जालंधर [मनुपाल शर्मा]। महानगर में प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए ग्रीन फ्यूल उपलब्ध करवा पाना अब दूर की कौड़ी बनकर रह गया है। महानगर में कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (सीएनजी) उपलब्ध करवाने के लिए अधिकृत निजी कंपनी जय मधोक काम छोड़ चुकी है और दूसरी किसी कंपनी ने काम संभाला ही नहीं है। हालात यह हो गए हैं कि देश की सबसे बड़ी तेल विपणन कंपनी इंडियन ऑयल के पास भी जालंधर में सीएनजी उपलब्ध करवाने को लेकर कोई जानकारी नहीं है।

जय मधोक कंपनी ने जून 2020 के बाद से महानगर में सीएनजी उपलब्ध नहीं करवाई है। जय मधोक कंपनी ट्रकों में ही सीएनजी भरकर जालंधर के मात्र एक पंप पर सीएनजी उपलब्ध करवाती थी। यह भी लगभग 90 रुपए प्रति किलो की दर पर बेची जाती थी। वजह यह बताई जाती थी कि कंपनी को तेल एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय की तरफ से एडमिनिस्ट्रेटिव प्राइस मैनेजमेंट (एपीएम) के तहत नियंत्रित मूल्य पर सीएनजी उपलब्ध करवाने के लिए अनुमति प्रदान नहीं की गई थी। मौजूदा समय में शहर में 3000 के लगभग सीएनजी चालित थ्री व्हीलर एवं 500 के लगभग सीएनजी चालित अन्य वाहन थे, जिन्हें महानगर के भीतर सीएनजी उपलब्ध न होने के चलते करतारपुर, फगवाड़ा या नकोदर रोड पर स्थित गांव सिंघां तक सीएनजी भरवाने के लिए जाना पड़ता है।

इंडियन ऑयल के डीजीएम (रिटेल सेल्स) अतुल गुप्ता ने शहर में सीएनजी उपलब्ध होने को लेकर कोई भी टिप्पणी करने से इंकार किया है। यह जानकारी जरूर मिली है कि इंडियन ऑयल की ओर से जिला प्रशासन को तेल एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय से संपर्क साधने को लिखा जा रहा है ताकि महानगर में सीएनजी सप्लाई सुचारू तरीके से चालू करवाई जा सके।

जिला प्रशासन शहर में ही सीएनजी उपलब्ध करवाएः यूनियन

सीएनजी चालित थ्री व्हीलर यूनियन के पदाधिकारी अनिल ठाकुर ने कहा कि शहर के भीतर सीएनजी उपलब्ध ना होने के चलते 40 किलोमीटर का अतिरिक्त फासला तय करना पड़ रहा है। कोरोनावायरस संक्रमण के चलते पैदा हुई मौजूदा परिस्थितियों में किसी भी थ्री व्हीलर चालक के लिए 40 किलोमीटर का अतिरिक्त फासला भारी आर्थिक संकट पैदा कर रहा है। जिला प्रशासन को अति शीघ्र शहर के भीतर सीएनजी उपलब्ध करवाने के लिए कोशिश करनी चाहिए।

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