World Animal Day: बेसहारा पशुओं का सहारा बने पूर्व सैनिक, हादसाग्रस्त पशुओं का होशियारपुर में करते हैं उपचार
विश्व पशु दिवस पर पूर्व सैनिक विजय राणा घगवाल की गोसेवा चर्चा में है। उन्होंने हाजीपुर में उपचार केंद्र बनाया, जहां हादसाग्रस्त और बेसहारा गोवंश को उपचार मिलता है।

घायल पशु का इलाज करते हुए पूर्व सैनिक वियज राणा।
HighLights
पूर्व सैनिक विजय राणा घगवाल बेसहारा गोवंश की सेवा कर रहे।
उन्होंने होशियारपुर के हाजीपुर में उपचार केंद्र स्थापित किया है।
अब तक हजारों घायल और बीमार पशुओं का इलाज हुआ।
सरोज बाला, दातारपुर (होशियारपुर)। सेना में रहकर देश की सेवा करने6 के बाद पूर्व सैनिक विजय राणा घगवाल अब बेसहारा और हादसाग्रस्त गोवंश की सेवा में जुटे हैं। गोसेवा के प्रति उनकी ऐसी लगन लगी कि उन्होंने होशियारपुर के हाजीपुर में बेसहारा गोवंश उपचार केंद्र स्थापित कर दिया। यहां सड़क हादसों में घायल, बीमार और बेसहारा पशुओं को लाकर उनका उपचार कराया जाता है।
हाजीपुर के अलावा तलवाड़ा, मानसर और मुकेरियां क्षेत्र से भी घायल व बीमार गोवंश को केंद्र में लाया जाता है। अब तक हजारों पशुओं को यहां उपचार मिल चुका है। विश्व पशु दिवस पर पूर्व सैनिक विजय राणा घगवाल ने बताया कि समाजसेवा की प्रेरणा उन्हें परिवार से ही धरोहर के रूप में मिली है। विजय राणा के पिता कैप्टन ब्रह्म दास भी सेना में रहे और समाज सेवी है।
दादा जी ठाकुर बिशन दास भी अच्छे शायर थे। विजय राणा ने बताया कि उन्होंने बीए बीएड डिग्री हासिल की है, सेना से बतौर हवलदार स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले ली और समाजसेवा तथा गौसेवा में जुट गए।
यह भी पढ़ें- 6 अक्टूबर को पंजाब कांग्रेस की कमान संभालेंगे परगट सिंह, ताजपोशी की तैयारी शुरू; सचिन पायलट समेत जुटेगा पूरा नेतृत्व
गौवंश उपचार शेल्टर शुरू किया
गौसेवा की ललक ऐसे लगी कि हाजीपुर में दुर्घटनाग्रस्त एवं बेसहारा पशुओं के उपचार के लिए बेसहारा गौवंश उपचार शेल्टर हाजीपुर स्थापित किया। आज तक हजारों गौवंश को हाजीपुर तलवाड़ा मानसर मुकेरियां तक के इलाकों से दुर्घटनाग्रस्त और बीमार पशुओं को यहां लाकर उपचार किया जाता है।
उन्होंने बताया कि 4 अक्टूबर को विश्व पशु कल्याण दिवस मनाया जाता है। इस दिवस का उद्देश्य बेजुबान जानवरों के कल्याण के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाना है, अत: जानवरों का कल्याण, उनकी सही देखभाल तथा उनके जीने के अधिकारों को बचाने के लिए यह दिन मनाया जाता है।
यह भी पढ़ें- मैड संधू हत्याकांड में 27 CCTV फुटेज खंगाली, आरोपियों के अमृतसर रूरल में छिपे होने का शक; जांच तेज
विश्वभर में बेजुबानों से होता है अमानवीय व्यवहार
विजय राणा घगवाल ने कहा कि इस दिन को ‘पशु प्रेमी दिवस’ के रूप में भी जाना जाता है। उन्होंने कहा कि विश्वभर में बेजुबान जानवरों के साथ बहुत ही बुरा तथा अमानवीय व्यवहार किया जाता है। साथ ही कई जानवरों की रोड एक्सीडेंट के कारण जान चली जाती है, तो किसी को सिर्फ अपने फायदे के लिए मौत के घाट उतार दिया जाता है। दुनियाभर में बढ़ते मांसाहारी खान-पान के चलन के कारण भी ये मूक जानवर अपनी जान गंवा देते हैं।
साथ ही वर्तमान समय में बढ़ते प्रदूषण और वनों-जंगलों की अंधाधुंध कटाई के कारण भी कई जानवरों की प्रजाति लुप्त भी होती जा रही है। अत: उनके संरक्षण और कल्याण हेतु आवश्यक तथा ठोस कदम उठाना बहुत ज़रूरी हो गया है।
101 साल से मनाया जा रहा ये दिवस
विश्व पशु दिवस की शुरुआत 24 मार्च 1925 को की गई थी और जिसका उद्देश्य पशु कल्याण के बारे में लोगों में जागरूकता फैलाना था। इसके बाद में 1929 में 04 अक्टूबर को पशु कल्याण के आयोजन का जश्न मनाने के रूप में इस दिन को चुना गया।
जिसका मुख्य उद्देश्य पशुओं के प्रति इंसानों की क्रूरता को रोकना, पशुओं का संरक्षण करके उनके स्वास्थ्य को बेहतर करने हेतु चिकित्सा को बढ़ावा देना, उन्हें उनका हक और उनकी भावनाओं का सम्मान दिलाना भी है। तथा बदलते समय में जानवरों या पशुओं की संरक्षण करके उनकी स्थिति को और अधिक बेहतर करना है।
