मनुपाल शर्मा, जालंधर। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से नाता तोड़ने के बाद अकाली दल बादल ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के साथ गठबंधन किया है। आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सुखबीर बादल ने शनिवार को जालंधर में एक साथ हिंदू और दलित कार्ड एक साथ खेला। पंथक राजनीति की पहचान वाले अकाली दल की सर्व धर्म एवं सर्व जाति पार्टी की इमेज बनाने की कवायद में सुखबीर बादल ने शनिवार को पहले जालंधर के प्रसिद्ध शक्तिपीठ श्री देवी तालाब मंदिर में माथा टेका। फिर, बसपा-अकाली दल की भूल सुधार रैली में पहुंचकर बसपा के संस्थापक स्व. कांशीराम की पुण्यतिथि के मौके पर उनके नाम से दलितों के लिए कल्याण योजनाएं शुरू करने की भी कई घोषणाएं एक साथ कर डालीं।

देवी तालाब मंदिर में माथा टेकते हुए सुखबीर बादल ने पूरी श्रद्धा दिखाई और तिलक भी लगवाया और माता की चुनरी भी गले में पहनी। मंदिर में ही सुखबीर बादल ने भाईचारक सांझ की वकालत की। कुछ दिन पहले ही सुखबीर ने श्री माता चिंतपूर्णी में भी जाकर माथा टेका था।

दलित राजनीति के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि बसपा के संस्थापक कांशी राम की स्मृति में नई योजनाएं शुरू करने की घोषणा की गई हैं। ये सभी घोषणाएं सुखबीर ने बसपा लीडरशिप की उपस्थिति में की। अकाली दल प्रधान ने रैली में साफ तौर पर घोषणा की कि गठबंधन सरकार बनने पर पंजाब में कांशी राम पेंडू विकास योजना लागू की जाएगी, जिसके तहत 50 फीसद अनुसूचित जाति की आबादी वाले सभी गांवों को विकास कार्यों के लिए 50 लाख की विशेष ग्रांट दी जाएगी।

खास यह है कि बसपा की लीडरशिप सुखबीर सिंह बादल की तरफ से स्वर्गीय कांशी राम के नाम पर योजनाएं शुरू करने की घोषणा से गदगद नजर आ रही है। तर्क दिया जा रहा है कि बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के नाम पर तो कई घोषणाएं हो चुकी हैं। कई योजनाएं भी चल रही हैं लेकिन यह पहला मौका है जब अकाली दल की तरफ से स्व. कांशी राम के नाम पर योजनाएं शुरू करने की घोषणा की है। विधानसभा चुनाव के नतीजे तो फिलहाल भविष्य के गर्भ में है, लेकिन सुखबीर बादल का शनिवार को खेला गया राजनीतिक पैंतरा कम से कम प्रदेश की सत्तासीन कांग्रेस को तो खुली चुनौती दे गया है, जो चरणजीत सिंह चन्नी को दलित मुख्यमंत्री के तौर पर प्रोजेक्ट कर रही है और इस कोशिश में है कि दलित वोट बैंक को अपने साथ जोड़ा जा सके।

Edited By: Pankaj Dwivedi