'पानी की हर बूंद के लिए अदालत से सड़क तक लड़ेंगे', CM मान का राजस्थान से 1.44 लाख करोड़ की रायल्टी का दावा
पंजाब विधानसभा में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने करतारपुर कॉरिडोर खोलने की मांग उठाई और पानी के मुद्दे पर राजस्थान को घेरते हुए अदालत से सड़क तक लड़ने का ऐलान किया।

पंजाब विधानसभा में बोलते हुए सीएम भगवंत मान।
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के अंतिम दिन मुख्यमंत्री भगवंत मान ने करतारपुर साहिब कॉरिडोर खोलने, राज्य के पानी पर अधिकार और सिंचाई व्यवस्था में सुधार के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि करतारपुर कॉरिडोर पहले खुला था और उस दौरान किसी तरह की दिक्कत नहीं आई। दोनों तरफ के लोग एक-दूसरे से मोहब्बत करते हैं और आज भी श्रद्धालु करतारपुर साहिब के दर्शन के लिए अरदास करते हैं। इस संबंध में केंद्र सरकार से संपर्क किया गया है।
पानी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने राजस्थान पर पंजाब के पानी का लाभ लेने का आरोप लगाते हुए कहा कि राज्य का 1.44 लाख करोड़ रुपये की रायल्टी का हक बनता है। उन्होंने कहा कि पानी की एक-एक बूंद के लिए आवाज उठाई जाएगी। जरूरत पड़ी तो अदालत से लेकर सड़कों तक लड़ाई लड़ी जाएगी।
वहीं, उन्होंने एसवाईएल नहर के बजाय यमुना-सतलुज लिंक (वाईएसएल) बनाने का सुझाव भी दिया। मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उनकी सरकार ने नहरों से सिंचाई का दायरा 22 प्रतिशत से बढ़ाकर 80 प्रतिशत तक पहुंचाया है और इससे भूजल स्तर में सुधार हुआ है।
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एसवाईएल की जगह वाईएसएल का सुझाव
मुख्यमंत्री ने पानी से जुड़े प्रस्ताव का समर्थन करते हुए कहा कि पंजाब को अपने पानी के अधिकारों के लिए हर स्तर पर लड़ना होगा। उन्होंने दावा किया कि राजस्थान वर्ष 1960 तक पंजाब को रायल्टी देता रहा, लेकिन अब पंजाब से मुफ्त पानी लेकर आगे बेच रहा है। उनके अनुसार, इससे पंजाब का 1.44 लाख करोड़ रुपये का रायल्टी संबंधी हक बनता है।
मान ने कहा कि रावी और ब्यास के पानी की मांग तो पंजाब से की जाती है, लेकिन यमुना के पानी के संबंध में होने वाली बैठकों में पंजाब को नहीं बुलाया जाता। उन्होंने सवाल उठाया कि जब पुनर्गठन से पहले पंजाब और हरियाणा एक थे, तब यमुना में पंजाब का भी हिस्सा था, तो अब इस मुद्दे पर राज्य को अलग क्यों रखा जाता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक में एसवाईएल की जगह वाईएसएल यानी यमुना-सतलुज लिंक बनाने का सुझाव दिया था। उनके अनुसार, इससे हरियाणा को पानी मिल सकता है और बचा हुआ पानी सतलुज में डाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि सतलुज में पानी की स्थिति ऐसी हो गई है कि वह नाले जैसी रह गई है। ऐसे में केवल नहर बनाने की बात करने से क्या होगा, जब उसमें पानी ही नहीं होगा।
पानी राज्य का विषय, फिर अधिकार क्यों छीने जा रहे
मुख्यमंत्री ने कहा कि पानी राज्य का विषय है, फिर भी पंजाब के अधिकारों को लेकर बार-बार विवाद खड़ा किया जाता है। उन्होंने भाखड़ा-ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी), बांधों और हेडवर्क्स के नियंत्रण को लेकर उठने वाले मुद्दों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि दूसरे राज्यों में बांधों का नियंत्रण संबंधित राज्य सरकारों के पास है, लेकिन पंजाब के मामले में बार-बार अड़चनें आती हैं।
सिंचाई व्यवस्था का जिक्र करते हुए मान ने दावा किया कि उनकी सरकार बनने के समय पंजाब में नहरों से केवल 22 प्रतिशत खेतों की सिंचाई होती थी, जो अब बढ़कर 80 प्रतिशत हो गई है। उन्होंने कहा कि सरकार ने करीब 14 हजार किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाई है। कंडी नहर 40 साल बाद चालू हुई है और पहाड़ी क्षेत्रों तक पानी पहुंचाने के लिए उसे लिफ्ट किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने दावा किया कि इन प्रयासों से भूजल का इस्तेमाल कम हुआ है और पंजाब में भूजल स्तर एक से पांच मीटर तक ऊपर आया है। उन्होंने कहा कि सरकार का काम केवल जिंदाबाद और मुर्दाबाद के नारे लगवाना नहीं, बल्कि लोगों की समस्याओं का समाधान करना है। सिंचाई सुविधाओं में बढ़ोतरी से किसानों को भी लाभ मिल रहा है।
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कांग्रेस विधायकों पर साधा निशाना
मुख्यमंत्री ने विपक्षी कांग्रेस पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि पानी के मुद्दे पर प्रस्ताव लाने के समय कांग्रेस विधायक विधानसभा से चले गए। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि पानी के कातिल सदन से चले गए हैं, जबकि उनकी सरकार पानी की रखवाली करती रहेगी। उन्होंने दावा किया कि प्रस्ताव अब पास हो जाएंगे।
मान ने कहा कि विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है और उसके नेता रोजाना सदन में आकर मुर्दाबाद के नारे लगाते हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्तर पर वोट चोरी का मुद्दा उठाने वाले विपक्षी नेता यहां बहस का सामना नहीं कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने उम्मीद जताई कि 2027 में भी इसी तरह की विधानसभा देखने को मिलेगी।
सरकारी योजनाओं को लेकर जनता के बीच जाएगी सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव का असर पंजाब के सीमावर्ती गांवों पर पड़ता है और कई बार लोगों को अपने गांव खाली करने पड़ते हैं। उन्होंने विभाजन के समय करीब 10 लाख लोगों की मौत का जिक्र करते हुए कहा कि लोगों के बीच आपसी प्रेम बना हुआ है। पहले बसें और ट्रेनें चलती थीं, लेकिन अब खेलों में भी राजनीति आ गई है।
उन्होंने कहा कि सरकार बिजली योजना और मावां-धीयां योजना समेत अपनी सभी योजनाओं को लेकर जनता के बीच जाएगी। सरकार अपना एजेंडा लोगों के सामने रखेगी और सकारात्मक तरीके से उनसे संवाद करेगी।
2030 हॉकी विश्व कप की मेजबानी पर पंजाब की नजर
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में पंजाब में अंतरराष्ट्रीय हॉकी मुकाबलों के आयोजन को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि पंजाब ने देश को मिल्खा सिंह, दारा सिंह, ओलंपियन सुरजीत सिंह और बलबीर सिंह जैसे खिलाड़ी दिए हैं। उन्होंने भारतीय हॉकी टीम में पंजाब के खिलाड़ियों की भागीदारी का जिक्र करते हुए कहा कि पहले टीम के सभी 11 खिलाड़ी पंजाब से होते थे, जबकि अब भी 11 में से नौ खिलाड़ी पंजाब के हैं। बेंच पर बैठने वाले चार खिलाड़ियों में से तीन खिलाड़ी भी पंजाब से हैं।
मान ने बताया कि एशियन चैंपियंस ट्रॉफी के तहत जालंधर में मलेशिया और चीन का मुकाबला होगा, जबकि शाम को भारत और बांग्लादेश के बीच मैच खेला जाएगा। उद्घाटन समारोह में वह स्वयं शामिल होंगे। उन्होंने कहा कि पंजाब बनने के बाद पहली बार पंजाबी खिलाड़ियों को अपने राज्य में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खेलने का अवसर मिल रहा है। जालंधर के बल्टन पार्क में लीग मैच होंगे, जबकि मोहाली में तीन और चार तारीख को सेमीफाइनल और फाइनल खेले जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष से सभी विधायकों को मैच देखने और खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाने के लिए आमंत्रित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि यदि पंजाब सफलतापूर्वक इन मुकाबलों की मेजबानी करता है, तो 2030 में हॉकी विश्व कप की मेजबानी मिलने का अवसर बन सकता है।
