मनुपाल शर्मा, जालंधर। एक बार फिर से प्रदेश में तीन बार कैबिनेट मंत्री रह चुके सरवन सिंह फिल्लौर चुनावी रण में विरोधियों को चुनौती देने उतर गए हैं। शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) ने शुक्रवार को उन्हें जालंधर जिले के विधानसभा हलका फिल्लौर से प्रत्याशी घोषित कर दिया। 30 मई, 1948 को विधानसभा हलका फिल्लौर के ही गांव चक देसराज में जन्म लेने वाले सरवन सिंह फिल्लौर का यह आठवां चुनाव होगा। इससे पहले हुए सात चुनावों में से वह छह चुनाव जीत चुके हैं। 

खास यह भी है कि विधानसभा हलका फिल्लौर उनका पैतृक हलका होने के बावजूद अकाली दल ने उन्हें वर्ष 2012 के विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष दलित नेता चौधरी जगजीत सिंह के खिलाफ विधानसभा हलका करतारपुर से प्रत्याशी बनाया था। सरवन सिंह फिल्लौर ने करतारपुर जाकर भी चौधरी जगजीत सिंह को शिकस्त दी थी। सरवन सिंह फिल्लौर ने वर्ष 1977 में अपना पहला चुनाव जीता था और युवा विधायक के तौर पर पंजाब विधानसभा में प्रवेश किया था।

2017 के चुनाव में कांग्रेस ने नहीं दी थी टिकट

वर्ष 2017 में हुए विधानसभा चुनाव से ठीक पहले वर्ष 2016 में कैप्टन अमरिंदर सिंह एवं आशा कुमारी ने सरवण सिंह फिल्लौर को कांग्रेस में ज्वाइन करवा दी थी। वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने विधानसभा हलका फिल्लौर से चौधरी संतोख सिंह के बेटे चौधरी विक्रमजीत सिंह को टिकट दिया था लेकिन वह चुनाव हार गए थे। इस बार भी कांग्रेस की तरफ से चौधरी विक्रमजीत सिंह को टिकट दे दिए जाने के बाद सरवन सिंह फिल्लौर अपने बेटे दमन वीर सिंह फिल्लौर के साथ शिरोमणि अकाली दल (संयुक्त) में शामिल करवा लिए गए और शुक्रवार को पार्टी की तरफ से उन्हें फिल्लौर से प्रत्याशी भी घोषित कर दिया गया।

यह भी पढ़ें - जब तक रहेगा मां वैष्णो देवी का दरबार, तब तक जीवित रहेंगे 'चलो बुलावा आया है' गाने वाले नरेंद्र चंचल

Edited By: Pankaj Dwivedi