अमृतसर [नितिन धीमान]। कार्टून करेक्टर छोटा भीम और डोरेमोन के प्रति बच्चों की दीवानगी इस कदर है कि वे टीवी या मोबाइल पर इन दोनों काल्पनिक पात्रों को देखते समय खाना पीना सब भूल जाते हैं। इनके प्रति बच्चों का आकर्षण ही ऐसा है। इन दिनों जब कोरोना महामारी के चलते शिक्षण संस्थान बंद हैं तो ज्यादातर बच्चे अपना अधिकांश वक्त टीवी पर इन्हीं कार्टून किरदारों को देख कर बिता रहे हैं।

मेडिकल शिक्षा विभाग द्वारा संचालित गुरु नानक देव अस्पताल (जीएनडीएच) में इन्हीं कार्टून पात्रों को दिखाकर बीमार बच्चों का इलाज किया जा रहा है। अस्पताल की पीडिएट्रिक वार्ड की दीवारों पर डोरेमोन, छोटा भीम, नोबिता की पेंटिंग उकेरी गई हैं। दरअसल, कोरोना महामारी की तीसरी लहर का अधिक खतरा बच्चों पर होने की संभावना जताई गई है। ऐसे में तीसरी लहर में यदि बच्चे संक्रमित हुए तो अस्पताल में इलाज के दौरान उन्हें सुखद माहौल देने के लिए छोटा भीम और डोरेमोन के चित्र बनाए गए हैैं जो इन बच्चों के मन व मस्तिष्क में आत्मविश्वास और निडरता का भाव विकसित करेंगे। ऐसा शिशु रोग विशेषज्ञों का मानना है।

पांच से दस वर्ष तक के बच्चे उस स्थिति में इन कार्टून किरदारों को याद करते हैं जब वह किसी परेशानी में होते हैं। हालांकि बच्चों की परेशानियां ज्यादा बड़ी नहीं होती। उन्हें ऐसा महसूस होता है कि कोई भी काम यह कार्टून किरदार कर सकते हैं। यह आइडिया पीडिएट्रिक विभाग की प्रोफेसर डा. मनमीत सोढी का है।

आर्थो व गायनी वार्ड में भी बच्चों के लिए आइसोलेशन वार्ड तैयार

गुरुनानक देव अस्पताल के मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ केडी सिंह का कहना है कि कोरोना संक्रमित बच्चे जब अस्पताल उपचार के लिए लाए जाएंगे तो उन्हें दीवारों पर छोटा भीम, डोरेमोन, टॉम, जैरी, ओगी, मोटू, बेन टेन, पतलू, बबलू, डबलू, डोरा, जॉन और रंग बिरंगे फूलों की पेंटिंग बच्चों को लुभाएगी। इसके अतिरिक्त आर्थो व गायनी वार्ड में बच्चों के लिए आइसोलेशन वार्ड तैयार कर दिया गया है। इन वार्डों की दीवारों पर भी कार्टून किरदार उकेरे जा रहे हैं।

Edited By: Kamlesh Bhatt