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" न्यूजीलैंड में बेटा जेल में है..." फर्जी कॉल से डराकर होशियारपुर में पिता से ठग लिए ₹9 लाख

Published: Sun, 13 Sep 2026 04:28 PM (IST)

टांडा में साइबर ठगों ने न्यूजीलैंड में बेटे के एक्सीडेंट की झूठी खबर देकर पिता से नौ लाख रुपये ठग लिए। पुलिस अधिकारी बनकर व्हाट्सऐप पर कॉल की गई।

ये प्रतीकात्मक तस्वीर है।

ये प्रतीकात्मक तस्वीर है।

HighLights

  1. न्यूजीलैंड में बेटे के एक्सीडेंट की झूठी खबर दी गई।

  2. साइबर ठगों ने खुद को न्यूजीलैंड पुलिस अधिकारी बताया।

  3. इलाज और पुलिस केस से बचाने के नाम पर ठगे 9 लाख।

हजारी लाल, होशियारपुर। न्यूजीलैंड में रह रहे बेटे के एक्सीडेंट और पुलिस केस में फंसने की झूठी खबर देकर साइबर ठगों ने टांडा के एक पिता से करीब 9 लाख रुपये ठग लिए। ठगों ने व्हाट्सऐप पर खुद को न्यूजीलैंड पुलिस का अधिकारी बताया और इलाज कराने तथा पुलिस केस से बचाने के नाम पर अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर करवा ली। बाद में बेटे से बात हुई तो पूरी कहानी फर्जी निकली।

यह मामला टांडा क्षेत्र के वार्ड नंबर 15, सलां रोड निवासी दयाल सिंह पुत्र हरभजन सिंह के साथ हुआ। पीड़ित ने साइबर अपराध थाने में शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

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पहले डर का जाल, फिर पैसों की मांग

पुलिस शिकायत के मुताबिक 9 सितंबर को दयाल सिंह के मोबाइल पर व्हाट्सऐप कॉल आई। कॉल करने वालों ने खुद को न्यूजीलैंड पुलिस अधिकारी बताया। उन्होंने कहा कि उसका बेटा सुखराज सिंह उर्फ सन्नी, जो न्यूजीलैंड में रहता है, एक्सीडेंट के मामले में फंस गया है। बातचीत इस तरह की गई कि पीड़ित को लगा कि उसका बेटा गंभीर मुसीबत में है।

आरोपितों ने कथित तौर पर इलाज और पुलिस केस से बचाने के नाम पर रकम की मांग की। विदेश में रह रहे बेटे के साथ हादसे की बात सुनकर परिवार परेशान हो गया। इसी घबराहट का फायदा उठाकर ठगों ने दयाल सिंह से बैंक आफ बड़ौदा और एक्सिस बैंक के खातों में कुल नौ लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए।

बेटे से बात हुई तो पैरों तले खिसकी जमीन

रकम ट्रांसफर करने के बाद जब दयाल सिंह को कुछ संदेह हुआ तो उन्होंने बेटे से संपर्क करने की कोशिश की। बेटे से बातचीत होने पर पूरी कहानी झूठी निकली। न कोई ऐसा एक्सीडेंट हुआ था और न ही वह पुलिस के शिकंजे में था।

इसके बाद पीड़ित को समझ आया कि व्हाट्सऐप कॉल करने वालों ने न्यूजीलैंड पुलिस अधिकारी बनकर फर्जी कहानी गढ़ी और डर पैदा कर ऑनलाइन ठगी को अंजाम दिया।

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नौ लाख की रकम कहां गई, खंगाल रही पुलिस

ठगी का पता चलने के बाद मामले की शिकायत दर्ज करवाई गई। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार साइबर क्राइम थाने में बीएनएस की धारा 318(4), 319(2) और आइटी एक्ट की धारा 66डी के तहत मामला दर्ज किया गया है। शिकायत के संबंध में एनसीआरपी कंप्लेंट नंबर 32509260035362 भी दर्ज है।

अब पुलिस उन बैंक खातों की जांच कर रही है, जिनमें रकम ट्रांसफर हुई। साथ ही आरोपितों द्वारा इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबर, व्हाट्सऐप कॉल और लेनदेन से जुड़े तकनीकी साक्ष्यों को खंगाला जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि रकम निकालने वाला कौन है और इस पूरे नेटवर्क के पीछे कितने लोग जुड़े हैं।

विदेश में रह रहे बच्चों के नाम पर बढ़ रही ठगी

साइबर ठगों ने इस वारदात में किसी हथियार या जबरदस्ती का इस्तेमाल नहीं किया। उन्होंने सिर्फ एक फोन कॉल के जरिए पिता के सबसे बड़े डर—विदेश में रह रहे बेटे की सुरक्षा—को निशाना बनाया। पहले हादसे की खबर देकर मानसिक दबाव बनाया और फिर खुद को पुलिस अधिकारी बताकर पैसे ट्रांसफर करवा लिए।

यह मामला एक बार फिर बताता है कि साइबर अपराधी लोगों की भावनाओं को हथियार बनाकर कुछ ही मिनटों में बड़ी रकम साफ कर सकते हैं। पुलिस ने लोगों को सलाह दी है कि विदेश में रह रहे परिजन के एक्सीडेंट, गिरफ्तारी या पुलिस केस की सूचना मिलने पर घबराकर तुरंत पैसे ट्रांसफर न करें। पहले परिजन से सीधे संपर्क कर पुष्टि करें और संदिग्ध कॉल की सूचना पुलिस को दें।

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