जालंधर, जेएनएन। वित्तीय सेवाएं देनी वाली कंपनी बजाज फाइनांस की फर्जी वेबसाइट बनाकर पांच लाख रुपये के लोन का झांंसा देकर एक व्यक्ति से प्रोसेसिंग फीस और टीडीएस काटने के नाम पर साढ़े 24 हजार रुपये की ठगी कर ली गई। इस ठगी का पता उसे बाद में बजाज फाइनांस के स्थानीय कार्यालय पहुंचने पर लगा। जिस वेबसाइट से उसने लोन का आवेदन किया था, वह वेबसाइट फर्जी थी।

बस्ती शेख के अशोक कुमार ने बताया कि वह लकड़ी के बॉक्स बनाते हैं। उन्होंने फेसबुक पर बजाज फाइनांस का विज्ञापन देखा था, जिसमें बिना कागजी कार्यवाही के पांच लाख रुपये का लोन देने का दावा किया गया था। लिंक पर क्लिक करने के बाद वेब पेज खुला और उन्होंने उसमें डिटेल भर दी। कुछ समय बाद उन्हें एक फोन कॉल आया और उन्हें आधार कार्ड और बैंक पासबुक की फोटो भेजने को कहा। दस्तावेज भेजते ही उनके फोन पर मैसेज आया कि उनका पांच लाख रुपये का लोन पास हो गया है। आगे की प्रक्रिया पूरी करने के लिए उन्हें 5600 रुपये लोन प्रोसेसिंग फीस और 18950 रुपये टीडीएस जमा करना होगा। इसके बाद लोन अमाउंट उनके खाते में आ जाएगी।

अशोक ने मैसेज में बताए गए बैंक अकाउंट में डलवा दिए। कुछ देर ठग ने उन्हें दोबारा फोन कर और पैसों की मांग की तो वे बजाज के स्थानीय कार्यालय पहुंचे, जहां उन्हें हकीकत का पता चला।

असली वेबासाइट के आखिरी दो अक्षर बदल फर्जीवाड़ा

बजाज फाइनेंस की अधिकारिक वेबसाइट बजाज फिनजर्व डॉट इन है। फर्जीवाड़ा करने वालों ने बजाज के असली डोमेन के अंतिम दो अक्षर इन से बदल सीसी कर रखे हैं। इसी के सहारे वे लोगों को फंसा लेते हैं। हालांकि कोई भी बैंक या फाइनांस कंपनी किसी भी तरह के लोन की प्रोसेसिंग फीस लोन की प्रिंसपिल अमाउंट से काटकर ही आपको लोन देती है। इसमें कोई टीडीएस नहीं काटा जाता।

ठगी के नित नए तरीके

बीते साल में आए ऑनलाइन ठगी के मामलों में सबसे ज्यादा मामले ऐसे थे, जिसमें ओएलएक्स पर बाइक या कार को बेचने के नाम पर जालसाजों ने खुद को फौजी बता लोगों से लाखों रुपये ठग लिए। बैंक में दी शिकायत से निजी जानकारी चुराकर उनकी शिकायत पर कार्रवाई करने के नाम पर उनके मोबाइल को एंड्रायड एप के माध्यम से हैक कर ठगी की गई। कई ठग फेसबुक और अन्य वेबसाइट पर फर्जी प्रचार कर लोगों को अपने झांसे में फंसा रहे हैं। वह कंपनी के असली वेबसाइट जैसी दिखने वाली नकली साइट बना लोगों को जाल में फंसाते हैं।  

मोबाइल पर आया ओटीपी किसी भी कीमत में अज्ञात से साझा न करें

जालंधर शहर में बीते दिनों आए ऑनलाइन ठगी के मामलों में शिकार बनने वालों में एक आम बात यह थी कि सभी ने बिना सोचे समझे फोन पर आए ओटीपी को फोन पर अज्ञात व्यक्ति से साझा कर दिया। ऐसे में लोगों को यह जानना जरूरी है कि बैंक कभी ओटीपी, एटीएम पिन व अन्य जरूरी जानकारी आपसे नहीं मांगता। इसलिए आप भी सतर्क रहें। इसके अलावा किसी भी बैंक या शॉपिंग वेबसाइट का हेल्पलाइन नंबर अधिकारिक वेबसाइट से ही देखें। गूगल सर्च का इस्तेमाल न करें, क्योंकि ठगों ने नकली वेबसाइट बनाकर अपने नंबर दे रखे हैं।

 

 

 

 

 

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Posted By: Pankaj Dwivedi

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