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पनीर खाते हैं तो हो जाएं सावधान! कपूरथला में 64 प्रतिशत से ज्यादा सैंपल फेल; एक नमूना असुरक्षित मिला

By Rajinder PahraEdited By: Anuj Sharma
Published: Fri, 11 Sep 2026 06:28 PM (IST)

कपूरथला में छह महीने में लिए गए पनीर के 14 नमूनों में नौ फेल मिले। आठ मानक से कम और ...और पढ़ें

ये प्रतिकात्मक तस्वीर है।

ये प्रतिकात्मक तस्वीर है।

HighLights

  1. कपूरथला में 14 में से 9 पनीर नमूने फेल हुए।

  2. आठ नमूने मानक से कम, एक असुरक्षित श्रेणी का मिला।

  3. फेल नमूनों पर अभी तक कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हुई।

रजिंदर पाहड़ा, कपूरथला। अगर आप बाजार से पनीर खरीदकर खाते हैं तो यह खबर आपके लिए महत्वपूर्ण है। कपूरथला जिले में खाद्य सुरक्षा विभाग की छह महीने की जांच रिपोर्ट में पनीर के ज्यादातर नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। एक मार्च से 31 अगस्त तक चलाए गए अभियान के दौरान लिए गए 14 नमूनों में से नौ जांच में फेल पाए गए। इनमें आठ नमूने मानक से कम और एक नमूना असुरक्षित श्रेणी का मिला।

विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, छह महीने के दौरान जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से पनीर के 14 नमूने लिए गए थे। प्रयोगशाला में जांच के बाद इनमें से नौ नमूनों में गुणवत्ता संबंधी कमियां सामने आईं। इस तरह करीब 64 प्रतिशत नमूने जांच में फेल हुए।

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आठ नमूने मानक से कम, एक असुरक्षित

फेल हुए नमूनों में आठ को मानक से कम श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि इनमें दूध की वसा और प्रोटीन निर्धारित मानक के अनुसार नहीं मिले। इससे पनीर की गुणवत्ता पर सवाल खड़े होते हैं और सस्ती सामग्री की मिलावट की आशंका रहती है।

वहीं, एक नमूना असुरक्षित श्रेणी में पाया गया। खाद्य सुरक्षा के लिहाज से यह सबसे गंभीर श्रेणी मानी जाती है। ऐसे खाद्य पदार्थ का सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

रिपोर्ट आई, लेकिन कार्रवाई अभी बाकी

रिपोर्ट में सबसे अहम बात कार्रवाई को लेकर सामने आई है। नमूने फेल होने के बावजूद अभी तक संबंधित मामलों में कानूनी कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। विभाग की रिपोर्ट के कार्रवाई वाले कालम में स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि मामले अभी दर्ज किए जाने बाकी हैं।

विभाग में कर्मचारियों की कमी भी जांच और कार्रवाई में देरी की एक वजह मानी जा रही है। जानकारी के मुताबिक पूरे जिले की खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी महज एक सहायक आयुक्त और दो खाद्य सुरक्षा अधिकारियों पर है।

त्योहारी सीजन से पहले सामने आई यह रिपोर्ट प्रशासन के लिए भी चिंता का विषय है। लोगों की मांग है कि फेल नमूनों के मामलों में जल्द कार्रवाई की जाए और बाजार में बिकने वाले पनीर की जांच तेज की जाए।

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असली दिखाने के लिए मिलाते हैं डिटर्जेंट

डिटर्जेंट पनीर में वनस्पति तेल, पाम आयल, सोया, मिल्क पाउडर, स्टार्च और अन्य पदार्थों के साथ डिटर्जेंट व अन्य रसायनों के इस्तेमाल किए जाते हैं। जिनका उद्देश्य पनीर को सफेद, मुलायम और असली जैसा दिखाना होता है।

स्वास्थ्य पर बुरा असर

  • डिटर्जेंट और अनधिकृत रसायनों से बने पनीर से पेट में जलन, उल्टी और दस्त
  • बार-बार सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा

ऐसे करें पहचान (How To Identify Fake Paneer)

  • पनीर में साबुन या रसायन जैसी गंध
  • असामान्य स्वाद या बहुत ज्यादा चिकनापन
  • बहुत ज्यादा सफेद, असामान्य रूप से मुलायम या रबर जैसा
  • पैकेट वाला पनीर खरीदते समय लेबल, सामग्री और निर्माता की जानकारी जरूर देखें

आयोडीन की जांच

आयोडीन से घर पर पनीर में स्टार्च की मिलावट की जांच की जा सकती है। पनीर को पानी में उबालकर ठंडा करने के बाद आयोडीन डालने पर नीला रंग आने पर स्टार्च होने की आशंका होती है। हालांकि यह जांच डिटर्जेंट की नहीं है। पर, इससे डिटर्जेंट की भी शंका का समाधान किया जा सकता है। डिटर्जेंट की पक्की पुष्टि प्रयोगशाला जांच से ही हो सकती है।

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