सुनील थानेवालिया, गुरदासपुर: राजनीतिक बिसात पर शह-मात का अजीब खेल चलता है। शतरंज के खेल में तो सभी मोहरे अपने राजा के लिए वफादारी से चाल चलते हैं, लेकिन राजनीतिक बिसात में कौन, कब, किस वक्त पाला बदल ले, यह नहीं कहा जा सकता। कल तक कांग्रेस के दिग्गज नेता के रूप में जाने जाते सुनील जाखड़ अब भाजपा के खेमे में जा बैठे हैं।

सुनील जाखड़ का गुरदासपुर से गहरा राजनीतिक नाता

सुनील जाखड़ के मामले में इसे एक दिलचस्प पहलू ही माना जाएगा कि वे कांग्रेस हाईकमान से 'घायल' होकर 2019 के लोकसभा चुनाव में प्रतिद्वंद्वी भाजपा के सनी देयोल के 'अपने' हो गए हैं। सुनील जाखड़ का गुरदासपुर से गहरा राजनीतिक नाता रहा है। फिल्म अभिनेता सांसद विनोद खन्ना के निधन के बाद 2017 में हुए उपचुनाव के दौरान सुनील जाखड़ मैदान में उतरे और जीत हासिल की। इसके बाद 2019 में जाखड़ जब पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष थे तो तब वे गुरदासपुर से दोबारा सांसद बनने के प्रबल दावेदार थे।

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सनी देयोल ने जाखड़ को हराकर दबदबा किया साबित

इस बात से भाजपा हाईकमान भी भलीभांति परिचित थी। यही कारण था कि भाजपा ने जाखड़ जैसे दिग्गज को मात देने के लिए सुपरस्टार सनी देयोल को मैदान में उतार दिया। गुरदासपुर की धरती पर सनी देयोल व सुनील जाखड़ दोनों एक दूसरे के खिलाफ काफी उग्र नजर आए। आखिर सनी देयोल ने सुनील जाखड़ को हराकर अपना दबदबा साबित किया। इस बात का मलाल जाखड़ को अभी तक है।

अखाड़े के दोनों प्रतिद्वंद्वी अब एक ही ट्रैक पर

वे कुछ दिन पहले तक भी सनी देयोल पर कटाक्ष करते नजर आए कि सनी देयोल जीतने के बाद वापस अपने हलके में लौटने की हिम्मत नहीं दिखा सके। इसे राजनीति का दिलचस्प संयोग कहा जाएगा कि चुनाव अखाड़े के दोनों प्रतिद्वंद्वी अब एक ही ट्रैक पर आ गए हैं। यह चर्चा भी छिड़ गई है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा हाईकमान फिर से सनी देयोल को मैदान में उतारने का साहस दिखाती है या सुनील जाखड़ पर दांव खेला जाएगा।

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Edited By: Deepika