाब के बठिंडा जिले में सराहनीय पहल की गई है। यह पंजाब का पहला जिला होगा, जहां हर गांव में लाइब्रेरी होगी। पहले चरण में 100 गांवों में लाइब्रेरी स्थापित करने का लक्ष्य है। 10 गांव में लाइब्रेरी स्थापित भी कर दी गई हैं। पहला चरण पूरा होने के बाद जिले के हर गांव में लाइब्रेरी स्थापित की जाएगी। एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (एडीसी) परमवीर सिंह इस अभिनव योजना पर काम कर रहे हैं। वह यह काम समाजसेवियों और अनिवासी भारतीयों (एनआरआइ) के सहयोग से किया जा रहा है। लाइब्रेरी में युवाओं को अपनी पढ़ाई से संबंधित हर विषय की किताबें उपलब्ध करवाई जाएंगी।

परमवीर सिंह कहते हैं, हमारा मकसद है कि युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार किया जा सके। इन लाइब्रेरी में हर प्रकार की किताबें रखी जाएंगी, जिसमें प्रतियोगी परीक्षा, फिक्शन, इतिहास, गणित व विज्ञान की किताबें मुख्य रूप से होंगी। उन्होंने बताया कि लाइब्रेरियों के खुलने से बठिंडा के होनहार व मेहनती विद्यार्थियों के लिए भारतीय प्रशासनिक सेवा (आइएएस), प्रांतीय सिविल सेवा (पीसीएस) व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने में मदद मिलेगी। यहां पर विद्यार्थी बिना फीस दिए पढ़ाई कर सकते हैं।

बठिंडा में बनाई गई 'द यूथ लाइब्रेरी में रखीं किताबें। जागरण

देखभाल के लिए स्टाफ, इंटरनेट की सुविधा

इन लाइब्रेरी की देखभाल के लिए स्टाफ भी तैनात किया गया है। इसके अलावा इनमें युवाओं को इंटरनेट की सुविधा मिलेगी। यह सारी लाइब्रेरी गांवों में पंचायतों की खाली पड़ी जमीन पर बनाई जा रही हैं। इनका निर्माण बठिंडा के जिला रोजगार दफ्तर में बनाई गई 'द यूथ लाइब्रेरी' की तर्ज पर किया जाएगा।

गांव महमा सरजा में बनाई गई लाइब्रेरी में किताबें पढ़ते गांव निवासी। जागरण

एक लाइब्रेरी पर 15 लाख का खर्च

गांवों में बनाई जाने वाली लाइब्रेरी में एक समय में 20 लोगों के बैठने का प्रबंध किया जा रहा है। एक लाइब्रेरी की इमारत पर 15 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। जिले में 314 गांव हैं। इस लिहाज से इस योजना पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह सारी राशि एनआरआइ व समाजसेवियों से जुटाई जाएगी। लाइब्रेरी का दैनिक प्रयोग निश्शुल्क होगा, लेकिन इनमें मेंबरशिप फीस रखी जाएगी, जिससे होने वाली कमाई स्टाफ पर खर्च होगी।

तीन भाषाओं में किताबें

फिलहाल, जिले के गांव फूसमंडी, रामूवाला, सेमा, तुंगवाली, ढिपाली खुर्द, घंडाबन्ना, ज्ञाना, बाजोआना, राजगढ़ कुब्बे व महमा भगवाना में लाइब्रेरी तैयारी हो चुकी हैं। यहां गांव के युवाओं के अलावा अन्य लोग भी किताबें पढ़ने आ रहे हैं। कुछ गांवों में पहले से बनी हुई लाइबेरी का नवनिर्माण किया गया है। अब जिला परिषद की इमारत में भी एक लाइब्रेरी बनाई जा रही है, जहां एक साथ 300 लोगों के बैठने का प्रबंध होगा। लाइब्रेरी में अंग्रेजी, हिंदी व पंजाबी तीनों भाषाओं की किताबें होंगी। युवा आनलाइन पढ़ाई भी कर पाएंगे। यहां धार्मिक किताबें, अखबार, मैगजीन व बच्चों के मनोरंजन की किताबें भी होंगी।

'द यूथ लाइब्रेरी' का दौरा करने पहुंचे डीसी बी. श्रीनिवासन व एडीसी डी परमवीर सिंह। -जागरण

बाजार से किताबें लेने की जरूरत नहीं

बठिंडा की यूथ लाइब्रेरी में पढ़ने आए तरनप्रीत सिंह ने बताया कि वह पिछले लगभग एक महीने से यहां पर आ रहे हैं। वह अपने साथ दोपहर का खाना भी लेकर आते हैं। लाइब्रेरी में इतनी ज्यादा किताबें हैं कि बाजार से खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। हमारा काम काफी आसान हो गया है। सिमरनजीत कौर ने बताया कि लाइब्रेरी में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए काफी ज्यादा किताबें हैं। इनसे काफी मदद मिल रही है। वह यहां सुबह 10 बजे से शाम चार बजे तक रहती हैं।

Edited By: Pankaj Dwivedi