जालंधर, जेएनएन। एमआरपी से ज्यादा रेट व उस पर जीएसटी के रूप में कुल 267 वसूलना फेयरडील एजेंसीज को महंगा पड़ गया। जिला उपभोक्ता फोरम ने एजेंसी को आदेश दिए हैं कि वह उपभोक्ता को उक्त रकम के साथ-साथ 35 हजार रुपये भी दे।

न्यू शीतल नगर निवासी सन्नी ने शिकायत दी थी कि वह एक निजी कंपनी में काम करते हैं। उनके घर में कुछ मरम्मत का काम चल रहा था। इसके लिए 22 मार्च 2018 को गाउजिंग रॉड खरीदी थी। इसे वेल्डिंग में इस्तेमाल किया जाना था। पैकेट में एमआरपी 933 रुपये 93 पैसे लिखी हुई थी। इसके बावजूद नेहरू गार्डन रोड स्थित फेयरडील एजेंसीज ने एक हजार रुपये रेट लगाया और 18 फीसद के हिसाब से 180 रुपये जीएसटी भी वसूला। शिकायतकर्ता ने इसका विरोध भी किया लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

उपभोक्ता की शिकायत पर फोरम ने नोटिस निकाला तो इस मामले में पार्टी बनाए फेयरडील एजेंसीज व गोयल एजेंसीज ने संयुक्त जवाब दिया। उन्होंने कहा कि बिल-कैश मीमो में टाइपोग्राफिकल एरर आया है। वो अतिरिक्त कीमत व जीएसटी रकम वापस लौटाने को तैयार हैं। दोनों पक्षों को सुनने के बाद फोरम के प्रेजिडेंट करनैल सिंह व सदस्य ज्योत्सना ने फैसला देते हुए कहा कि शिकायतकर्ता के आरोपों को विरोधी पार्टियों ने स्वीकार कर लिया है। फोरम ने गलती से ज्यादा पैसे वसूलने के तर्क को भी खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि किसी तीसरे व्यक्ति से भी इसी तरह की वसूली की गई। जिससे जाहिर है कि वो ओवरचार्जिंग के आदी हैं। फोरम ने कहा कि कोई भी रिटेलर किसी वस्तु को एमआरपी से ज्यादा में नहीं बेच सकता। अगर बेचा तो यह सरासर अनफेयर ट्रेड प्रैक्टिस है।

इसके बाद फोरम ने फेयरडीज एजेंसीज को आदेश दिए कि शिकायतकर्ता को अतिरिक्त वसूली कीमत, जीएसटी वापस लौटाए। इसके अलावा मानसिक परेशानी के एवज में 25 हजार और केस खर्च के तौर पर 10 हजार रुपए लौटाने को कहा।

 
 

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