ज्योति स्वरूप ने कंडी में जगाई रोजगार की 'ज्योति'
अपने लिए तो सभी जीते हैं पर सही जीना तो उसी का है जो दूसरों के लिए कुछ करे।

सरोज बाला, दातारपुर
अपने लिए तो सभी जीते हैं पर सही जीना तो उसी का है, जो दूसरों के लिए जिए इस बात को चरितार्थ किया ज्योति स्वरूप ने। दातारपुर और तलवाड़ा के मध्य दातारपुर से मात्र तीन किलोमीटर दूर अड्डा बैरियर के पास ज्योति ने जो सपना देखा था वह आज एक हकीकत बन चुका है। बायो टेक्नालोजी में एमएससी ज्योति पालमपुर में खेती बाड़ी विश्वविद्यालय में सरकारी नौकरी करते थे। पर सोच कुछ कर गुजरने की थी सो सन 2001 में नौकरी छोड़ दी और आकर सुगंधित फसलों की खेती शुरू की। ज्योति ने कालमेघ, लैमन ग्रास, कौंचा बीज और जंगली गेंदा की खेती शुरू की अपने मित्रों के साथ मिलकर सोसायटी (उन्नति कोआपरेटिव कम प्रोसेसिंग सोसायटी सीमित) बनाई। अपने इरादों को परवान चढ़ाने के लिए विश्व बैंक के कंडी प्रोजेक्ट के साथ मिलकर क्षेत्र में संभावनाओं की तलाश शरू की।
सन 2004 में पंजाब स्टेट काउंसिल फार साइंस एंड टेक्नोलोजी के सौजन्य से और इसके निदेशक एसएस मरवाहा के सहयोग से स्थानीय संसाधनों का उपयोग करके इलाका के किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने का पुनीत काम शुरू किया।
इसके लिए केंद्र सरकार ने 37 लाख 50हजार रुपये सन 2004 से 2007 तक उक्त प्रकल्प चलाने को मदद दी और फिर ज्योति ने इस काम को अपने खर्चे पर 2007 से चलाना आरंभ किया और फिर रोजगार तलाश करने वाले ज्योति रोजगार देने वाले बन गए।
अब उन्नति में 260 कर्मचारी प्रत्यक्ष तौर पर काम कर रहे हैं, जिनमें से अधिकांश महिलाएं हैं। इस के अलावा 400 रजिस्टर्ड फार्मर हैं, जो उन्नति के लिए करेला, जामुन, आमला, हरड, बहेड़ा, घृत कुमारी, गिलोय, नीम और तुलसी आदि जड़ी बूटियां एकत्रित करते हैं। उनके सहयोगी मिल कर एक हजार लोग अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार हासिल करते हैं। इन सभी ने विगत वर्ष में लगभग पांच करोड़ रुपये की उक्त चीजें उन्नति को बेचकर लाभ कमाया। इस के अतिरिक्त 260 लोगों को भी लगभग दो करोड़ रुपये वेतन देते हैं। इस प्रकार ज्योति वह काम कर रहे हैं, जो सरकार को करना चाहिए था।
सरकार को देते हैं राजस्व
ज्योति स्वरूप ने बताया इतने लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार देने के बाद उन्नति संस्थान सरकार को हर साल एक करोड़ रुपये राजस्व भी विभिन्न टेक्सो के रूप में देता है। ज्योति स्वरूप बताते हैं 2007 के बाद उन्होंने न तो सरकार से कोई मदद ली और ना ही कोई लोन ही लिया। अब संस्था पूरी तरह आत्म निर्भर है और करोड़ों रुपये की मशीनरी उन्नति में लगी हुई है। ज्योति बताते हैं इस समय कृषि विश्वविद्यालय पालमपुर, गड्वासू आदि के साथ उन्होंने एमओयु साइन किया हुआ है। क्या क्या बनता है
संस्थान में एलोवेरा जूस, आमला जूस, कैंडी, मुरब्बा, करेला जूस, प्राकृतिक सिरका, प्राकृतिक गुड, आमला की बर्फी आदि कई उत्पाद निर्मित किए जाते हैं। जिनकी मार्केट में भारी मांग है। ज्योति ने कहा युवा यदि प्रण करें और स्वरोजगार में संभावनाएं तलाशें तो कंडी में कई प्रकार के काम धंधे लगाए जा सकते हैं और खुद तो आत्म निर्भर बन कर औरों को भी रोजगार मुहैय्या करवाया जा सकता है।
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