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    सरकारी अस्पताल के डिस्पेंसरी में नहीं मिल रही जरूरी दवाइयां, बाहर से दवाइयां खरीदने को मरीज मजबूर

    होशियारपुर सिविल अस्पताल की हालत नाम बड़े और दर्शन छोटे वाली है। जिला मुख्यालय के सरकारी अस्पताल में मरीजों को दवाइयां ही नहीं मिल रही हैं जबकि राज्य सरकार की ओर से मुफ्त इलाज का राग अलापा जाता है।

    By Edited By: Updated: Tue, 20 Sep 2022 10:02 PM (IST)
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    होशियारपुर सिविल अस्पताल में अपनी व्यथा बताते हुए एक मरीज।

    सतीश कुमार, होशियारपुर : सरकारी अस्पताल में मरीजों को 24 घंटे बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही है। अस्पताल की हालत नाम बड़े और दर्शन छोटे वाली है। जिला मुख्यालय के सरकारी अस्पताल में मरीजों को दवाइयां ही नहीं मिल रही हैं, जबकि राज्य सरकार की ओर से मुफ्त इलाज का राग अलापा जाता है। दैनिक जागरण की ओर से मंगलवार को अस्पताल का मुआयना किया गया तो तमाम मरीजों ने बताया कि अस्पताल की डिस्पेंसरी से दवाइयां नहीं मिलती है। मजबूरीवश बाहर से ही महंगी दवाइयां खरीदनी पड़ती हैं।

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    डाक्टर ने लिखी छह दवाइयां, मिली सिर्फ एक : उर्मिला देवी

    माहिलपुर से आई उर्मिला देवी ने बताया कि उसकी शादी को पांच वर्ष हो गए है मगर अभी तक बच्चा नहीं हुआ है। सरकारी अस्पताल माहिलपुर में इलाज के लिए गई तो डाक्टरों ने होशियारपुर रेफर कर दिया। मंगलवार को डाक्टर ने पर्ची पर छह दवाइयां लिखकर कहा कि यह सभी दवाइयां अस्पताल के अंदर बनी डिस्पेंसरी से मुफ्त मिलेगी मगर डिस्पेंसरी में केवल एक ही दवा मिली।

    पांच में से एक भी दवा नहीं मिली : रमन कुमार

    अपने बच्चे की जांच करवाने के लिए आए रमन कुमार मुख्लियाना ने बताया कि डाक्टर ने पर्ची पर पांच दवाइयां लिखकर दी थी मगर जब डिस्पेंसरी में दवा लेने के लिए पहुंचे तो कर्मचारी ने पर्ची देखते ही बोल दिया कि सभी दवाइयां कुछ दिन बाद ही मिल सकेगी। फिलहाल आपको यह सभी दवाइयां अस्पताल के बाहर स्थित निजी मेडिकल स्टोर से ही खरीदनी होगी।

    पहले सभी दवाइयां मिलती थीं, अब एक भी नहीं : गुरविंदर सिंह

    गांव मेघोवाल से आंखों का इलाज करवाने के लिए सरकारी अस्पताल पहुंचे गुर¨वदर ¨सह ने बताया कि उनका इलाज पिछले पांच महीनों से यहां चल रहा है। वह महीने में एक बार आते हैं। पहले सारी दवा अस्पताल की डिस्पेंसरी से ही मिल जाती थी मगर पिछले दो महीने से एक भी दवा नहीं मिल रही। हर बार बाहर से ही दवाई लेनी पड़ती है।

    डिस्पेंसरी का ब्यौरा मेरे पास उपलब्ध नहीं : ओपी हीर

    चीफ फार्मासिस्ट ओपी हीर ने बताया कि सरकारी अस्पताल स्थित डिस्पेंसरी का ब्यौरा उनके पास नहीं होता है। वह मोहल्ला क्लिनिक में दवा सप्लाई करते हैं। कुछ बच जाए तो वह डिस्पेंसरी भेज देते हैं। सरकारी अस्पताल का रिकार्ड फार्मासिस्ट अजय शर्मा देखते हैं।

    अमृतसर से जल्द मंगवाई जाएगी दवाइयां : अजय शर्मा

    फार्मासिस्ट अजय शर्मा ने कहा कि डिस्पेंसरी में कुछ दवाइयां खत्म हो गई हैं, जिसको लेने के लिए वह बुधवार को ही अमृतसर जाएंगे। उसके बाद मरीजों को कोई परेशानी नहीं आएगी। जैसे-जैसे दवाइयां आएंगी मरीजों को उनकी जरूरत और डाक्टर की पर्ची के हिसाब से दी जाएगी।

    सरकारी अस्पताल की डिस्पेंसरी में समय-समय पर दवाइयों का स्टाक चेक किया जाता है। यदि मरीजों को कुछ दवाइयां नहीं मिल पा रही है तो जल्द ही उन दवाओं का स्टाक डिस्पेंसरी में उपलब्ध करवा दिया जाएगा ताकि मरीजों को अस्पताल से ही दवाइयां मिल सके और उन्हें बाहर स्थित मेडिकल स्टोरों का रुख न करना पड़े।

    -डा. स्वाती, एसएमओ, सरकारी अस्पताल होशियारपुर।