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    सरस मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों से बांधा समां

    By JagranEdited By:
    Updated: Thu, 25 Oct 2018 05:45 PM (IST)

    लाजवंती आउटडोर खेल स्टेडियम होशियारपुर में तीसरे दिन क्षेत्रीय सरस मेला पूरे यौवन में आ गया है।

    सरस मेले में सांस्कृतिक कार्यक्रमों से बांधा समां

    जेएनएन, होशियारपुर: लाजवंती आउटडोर खेल स्टेडियम होशियारपुर में तीसरे दिन क्षेत्रीय सरस मेला पूरे यौवन में आ गया है। सांस्कृतिक छटा बिखेरते लोक नृत्य व वादन से पूरा माहौल लघु भारत में तब्दील हो गया है। जिसके कारण मेले में आने वाले लोगों की संख्या भी लगातार बढ़ती जा रही है। सरस मेले में लगे विभिन्न राज्यों के पारंपरिक फूड स्टाल जहां हर वर्ग की पसंद बन रहे हैं, वहीं झूले बच्चों को खूब लुभा रहे हैं। दूसरी ओर सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने समां बांध दिया।

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    इसके अलावा मेले की खास बात यहां लगे विभिन्न राज्यों के स्टाल हैं और हर स्टाल अपने आप में एक दिलचस्प कहानी बयां करता है। इन स्टालों पर प्रदर्शित कलाकृतियां, दस्तकारी आम नहीं बल्कि इस सामान के पीछे इनकी मेहनत और तपस्या है। अलग-अलग राज्यों से आए यह लोग किसी न किसी स्वयं सहायता समूह से जुड़े हैं, जो कि 10 से 15 लोगों के बीच का समूह है और इसके संचालन करने वाले व्यक्ति या महिला ने विपरित परिस्थितियों से जूझते हुए न सिर्फ अपने आप को मजबूत किया बल्कि और कई परिवारों भी आत्म निर्भरता का पाठ पढ़ाया। आज वहीं लोग सरस मेले के माध्यम से अपनी कलाकृतियों, शिल्पकारी व दस्तकारी को प्रदर्शित कर रहे हैं।

    इसी तरह स्टाल नंबर 204 हमें दूर समुद्री तट पर ले जाता है। यह स्टाल है गोआ के प्रतीक सेल्फ हैल्प ग्रुप का। इस स्टाल पर बैठी राजश्री वायगानकर 11 सदस्यों के साथ पिछले 12 सालों से यह ग्रुप चला रही हैं। इनके पास नारियल के विभिन्न तरह के डिजाइन के अलावा खालिस नारीयल तेल, काजू, रोस्टेड काजू, चूरमा, लड्डू, मसाला केला चिप्स और गोआ के पारंपरिक खाद्य पदार्थ हैं जिसे लोग काफी पसंद कर रहे हैं। मंजीत कौर के ग्रुप में 13 सदस्य करते हैं काम

    स्टाल नंबर 147 बरनाला के गांव खुड्डी कलां की मंजीत कौर एकता सेल्फ हेल्प ग्रुप का संचालन करती हैं। जिसमें कि लगभग 12-13 सदस्य काम करते हैं और यह सब लोग आचार, मुरब्बे, चटनी आदि बनाते हैं। एक बार अगर कोई इनके हाथ का बना आचार, चटनी चख ले तो वह कहीं और से इसे नहीं खरीदेगा। पिछले 13 वर्षों से यह अपना स्वयं सहायता समूह चला रहे हैं और पंजाब के अलावा देश के विभिन्न हिस्सों गोआ, पटना, अहमदाबाद, हरियाना आदि स्थानों पर भी अपना स्टाल लगा चुके हैं। काउंटर नंबर 144 महिलाओं की खास पसंद

    काउंटर नंबर 144 महिलाओं की खास पसंद बना है। उत्तर प्रदेश के चंदौली के 30 वर्षीय जावेद अख्तर इस स्टाल का संचालन कर रहे हैं। वारिस सेल्फ हैल्प ग्रुप के अंतर्गत जावेद अपने ग्रुप के बाकी साथियों सहित हाथ से बनी बनारसी साडि़यां, सूट व दुपट्टे बनाते हैं। इस तरह की बारीक कारीगरी लोगों को काफी पसंद आ रही हैं। मेले के प्रति लोगों का काफी रुझान : हरबीर सिंह

    अतिरिक्त डिप्टी कमिश्नर (विकास) हरबीर ¨सह ने बताया कि सरस मेले के प्रति लोगों में काफी रुझान बढ़ा है और लोग परिवार सहित इस पूरे मेले का आनंद ले रहे हैं। मेले में लगे हर स्टाल अपने आप में किसी न किसी राज्य को समेटे हुआ है, जिसके कारण लोग मेले का भरपूर मजा ले रहे हैं।