Punjab Diwali Celebration: इस बार दिवाली की खुशियां बढ़ाएं, ग्रीन पटाखे चलाकर पर्यावरण बचाएं
पटाखों से फैलने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार गंभीर हो गई है। सरकार ने पारंपरिक पटाखों की बिक्री को लेकर सख्ती की है। इस बार ग्रीन पटाखों की बिक्री करने की हिदायतें दी गई है। बाजारो में ग्रीन पटाखों की बिक्री भी शुरू हो गई है।

जगदीश कुमार, जालंधर। दीपावली मनाने के लिए इंतजार की घड़ियां खत्म हो चुकी है। पिछले दो साल कोरोना की वजह से लोग खुल कर दिवाली की खुशियां नहीं मना सके। इस बार दीपावली को लोगों में खासा उत्साह है। पटाखों से होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार खासे प्रयास कर रही है परंतु पटाखे चलाने के शौकीन लोग अन्य राज्यों व जिलों से भी लेकर आ रहे हैं।
पर्यावरण को प्रदूषण से बचाने के लिए कंपनियों ने ग्रीन पटाखे भी मार्केट में उतारे है। देश की राजधानी में पारंपरिक पटाखे चलाने वालों के लिए जुर्माने तथा सजा का प्रविधान है और ग्रीन पटाखों को अहमियत दी जा रही है। वहीं जिले में पटाखों की बिक्री को लेकर प्रशासन का रवैया सख्त है। दीपावली से करीब चार दिन पहले से ही पटाखों की बिक्री होगी। ज्यादातर लोग पारंपरिक पटाखे चलाने में दौड़ मे शामिल हैं। हालांकि जिला प्रशासन पटाखे चलाने के लिए समय निर्धारित करने की रणनीति तैयार कर रहा है।
ग्रीन पटाखे कम करते हैं प्रदूषण
ग्रीन और पारंपरिक पटाखे दोनों ही प्रदूषण फैलाते हैं। पहल संस्था के उपप्रधान इंजीनियर लिकायत सिंह कहते है कि पटाखे चलाने से गुरेज करना चाहिए। पारंपरिक पटाखों के मुकाबले ग्रीन पटाखे 30 फीसदी तक कम प्रदूषण करते हैं। इसमें बेरियम नाइट्रेट जैसे खतरनाक तत्व नहीं होते हैं। पारंपरिक पटाखों में जहरीले केमिकल पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होते हैं। इसीलिए, सरकार ज्यादातर जगह पर पटाखे बैन कर रही है। साथ ही चलाने की अवधि भी कम कर रही है।
ग्रीन पटाखों में कम होता है केमिकल का प्रयोग
डीएवी कालेज के पूर्व प्रो. हेमंत कुमार कहते है कि ग्रीन पटाखा वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की ओर से विकसित किया गया है। सुरक्षित जल रिलीज़र में एक छोटी पानी की बूंदें होनी चाहिए। पटाखा फटने पर भाप के रूप में निकल जाती हैं। यह हवा में भाप छोड़ कर पटाखों से निकलने वाली धूल को दबा देता है। इसमें पोटैशियम नाइट्रेट और सल्फर शामिल नहीं होते और निकलने वाले कण धूल लगभग 30 प्रतिशत तक कम हो जाते हैं।
सुरक्षित थर्माइट पटाखे जलने पर जहरीले कण कम निकलते हैं। इनकी आवाज भी कम होती है। सुरक्षित न्यूनतम एल्यूमीनियम श्रेणी में एल्यूमीनियम का कापी कम प्रयोग होता है। इसकी जगह मैग्नीशियम प्रयोग कम होता है। इससे पटाखे की आवाज कम होती है।
कंपनियों ने बाजार में उतारे ग्रीन पटाखे
थोक पटाखा विक्रेता रवि महाजन का कहना है कि पटाखों से फैलने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए सरकार गंभीर हो गई है। सरकार ने पारंपरिक पटाखों की बिक्री को लेकर सख्ती की है। इस बार ग्रीन पटाखों की बिक्री करने की हिदायतें दी गई है। वहीं कंपनियां भी ग्रीन पटाखा ही तैयार कर मार्केट में भेज रही है।
पटाखे चलाते समय लंबी फुलझड़ी या मोमबत्ती का इस्तेमाल करें
बाठ अस्पताल के प्लास्टिक सर्जन डा. जेएस बाठ का कहना है कि पटाखों को जलाते समय लंबी मोमबत्ती या फुलझड़ी का इस्तेमाल करें। खुद को पटाखे की तरफ मत झुकाएं और सीधे रहे। पटाखे को आग लगाते समय थोड़ी दूरी रखे। पटाखों को जलाते समय जूते पहनकर रखने चाहिए। आसपास पानी की बालटी भर कर रखे। लंबे, ढीले और सिंथेटिक कपड़े पहन कर पटाखे न चलाए।
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