फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र पर एक्सटेंशन! होशियारपुर के स्वास्थ्य विभाग में मामले की जांच हुई शुरू
दैनिक जागरण के खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने साठ प्रतिशत दृष्टि दिव्यांगता का झूठा प्रमाणपत्र देकर दो साल की ...और पढ़ें

ये AI जनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर है।
HighLights
फर्जी दिव्यांगता प्रमाणपत्र पर दो साल की एक्सटेंशन का मामला।
स्वास्थ्य विभाग ने जांच कमेटी गठित कर स्पष्टीकरण मांगा।
60% दिव्यांगता दावा, दोबारा जांच में 35% पाई गई।
हजारी लाल, होशियारपुर। सिविल सर्जन कार्यालय में 60 प्रतिशत दृष्टि दिव्यांगता का प्रमाणपत्र दिखाकर दो साल की एक्सटेंशन लेने के मामले में जांच शुरू हो गई है। दैनिक जागरण के खुलासे के बाद स्वास्थ्य विभाग ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कमेटी गठित की है। अब कमेटी ने सहायक सीनियर देवेंद्र कुमार भट्टी से पूरे प्रकरण को लेकर स्पष्टीकरण मांगा है।
विभाग की जांच का केंद्र दिव्यांगता प्रमाणपत्र, दोबारा हुई दृष्टि की जांच और एक्सटेंशन की मंजूरी की प्रक्रिया है। दैनिक जागरण ने दस्तावेजों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर इस मामले का खुलासा किया था कि किस तरह 60 प्रतिशत दृष्टि दिव्यांगता का प्रमाणपत्र प्रस्तुत कर दो साल की एक्सटेंशन हासिल की गई। मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हलचल मच गई और अब संबंधित कर्मचारी से जवाब तलब किया गया है।
यह भी पढ़ें- पंजाब चुनाव से पहले अकाली दल को झटका, दिवंगत विधायक के बेटे और रिटायर्ड SP राज बलविंदर मराड़ कांग्रेस में शामिल
60% दिव्यांगता महज 35 निकली
सिविल सर्जन कार्यालय में तैनात सहायक सीनियर देवेंद्र कुमार भट्टी अगले साल सेवानिवृत्त होने वाले हैं। उन्होंने सरकारी अस्पताल होशियारपुर की एक डाक्टर से 60 प्रतिशत दृष्टि दिव्यांगता का प्रमाणपत्र लिया था। इसी प्रमाणपत्र के आधार पर उन्होंने दो साल की एक्सटेंशन के लिए आवेदन किया। हैरानी की बात यह रही कि आवेदन के तुरंत बाद ही उच्चाधिकारियों ने एक्सटेंशन को मंजूरी दे दी।
इस प्रक्रिया को लेकर शिकायत सामने आने के बाद मामले की जांच शुरू हुई। इसके बाद दोबारा दृष्टि की जांच करवाई गई तो दिव्यांगता का स्तर 60 प्रतिशत के बजाय 35 प्रतिशत सामने आया। इस अंतर ने प्रमाणपत्र और उसके आधार पर दी गई एक्सटेंशन की प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं।
यह भी पढ़ें- पंजाब में ECI ने शुरू की विधानसभा चुनाव की तैयारी, अधिकारियों के तबादले के निर्देश; 30 नवंबर तक देनी होगी रिपोर्ट
प्रमाणपत्र और एक्सटेंशन प्रक्रिया पर सवाल
मामले का खुलासा होने के बाद सिविल सर्जन डॉ. मंदीप कौर ने सहायक सिविल सर्जन के नेतृत्व में जांच कमेटी गठित की है। कमेटी ने जांच शुरू करते हुए देवेंद्र कुमार भट्टी से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण मांगा है। अब उनके जवाब और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर मामले के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल की जाएगी।
जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया क्या थी, दोबारा जांच में दृष्टि दिव्यांगता का प्रतिशत अलग क्यों आया और एक्सटेंशन की मंजूरी किन आधारों पर दी गई। फिलहाल विभागीय जांच जारी है और संबंधित कर्मचारी का पक्ष सामने आने के बाद ही मामले की अगली तस्वीर स्पष्ट होगी।
