जालंधर, जेएनएन। थाना करतारपुर पुलिस की ओर से पकड़े गए सीबीआइ के तीन फर्जी सब इंस्पेक्टरों ने हिंदी फिल्म 'स्पेशल 26' की तर्ज पर फर्जी सीबीआइ टीम बनाई थी। इस टीम के दो साथी फिलहाल फरार है। यह पांच सदस्यीय फर्जी टीम पूरी पड़ताल के बाद टारगेट को ठगने पहुंचती थी। टीम पहले पता लगाती थी कि कौन सा कारोबारी अवैध रूप से काम कर रहा है और उसे पुलिस व एजेंसियों की छापेमारी का डर है। टारगेट सेट करने के बाद तीनों फर्जी सीबीआइ अधिकारी उसके ठिकाने में पहुंचते थे और कार्रवाई का डर दिखाकर लाखों रुपये ठगते थे।

थाना करतारपुर पुलिस ने सोमवार को होशियारपुर के गांव नारू निवासी जसपाल सिंह उर्फ सुंदरी पुत्र स्वर्ण सिंह को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के बाद पुलिस ने उसके अन्य दो साथी गांव नारू निवासी गुरमेज सिंह उर्फ लक्की पुत्र अवतार सिंह और होशियारपुर के गांव बहादुरपुर निवासी गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी पुत्र बलवीर सिंह को गिरफ्तार किया था। आरोपित जसपाल ने सब इंस्पेक्टर विक्रम राठौर, आरोपित गुरमेज ने सब इंस्पेक्टर विजय चौहान और आरोपित गुरप्रीत ने सब इंस्पेक्टर संजय ठाकुर के नाम से सीबीआइ के फर्जी आइडी कार्ड बनाए थे, जो पुलिस ने बरामद किए हैं। मंगलवार को प्रेस कांफ्रेंस में डीएसपी सु¨रदर पाल धोगड़ी ने बताया कि सूचना के आधार पर बिना नंबर की बाइक पर जा रहे आरोपित जसपाल को पुलिस काबू किया गया था। उससे सीबीआइ का फर्जी कार्ड बरामद होने पर उसके दो साथियों को गिरफ्तार किया गया। उक्त आरोपितों के पास से पुलिस ने इओन कार (पीबी 07 बीआर 1780), एक बाइक और सीबीआइ के तीन सब इंस्पेक्टरों के फर्जी आइडी कार्ड सहित नकली पिस्टल बरामद की है। अब तक की जांच में सामने आया है कि इनकी टीम में पांच लोग थे, जिनमें से एक महिला और एक पुरुष फरार हैं। सूट-बूट पहनकर और डब में नकली पिस्टल लगाकर वह कारोबारियों को कार्रवाई करने का डर दिखाकर ठगते थे। ये गिरोह अब तक करतारपुर, बेगोवाल, भुलत्थ, नडाला, फगवाड़ा, होशियारपुर, टांडा आदि स्थानों पर सीबीआइ की फर्जी रेड डालकर लोगों से लाखों ठग चुका है।

जालंधर का नामी ट्रैवल एजेंट था अगला टारगेट

आरोपितों का अगला टारगेट जालंधर का एक नामी ट्रैवल एजेंट था। इसकी तैयारी में तीनों जुटे थे और नकली रेड डालने के काफी करीब पहुंच गए थे कि पुलिस के हत्थे चढ़ गए।

अमरीका से डिपोर्ट होने के बाद बनाई फर्जी सीबीआइ टीम

टीम का मुख्य सरगना जसपाल सिंह कई साल पहले अमरीका से डिपोर्ट होकर आया है। वह करीब 28 लाख रुपये का कर्ज लेकर अमरीका गया था। कर्ज उतरा नहीं था और यहां अपने घर जाने की बजाय किराए के मकान में रह रहा था क्योंकि कर्ज देने वाले पैसे मांग रहे थे। ऐसे में आसान तरीके से पैसे कमाने के लिए उसने ये तरीका अपनाया।

फिल्मी नाम पर रखे फर्जी नाम

लोगों पर रौब डालने के लिए जसपाल सिंह ने बालीवुड हीरो अक्षय कुमार की राउड़ी राठौर वाला विक्रम राठौर और गुरमेज सिंह ने बालीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन की बहुचर्चित फिल्म अग्निपथ वाला विजय चौहान नाम रखा हुआ था। बाकी नाम भी इसी तरह फिल्मों से प्रभावित होकर रखे थे।

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