राजस्थान से पानी का पैसा मांगेगा पंजाब, उझ परियोजना जल्द पूरी करने और यमुना जल पर कानूनी लड़ाई का प्रस्ताव
पंजाब विधानसभा में सरकार ने राजस्थान से पानी की कीमत वसूलने, उझ परियोजना पूरी करने और यमुना जल अधिकारों के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने के प्रस्ताव पेश किए।

पंजाब विधानसभा में बोलते हुए मंत्री बरिंदर गोयल।
HighLights
राजस्थान से पानी के भुगतान की मांग की गई।
उझ बहुउद्देशीय परियोजना जल्द पूरी करने पर जोर।
यमुना नदी के पानी पर कानूनी लड़ाई का विकल्प।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के विशेष सत्र के अंतिम दिन मंगलवार को पानी के मुद्दे पर कई अहम प्रस्ताव पेश किए गए। सिंचाई मंत्री बरिंदर कुमार गोयल ने राजस्थान को दिए जा रहे पानी की कीमत पंजाब को दिलाने, पाकिस्तान जा रहे पानी को रोकने के लिए उझ बहुउद्देशीय परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने और यमुना नदी के पानी पर राज्य के अधिकार के लिए केंद्र सरकार से हस्तक्षेप की मांग की।
प्रस्तावों में कहा गया कि पंजाब खुद गंभीर जल संकट से जूझ रहा है, जबकि राज्य का पानी दूसरे क्षेत्रों में इस्तेमाल हो रहा है। गोयल ने कहा कि सतलुज, रावी और ब्यास नदियां राजस्थान से होकर नहीं गुजरतीं, इसलिए राजस्थान रिपेरियन राज्य नहीं है। इसके बावजूद दशकों से पंजाब का पानी राजस्थान को मुफ्त में दिया जा रहा है।
इससे राजस्थान राजस्व कमा रहा है, जबकि पंजाब को अपने जल संकट का सामना करना पड़ रहा है। प्रस्ताव में मांग की गई कि राजस्थान सरकार पंजाब को दिए जाने वाले पानी की कीमत चुकाए। केंद्र सरकार भी यह सुनिश्चित करे कि भविष्य में राजस्थान को दिए जाने वाले पानी का भुगतान हर साल पंजाब को मिले।
यह भी पढ़ें- 'पानी की हर बूंद के लिए अदालत से सड़क तक लड़ेंगे', CM मान का राजस्थान से 1.44 लाख करोड़ की रायल्टी का दावा
पानी को रोकने के लिए उझ परियोजना पर जोर
सिंचाई मंत्री ने कहा कि रावी नदी के रास्ते पाकिस्तान जा रहा पानी जम्मू-कश्मीर से निकलने वाली उझ, तरनाह और बसंतर नदियों का है। ये नदियां माधोपुर हेडवर्क्स के नीचे रावी में मिलती हैं। पंजाब के पास इस पानी को संग्रहित करने के लिए पर्याप्त ढांचा नहीं है। सदन में केंद्र सरकार से उझ बहुउद्देशीय परियोजना को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने का अनुरोध किया गया, ताकि पानी को रणजीत सागर बांध की ओर मोड़कर पंजाब में सिंचाई और अन्य जरूरतों के लिए इस्तेमाल किया जा सके।
यमुना के पानी के लिए कानूनी लड़ाई का विकल्प
गोयल ने कहा कि पंजाब का यमुना नदी के पानी पर ऐतिहासिक और कानूनी अधिकार है। वर्ष 1966 में पंजाब के पुनर्गठन से पहले यमुना अविभाजित पंजाब में बहती थी। प्रस्ताव में केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय से 25 अप्रैल 2025 को पंजाब की ओर से दायर शिकायत पर जल्द फैसला लेने और वाटर डिस्प्यूट ट्रिब्यूनल गठित करने की मांग की गई। यदि केंद्र सरकार कोई निर्णय नहीं लेती, तो पंजाब सरकार को तुरंत सुप्रीम कोर्ट का रुख करना चाहिए।
इसके अलावा वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने मुख्यमंत्री माताएं-धीयां योजना, हर महीने 300 यूनिट मुफ्त बिजली, खेतीबाड़ी के लिए मुफ्त बिजली, मुख्यमंत्री सेहत योजना, आम आदमी क्लीनिक, महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा, तीर्थ यात्रा योजना और डेयरी से जुड़ी वित्तीय योजनाएं जारी रखने का प्रस्ताव पेश किया। इसके लिए पंजाब बजट में प्रावधान रखने की बात कही गई। प्रस्ताव में कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल की टिप्पणियों की निंदा भी की गई।
राणा गुरजीत का तंज: 'मित्रां दा न चलदा है'
कांग्रेस विधायक राणा गुरजीत सिंह ने भाजपा या अकाली दल में शामिल होने की चर्चाओं पर तंज कसते हुए कहा, 'एक बात तो मानते हो कि मित्रां दा न चलदा है।' विधानसभा में मीडिया ने उनसे पूछा था कि उनके भाजपा या अकाली दल में जाने की चर्चा क्या वह खुद चलवाते हैं या कोई और। भाजपा के वरिष्ठ नेता से मिलने के सवाल पर उन्होंने पलटकर पूछा, 'भाजपा का सीनियर लीडर है कौन?'
अपने बेटे का जिक्र करते हुए राणा ने कहा कि वह आजाद है, लेकिन उसकी सोच कांग्रेस वाली है। किसी को गलतफहमी में नहीं रहना चाहिए। उन्होंने यह भी तंज कसा कि उनके अपने कांग्रेस के लोगों को भी खुशी हुई है कि वह जा रहे हैं।
यह भी पढ़ें- पंजाब चुनाव से पहले अकाली दल को झटका, दिवंगत विधायक के बेटे और रिटायर्ड SP राज बलविंदर मराड़ कांग्रेस में शामिल
मिड-डे मील नहीं मिलने का मुद्दा उठा
आम आदमी पार्टी के विधायक कुलवंत सिंह ने नर्सरी और एलकेजी के विद्यार्थियों को मिड-डे मील नहीं मिलने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मिड-डे मील यूकेजी से आठवीं कक्षा तक दिया जाता है, जबकि नर्सरी और एलकेजी के बच्चे भी उन्हीं कक्षाओं में बैठते हैं। लंच के समय दो कक्षाओं की छुट्टी हो जाती है और बाकी बच्चों को भोजन के लिए बुलाया जाता है।
इस पर मंत्री ने बताया कि प्री-प्राइमरी वन और प्री-प्राइमरी टू की व्यवस्था की गई है। केंद्र सरकार की ओर से नियम बदलने के कारण दिक्कत आ रही है। पहले केंद्र सरकार अपना हिस्सा देती थी और बाद में राज्य सरकार भुगतान करती थी। उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि सभी बच्चों को खाना मिले।
