विजय सिंगला का नाम तय, फिर आखिरी वक्त में क्यों बदला गेम? परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस का कप्तान बनाने के 7 बड़े कारण
जालंधर कैंट से लगातार तीसरी बार विधायक परगट सिंह को पंजाब कांग्रेस का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनकी रणनीतिक ...और पढ़ें

प्रगट सिंह और विजय सिंगला (जागरण ग्राफिक्स)
HighLights
परगट सिंह पंजाब कांग्रेस के नए अध्यक्ष नियुक्त हुए
उनकी रणनीतिक सोच और स्पष्टवादी छवि ने दिलाई कमान
जालंधर और दोआबा में कांग्रेस को मिलेगा बड़ा फायदा
जगजीत सिंह सुशांत, जालंधर। जालंधर कैंट से लगातार तीसरी बार विधायक बने परगट सिंह आखिरकार पंजाब कांग्रेस के प्रधान पद तक पहुंच गए। हॉकी के मैदान पर उनकी सटीक प्लानिंग, लक्ष्य भेदने की क्षमता और टाइमिंग ही उन्हें इस पद तक ले आई है।
24 घंटे पहले तक विजय इंदर सिंगला पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष लगभग तय माने जा रहे थे, लेकिन परगट सिंह ने आखिरी बाजी में बड़ा खेल कर दिया। हॉकी के डिफेंडर से राजनीति के धुरंधर बनने से उनका कद तो बढ़ना तय ही है, इसका जालंधर से लेकर दोआबा और पूरे राज्य में भी कांग्रेस को बड़ा फायदा मिल सकता है।
कांग्रेस के प्रदेश प्रधान पद तक पहुंचने की रणनीति उन्होंने आखिरी समय तक सामने नहीं आने दी। उनकी रणनीति को समझना किसी के लिए आसान नहीं है। पंजाब कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के पीछे भी परगट सिंह की रणनीति ही बताई जाती रही है, लेकिन सिद्धू जब परगट सिंह की रणनीति से बाहर हुए तो सत्ता से भी दरकिनार हो गए।
हवा का रुख भांपने में माहिर
वह हवा के रुख को बखूबी भांप लेते हैं। जब साल 2017 के चुनाव से पहले अकाली दल-भाजपा गठबंधन की नाव डोलती देखी तो वह जालंधर के वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट को बड़ा मुद्दा बनाकर कैंट की राजनीति में हावी हो गए और अकाली-भाजपा गठबंधन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। इसके बाद कांग्रेस में शामिल हो गए।
उनकी यह रणनीति काम आई और वह 2017 में बड़ी जीत के साथ सामने आए। साल 2022 में जब पूरे पंजाब में आम आदमी पार्टी की आंधी चल रही थी, तब भी वह अपना गढ़ बचाने में सफल रहे और इसके पीछे उनकी कुशल रणनीति ही थी।
उनकी दूरगामी सोच का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह ओलिंपियन हॉकी कप्तान से पंजाब पुलिस के एसपी, डायरेक्टर स्पोर्ट्स तक पहुंचे।
वह यहां भी नहीं रुके और पहले अकाली विधायक, फिर दो बार कांग्रेस की टिकट पर विधायक बने और चन्नी सरकार में कैबिनेट मंत्री तक पहुंच गए। वह 26 सितंबर 2021 से 11 मार्च 2022 तक मंत्री रहे। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव बने और अब पंजाब कांग्रेस प्रधान पद तक पहुंच गए।
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पहले बादल, फिर कैप्टन के खिलाफ मोर्चा खोल कर चर्चा में रहे
परगट सिंह को गंभीर राजनीतिज्ञ माना जाता है। वह चर्चा में रहने के लिए बड़े मुद्दों को उठाते रहे हैं और इसके लिए वह दो मुख्यमंत्रियों से भी टकरा चुके हैं। पहले उन्होंने अपनी ही अकाली सरकार पर सवाल खड़े किए थे और प्रकाश सिंह बादल के खिलाफ मोर्चा खोला था।
वह कांग्रेस सरकार के समय मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह के खिलाफ भी कई मुद्दों पर खुल कर बोलते रहे। वह कांग्रेस में आने के बाद भी पूरी तरह सरकार समर्थक विधायक की छवि में नहीं रहे।
उन्होंने मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार के कामकाज पर कई बार सवाल उठाए। उन्होंने नशा, बेअदबी और कोटकपूरा गोलीकांड, माइनिंग, किसानों के मुद्दे, बिजली खरीद समझौते व नगर निगम में भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाया।
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जालंधर में मजबूत पकड़, सभी सीटों पर मिल सकता है फायदा
परगट सिंह के पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष बनने से जालंधर की सभी नौ विधानसभा सीटों पर सकारात्मक असर पड़ सकता है। उनके सभी विधायकों और हलका इंचार्जों से उनके बेहतर संबंध हैं। शाहकोट से कांग्रेस के विधायक एवं जिला देहाती प्रधान हरदेव सिंह लाडी शेरोवालिया परगट सिंह के करीबी रिश्तेदार हैं।
वहीं आदमपुर से विधायक सुखविंदर सिंह कोटली को कांग्रेस में लाने का श्रेय भी परगट सिंह को ही जाता है। जालंधर से सांसद चरणजीत सिंह चन्नी से उनकी निकटता जगजाहिर है और बाकी अन्य विधायकों और हलका इंचार्जों से भी उनके संबंध बेहतर हैं। उनके प्रधान बनने से इन सभी नौ सीटों पर कांग्रेस को फायदा मिलना तय माना जा रहा है। दोआबा में परगट सिंह का अपना एक अलग जनाधार है।
पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी जालंधर से दूसरे नेता को मिली है। इससे पहले मोहिंदर सिंह केपी साल 2008 से साल 2010 तक कांग्रेस के प्रधान रहे थे। हालांकि वह कार्यकारी प्रधान थे।
परगट सिंह को पूरी जिम्मेदारी मिली है। इसका असर सिर्फ जालंधर ही नहीं, बल्कि पूरे दोआबा में भी काफी पड़ेगा और 2027 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इसका बड़ा लाभ मिल सकता है।
परगट सिंह को बनाने को अध्यक्ष बनाने की वजह?
- उनकी छवि स्पष्टवादी और ईमानदार नेता की रही है।
- परगट सिंह एक खिलाड़ी के तौर पर भी पूरे देश में जाने जाते हैं।
- परगट सिंह एक खिलाड़ी से बड़े पुलिस अधिकारी और फिर डायरेक्टर स्पोर्ट्स बने और फिर राजनीति में आकर विधायक।
- विधायक के पद पर लगातार तीन बार जीत हासिल रही है।
- पंजाब सरकार में मंत्री बने। यह उनकी कुशल योजना का ही नतीजा है।
- मुद्दों को लेकर खुलकर बोलते हैं। कई मामलों को लेकर वह दो मुख्यमंत्रियों से भी टकरा चुके हैं।
- दोआबा और जालंधर क्षेत्र में अच्छी पकड़ है।
खिलाड़ी के रूप में भी अच्छा प्रदर्शन
परगट सिंह हॉकी खिलाड़ी के रूप में फुल-बैक, यानी डिफेंडर की पोजीशन पर खेलते थे। उनका प्रमुख काम विपक्षी फारवर्ड को गोल करने से रोकना, अपने सर्किल-डी की रक्षा करना, खतरनाक हमले को रोकना और विपक्षी खिलाड़ी से गेंद छीनकर क्लियरेंस करना था, लेकिन वह इससे आगे की सोच के साथ खेलते थे।
उनकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि वे डिफेंस से अचानक अटैक में चले जाते थे। इसी कारण से उन्हें दुनिया के बेहतरीन फुल-बैक में गिना गया और उनके खेलने की शैली को "टोटल हॉकी " कहा गया।
1985 की चैंपियंस ट्राफी में जर्मनी के खिलाफ भारत जब 1-5 से पीछे था, तब परगट सिंह ने पीछे की पोजीशन से आगे आकर आखिरी मिनटों में चार गोल किए और भारत को 5-5 की बराबरी तक पहुंचाया। अब पार्टी हाईकमान को उनसे राजनीति में ऐसे ही जादू की उम्मीद होगी।
