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मोबाइल और कमाई बनी रिश्तों में दरार की वजह, जालंधर में 6 महीने में 400 शिकायतें पहुंची थाने

Published: Sat, 15 Aug 2026 07:00 AM (IST)

जालंधर में छह महीनों में पति-पत्नी के विवाद और घरेलू हिंसा की करीब 400 शिकायतें सामने आईं। मोबाइल, नौकरी, कमाई, दहेज और आर्थिक अपेक्षाएं विवाद की प्रमुख वजह बन रहीं।

ये AI जनरेटेड इमेज है।

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HighLights

  1. मोबाइल फोन का अत्यधिक उपयोग वैवाहिक विवादों का प्रमुख कारण।

  2. पति-पत्नी दोनों की कमाई भी बन रही झगड़े की बड़ी वजह।

  3. जालंधर में 6 माह में 400 वैवाहिक शिकायतें दर्ज हुईं।

सुक्रांत, जालंधर। शादी के कुछ महीने पहले तक जिन रिश्तों में साथ जीने और साथ रहने के सपने देखे जाते हैं, उनमें से कई रिश्ते छोटी-छोटी बातों के कारण टूटने की कगार पर पहुंच रहे हैं। कभी मोबाइल फोन को लेकर शक, कभी पति-पत्नी की कमाई को लेकर विवाद घर और रिश्ता खत्म कर रहे हैं।

इसके अलावा दहेज, आर्थिक अपेक्षाएं, संयुक्त परिवार में रहने को लेकर मतभेद भी रिश्तों में इतनी दरार पैदा कर रहे हैं कि मामला महिला थाने से होते हुए अदालत तक पहुंच रहा है। जालंधर में मोबाइल चलाने और पति पत्नी के नौकरीशुदा होने के चलते विवाद ज्यादा बढ़े हैं। वहीं दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा से जुड़ी शिकायतों का बढ़ता आंकड़ा इसी बदलती तस्वीर की ओर इशारा कर रहा है।

जानकारी के मुताबिक बीते छह महीनों में जिले के थानों में करीब 400 शिकायतें पति पत्नी के विवाद की पहुंची हैं जिनमें आधी से ज्यादा मोबाइल और नौकरीपेशा होने की वजह से शुरु हुए विवाद हैं। बाकी दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा से संबंधित पहुंची हैं। लगभग इतनी ही शिकायतें अदालतों में भी दायर की गई हैं।

खास बात यह है कि पिछले एक साल में जितनी शिकायतें आई थीं, करीब उतनी ही शिकायतें अब छह महीने में सामने आने लगी हैं। हालांकि हर शिकायत का मतलब यह नहीं कि उसमें लगाए गए आरोप अदालत में साबित हो चुके हैं। पुलिस जांच और कानूनी प्रक्रिया के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट होती है। बावजूद इसके शिकायतों की बढ़ती संख्या परिवारों के बीच बढ़ रहे तनाव की गंभीर तस्वीर पेश करती है।

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मोबाइल व बराबर कमाना बन रहा विवाद की जड़

एडवोकेट विनय शर्मा ने बताया कि पति पत्नी के बीच तीसरा आने के तो मामले अब पुराने हो गए हैं, पति पत्नी के बीच मोबाइल आने के मामले ज्यादा बढ़ गए हैं। पत्नी सारा दिन मोबाइल चलाती है, घर बच्चे नहीं देख रही, ऐसी शिकायत आ रही हैं। वहीं पत्नी के बयान भी यही हैं कि पति सारा दिन मोबाइल में बिजी रहता है और घर पर टाइम नहीं दे रहा।

एडवोकेट विनय ने बताया कि कई मामलों की काउंसलिंग उन्होंने खुद करवाई है लेकिन मोबाइल का विवाद खत्म नहीं हुआ। इसके अलावा पति पत्नी की कमाई भी लड़ाई बन रही है। जो पत्नी कमाती है वो घर परिवार को संभालने में सक्षम नहीं रहती है जिससे ज्यादा विवाद होता है।

एडवोकेट शर्मा ने बताया कि कई मामले उनके पास ऐसे आए हैं जिसमें यह शिकायत है कि पत्नी ज्यादा कमाती है और पति खुद को छोटा महसूस करता है और बात तलाक तक पहुंच जाती है।

महंगी शादियां व बढ़ती आर्थिक अपेक्षाएं

आज शादी केवल दो व्यक्तियों का रिश्ता नहीं रह गई है। दोनों परिवारों की आर्थिक और सामाजिक अपेक्षाएं भी रिश्ते पर प्रभाव डालती हैं। महंगी शादी, उपहार, कार, मकान, विदेश जाने की उम्मीद और शादी के बाद बेहतर जीवनशैली की चाह कई बार विवाद का कारण बन जाती है। एडवोकेट विनय शर्मा बताते हैं कि अदालतों में आने वाले ज्यादातर मामलों में इस तरह के केस आए हैं जिनमें शादी के वक्त जरूरत से ज्यादा खर्च किया गया।

बाद में उसी के चलते महंगे तोहफों, दहेज इत्यादि की अपेक्षाएं पूरी न होने के चलते दरार शुरु हुई जो तलाक तक पहुंची। हालांकि कई मामलों में समझौते हुए लेकिन वो नाममात्र ही हैं।

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महिलाएं बनी कानूनी जागरूक

शिकायतों में बढ़ोतरी की एक वजह महिलाओं में अपने कानूनी अधिकारों के प्रति बढ़ती जागरूकता भी मानी जा रही है। पहले कई महिलाएं घरेलू हिंसा या दहेज प्रताड़ना सहने के बावजूद शिकायत नहीं करती थीं। अब महिला हेल्पलाइन, महिला थाने और कानूनी सहायता की जानकारी बढ़ने के कारण वे पुलिस तक पहुंच रही हैं।

हालांकि काउंसलिंग विशेषज्ञ प्रवीण अबरोल का मानना है कि हर वैवाहिक विवाद का समाधान केवल कानूनी कार्रवाई नहीं है। जहां मामला गंभीर हिंसा या अपराध का हो, वहां कानून का सहारा जरूरी है। वहीं सामान्य वैवाहिक मतभेदों में समय रहते परिवार परामर्श और काउंसलिंग से रिश्ते को टूटने से बचाया जा सकता है।

सामाजिक बदलाव का संकेत

जालंधर में छह महीने में करीब 400 घरेलू हिंसा और दहेज प्रताड़ना संबंधी शिकायतों का सामने आना केवल पुलिस रिकॉर्ड का आंकड़ा नहीं, बल्कि बदलते पारिवारिक रिश्तों की तस्वीर भी है। मोबाइल, कमाई, संयुक्त परिवार, आर्थिक अपेक्षाएं और सोशल मीडिया जैसे मुद्दे अब वैवाहिक जीवन का हिस्सा बन चुके हैं।

जरूरत इस बात की है कि विवाद हिंसा या थाने तक पहुंचने से पहले पति-पत्नी एक-दूसरे की अपेक्षाओं को समझें। वहीं गंभीर मामलों में परिवार और समाज को पीड़ित का साथ देने के साथ कानून के तहत उचित कार्रवाई सुनिश्चित करनी होगी।

केस स्टडी 1: माडल हाउस के एक नवविवाहित दंपती के बीच विवाद की शुरुआत मोबाइल फोन से हुई। पत्नी की शिकायत थी कि पति उसके फोन की लगातार जांच करता था और इंटरनेट मीडिया पर किसी से बातचीत करने को लेकर सवाल उठाता था। धीरे-धीरे पति-पत्नी के बीच विवाद बढ़ता गया और दोनों के परिवार भी इसमें शामिल हो गए।

कुछ महीनों बाद मामला महिला थाने तक पहुंच गया। यह मामला अकेला नहीं है। पुलिस के पास पहुंचने वाली कई शिकायतों में मोबाइल फोन, इंटरनेट मीडिया पर गतिविधियां और एक-दूसरे की निजी जिंदगी में जरूरत से ज्यादा दखल विवाद की वजह के तौर पर सामने आ रहे हैं।

केस स्टडी 2 : वडाला चौक के पास रहने वाले एक पति ने शिकायत दी कि पत्नी सारा दिन मोबाइल पर किट्टी ग्रुप, मायके के बने ग्रुप पर सक्रिय रहती है। उसे रोका तो उसने लड़ाई की और मायके चली गई। अब हर दूसरे दिन लड़कर मायके चली जाती है लेकिन मोबाइल नहीं छोड़ा। थाने में काउंसलिंग हुई लेकिन विवाद अभी भी चल रहा है।

केस स्टडी 3: एक अन्य शिकायत में महिला का आरोप था कि शादी के बाद उसे नौकरी जारी रखने को लेकर ससुराल में विरोध का सामना करना पड़ा। शिकायत में नकोदर रोड पर रहने वाले महिला ने कहा कि वह नौकरी छोड़ने के लिए तैयार नहीं थी, जबकि परिवार चाहता था कि वह घर की जिम्मेदारियां संभाले।

शादी से पहले उसे नौकरी करने के लिए मना नहीं किया गया। पति-पत्नी के बीच इसी मुद्दे को लेकर लगातार विवाद होने लगा। बाद में महिला ने घरेलू प्रताड़ना की शिकायत पुलिस में दी।

केस स्टडी 4: एक शिकायत में काला संघिया निवासी महिला ने आरोप लगाया कि शादी के कुछ समय बाद ससुराल पक्ष की ओर से अतिरिक्त सामान और पैसे की मांग की जाने लगी। शुरुआत में परिवार ने समझौते की कोशिश की, लेकिन मांग बढ़ती गई। महिला ने मायके लौटने के बाद पुलिस से शिकायत की। ऐसे मामलों में पुलिस शिकायत मिलने के बाद दोनों पक्षों को सुनती है और तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाती है।

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