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सड़क हादसे में घायल की मदद की तो मिलेंगे 5 हजार रुपये, कानूनी सुरक्षा भी मिलेगी; पंजाब में लागू हुई योजना

Published: Thu, 17 Sep 2026 06:36 PM (IST)

पंजाब में सड़क हादसों में घायलों की मदद करने वालों के लिए गुड स्मार्टियन योजना लागू हुई। पात्र मददगार को पांच हजार रुपये और प्रशंसा पत्र मिलेगा।

ये AI जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर है।

ये AI जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर है।

HighLights

  1. घायल की मदद पर 5,000 रुपये का नकद इनाम।

  2. मददगारों को पुलिस पूछताछ से कानूनी सुरक्षा मिलेगी।

  3. "गोल्डन आवर" में जान बचाने के लिए प्रोत्साहन।

जागरण संवाददाता,कपूरथला। सड़क हादसों में घायल लोगों की तुरंत मदद करने और कीमती जानें बचाने के उद्देश्य से भारत सरकार के सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा गुड स्मार्टियन योजना शुरू की गई है। यह योजना अब पंजाब सरकार ने भी शुरू कर दी है। योजना के तहत घायल की मदद करने वाले को पांच हजार रुपये का नकद इनाम दिया जाएगा।

हालांकि पंजाब सरकार ने दो साल पहले फरिश्ते योजना शुरू की थी। जिसके तहत दो हजार रुपये की राशि मददगार को देने की योजना थी। आरटीओ हरकरम सिंह रंधावा ने बताया कि इस योजना का मुख्य उद्देश्य लोगों को हादसे के बाद के पहले 60 मिनट यानी "गोल्डन आवर" के दौरान घायलों को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाने के लिए प्रेरित करना है, ताकि समय पर इलाज मिल सके और जान बचने की संभावना बढ़ सके।

उन्होंने बताया कि सड़क हादसे के पीड़ित की जान बचाने में मदद करने वाले किसी भी आम नागरिक को, जो घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाता है, एम्बुलेंस या पुलिस को सूचना देता है, या प्राथमिक सहायता प्रदान करता है, उसे 5,000 रुपये का नकद इनाम और प्रशंसा पत्र दिया जाता है।

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एक साल में 5 बार मिल सकता है इनाम

एक व्यक्ति को एक साल में अधिकतम पांच बार तक यह इनाम मिल सकता है। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर हर साल चुने गए 10 सर्वश्रेष्ठ गुड स्मार्टियन को 1-1 लाख रुपये का विशेष पुरस्कार भी दिया जाता है। आरटीओ ने बताया कि पंजाब सरकार द्वारा भी इस योजना को लागू किया गया है, जिसके तहत पात्र व्यक्ति को जरूरी सत्यापन के बाद डिप्टी कमिश्नर कार्यालय के माध्यम से 5,000 रुपये की राशि प्रदान की जाती है।

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मददगारों को पूरी कानूनी सुरक्षा

इस योजना के तहत मदद करने वाले लोगों को पूरी कानूनी सुरक्षा भी दी जाती है। उन्हें अनावश्यक पुलिस पूछताछ के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और यदि वे चाहें तो अपनी पहचान गुप्त रख सकते हैं।

इसके अलावा, मददगार को अस्पताल में रुकने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और मदद करने के कारण उस पर सामान्य तौर पर कोई सिविल या आपराधिक जिम्मेदारी भी नहीं बनती। किसी भी तरह की सहायता के लिए जिला प्रशासन के हेल्पलाइन नंबर 01822-233777 पर संपर्क किया जा सकता है।

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