Ludhiana Gas Leak: न्याय के इंतजार में पथराई आंखें, महीनों बाद बनी नई कमेटी; हादसे में 11 लोगों की गई थी जान
Ludhiana Gas Leak ग्यासपुरा गैस रिसाव कांड में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने अब जांच के लिए नई कमेटी का गठन किया है। आयोग ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए दो मई को एक कमेटी का गठन किया था। कमेटी को जांच रिपोर्ट पेश करने के साथ ही डीसी लुधियाना को पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने के निर्देश दिए गए थे।
जागरण संवाददाता, लुधियाना। ग्यासपुरा गैस रिसाव कांड में नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने अब जांच के लिए नई कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी में संयुक्त सचिव वन एवं पर्यावरण मंत्रालय, केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव और आइआइटी दिल्ली से एक प्रोफेसर को शामिल किया गया है।
पांच जनवरी तक पेश करनी होगी रिपोर्ट
प्रोफेसर का नाम डायरेक्टर आइआइटी दिल्ली की ओर से दिया जाएगा। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सदस्य सचिव नोडल एजेंसी के तौर पर काम करेंगे और कमेटी के बीच सामजस्य स्थापित करने की जिम्मेदारी भी उनके पास रहेगी। कमेटी दुर्घटना स्थल का दौरा करने के बाद अगले साल पांच जनवरी तक अपनी रिपोर्ट एनजीटी के सामने पेश करेगी।
एनजीटी की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि 30 अप्रैल, 2023 को लुधियाना के ग्यासपुरा इलाके में सीवरेज से निकली गैस के कारण 11 लोगों की मौत हो गई थी। आयोग ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए दो मई को एक कमेटी का गठन किया था। कमेटी को जांच रिपोर्ट पेश करने के साथ ही डीसी लुधियाना को पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने के निर्देश दिए गए थे।
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एनजीटी के सामने पेश की गई रिपोर्ट में कुछ साफ नहीं है। आखिरकार इतनी मात्रा में गैस कहां से बनी। हादसे को लेकर जांच अधिकारियों की रिपोर्ट में भी विरोधाभास है। एनजीटी का कहना है कि इतनी बड़ी दुर्घटना के पीछे कारण जानना जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसे हादसों की संभावना को कम किया जा सके।
इन बिंदुओं पर जांच रिपोर्ट में विरोधाभास
1. एनजीटी के सामने पेश की गई रिपोर्ट में विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है। केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड का कहना है कि लंबे समय से सीवरेज जाम होने के कारण ऐसी जहरीली गैस बन सकती है। इसी रिपोर्ट में बोर्ड के एक अन्य अधिकारी घटना स्थल के आसपास उद्योगों से निकलने वाले दूषित पानी को एक कारण मानते हैं।
2. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी घटनास्थल के आसपास सीवरेज नेटवर्क का सर्वे करने की सलाह दे रहे हैं।
ग्यासपुरा में सात बड़ी इलेक्ट्रोप्लेटिंग यूनिट द्वारा नियमों के उल्लंघन की बात कही जा रही है, जो अपना जहरीला पानी सीवरेज लाइन में डाल रही थी। वहीं, पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा है कि घटनास्थल के 100 मीटर दायरे में दो यूनिट और 500 मीटर दायरे में 15 प्रदूषण फैलाने वाली यूनिट हैं। इसके अलावा 14 पिकलिंग यूनिट भी है, लेकिन रिपोर्ट में यह साफ नहीं है कि इन यूनिट से किस तरह का पानी निकलता है और कहां पर डिस्चार्ज किया जाता है।
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