जागरण संवाददाता, जालंधर

भूजल स्तर को रीचार्ज कर और सिचाई के लिए ट्रीटेड पानी का उपयोग करने के लिए जिला प्रशासन चालू वित्तवर्ष के दौरान जालंधर में सीचेवाल मॉडल/थापर मॉडल पर आधारित 55 तालाब विकसित करेगा। जिले के सभी 11 ब्लॉकों में ऐसे पांच-पांच तालाब बनेंगे। 11 साइटों पर निर्माण कार्य शुरू हो चुका है।

एडीसी विशेष सारंगल ने बताया कि जिले के अलग-अलग 11 ब्लाकों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून (मनरेगा) के अंतर्गत तालाब बनाए जाएंगे। प्रत्येक तालाब के निर्माण पर 16 से 17 लाख रुपये खर्च आएंगे। इस मॉडल के अंतर्गत घरों से इस्तेमाल किया और अन्य साधनों से प्राप्त पानी को तालाब में छोड़ने से पहले तीन गहरे तालाबों द्वारा साफ किया जाएगा। जहां तेल और अन्य ठोस अवशेषों को अलग किया जाएगा। उन्होंने बताया कि बाकी ठोस अवशेष गहरे तालाब में रह जाती है, जो सात दिनों के बाद कुदरती तौर पर कीटाणुओं को मारने में मदद करेगी। यह मॉडल धरती नीचे पानी को रिचार्ज करने में मदद करेगा और इसी तरह सीवरेज के पानी को इन तीन तालाबों द्वारा साफ कर खेती के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। क्या है सीचेवाल व थापर मॉडल

- गांव के सीवरेज के पानी को एक तालाब में इकट्ठा किया जाता है।

- पानी की सतह पर तैर रही चीजों को फिल्टर मैश के जरिए खत्म किया जाता है।

- इसके बाद पानी एक-एक करके तीन गहरे तालाबों में ले जाया जाता है।

- पहले तालाब में सीवरेज के पानी में से गार अलग होती है, दूसरे में तेल, चिकनाई, घी अलग होता है। तीसरे में तालाब में जो पानी पहुंचता है वह सूरज की किरणों से साफ होता है। यहां से पंप के जरिए पानी खेतों में सिंचाई के लिए भेजा जाता है।

- सीचेवाल माडल मैनुअल है, जबकि थापर मॉडल में तकनीक हिस्सा बढ़ाया गया है।

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