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पंजाब विधानसभा में दैनिक जागरण की गूंज, विधायक सर्वजीत माणूके ने उठाया प्रतिबंधित दवाओं के अवैध कारोबार का मुद्दा

Published: Tue, 27 Oct 2026 01:03 PM (IST)

पंजाब विधानसभा के अंतिम दिन विधायक सर्वजीत कौर माणूके ने दैनिक जागरण की खबर दिखाकर प्रतिबंधित दवाओं के अवैध कारोबार का मुद्दा उठाया और गंभीर चर्चा की।

HighLights

  1. विधानसभा में प्रतिबंधित दवाओं के अवैध कारोबार का मुद्दा उठाया गया।

  2. फर्जी पते और मिटाई जानकारी से सप्लाई चेन का पता लगाना मुश्किल।

  3. सीमित अधिकारियों के कारण ड्रग कंट्रोल विभाग को निगरानी में चुनौती।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के सत्र के अंतिम दिन मंगलवार को प्रतिबंधित दवाओं के अवैध कारोबार का मुद्दा सदन में गूंजा। आम आदमी पार्टी की विधायक सर्वजीत कौर मानूके ने दैनिक जागरण में प्रकाशित खबर 'प्रतिबंधित दवाओं का नेटवर्क पहुंच से परे' दिखाते हुए इस मुद्दे को उठाया। इसके बाद सदन में इस गंभीर विषय पर चर्चा शुरू हुई।

दैनिक जागरण ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि पंजाब में प्रतिबंधित दवाओं की बरामदगी, आरोपितों की गिरफ्तारी और मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी के बावजूद पूरे नेटवर्क तक पहुंचना पुलिस और ड्रग कंट्रोल विभाग के लिए चुनौती बना हुआ है। दवाओं पर दर्ज पते फर्जी मिलने और पैकेटों से निर्माता, बैच नंबर व अन्य पहचान संबंधी जानकारी मिटाए जाने के कारण सप्लाई चेन की जांच प्रभावित हो रही है।

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सदन में उठा सवाल

यह सवाल भी उठाया गया था कि दवाएं कहां बन रही हैं, किसके जरिए भेजी जा रही हैं और पंजाब तक किस रास्ते पहुंच रही हैं। इसके अलावा, प्रदेश में 36 हजार से अधिक खुदरा और थोक दवा विक्रेताओं की निगरानी के लिए ड्रग कंट्रोल विभाग में केवल 51 अधिकारियों की तैनाती और सीमित संसाधनों का मुद्दा भी उठाया गया था।

जिसमें लिखा था- पंजाब में मेडिकल नशे के खिलाफ कार्रवाई जारी है। प्रतिबंधित गोलियां और कैप्सूल बरामद हो रहे हैं, आरोपित गिरफ्तार किए जा रहे हैं और मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी भी हो रही है, लेकिन दवाओं की सप्लाई चेन की जांच अब भी अधूरी है।

दवा कहां बनी, किसने भेजी और किस रास्ते पंजाब पहुंची, जांच में यही अहम कड़ी गायब है। कहीं दवाओं पर दर्ज पते फर्जी मिल रहे हैं तो कहीं पैकेटों से निर्माता, बैच नंबर और पहचान संबंधी जानकारी मिटाई हुई मिल रही है। इससे बरामद खेप का स्रोत तलाशना और उसके पीछे सक्रिय नेटवर्क तक पहुंचना मुश्किल हो रहा है। दवा किस कंपनी से निकली, किस वितरक ने खरीदी, किसके नाम पर भेजी गई और रास्ते में किसके हाथों अवैध बाजार तक पहुंची, इन सवालों के जवाब नहीं मिल पा रहे हैं।

पड़ोसी राज्यों तक पहुंची पुलिस

कुछ वर्ष पहले प्रतिबंधित दवाओं से जुड़े मामलों की जांच में पुलिस ने हिमाचल प्रदेश के बद्दी, दिल्ली के रोहिणी और उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में छापेमारी की थी। जांच में सामने आया कि दवाओं की एक खेप सहारनपुर में एक व्यक्ति के नाम पर भेजी गई थी।

जब पुलिस उस पते पर पहुंची तो वह गलत निकला। निर्माता के नाम, बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी की तारीख, वितरक तथा अन्य विवरण जांच के अहम आधार होते हैं। इन्हीं से खरीद-बिक्री के रिकार्ड का मिलान होता है, लेकिन जब पता फर्जी हो या पहचान संबंधी जानकारी मिटा दी गई हो, तो यह नहीं हो पाता।

अन्य राज्यों से पहुंच रही दवाएं

वर्ष 2025 से अब तक दूसरे राज्यों से जुड़ी खेपों में 11.54 लाख नशीली गोलियां और कैप्सूल जब्त किए गए हैं। पंजाब में बरामद होने वाली नशीली दवाओं की करीब 80 प्रतिशत सप्लाई गुजरात, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली से जुड़े स्रोतों से होने का अनुमान है। कुछ मामलों के तार हिमाचल प्रदेश से भी जुड़े बताए गए हैं। अगस्त 2026 में केंद्रीय एजेंसी ने एक ट्रक से 66.79 लाख साइकोट्रापिक टैबलेट जब्त की गई थीं। इनमें अल्प्राजोलम, ट्रामाडोल, नाइट्राजेपाम और क्लोनाजेपाम जैसी दवाएं शामिल थीं।

कुछ पैकेटों पर बैच नंबर, निर्माण और एक्सपायरी संबंधी जानकारी मिटाई गई थी, जबकि कुछ पर दवाओं की पंजाब और हरियाणा में बिक्री न करने का उल्लेख था। पंजाब सरकार अब दूसरे राज्यों के साथ दवा निर्माण, बिक्री, खरीद और परिवहन के नियमन को मजबूत करने का मुद्दा उठाने की तैयारी कर रही है।

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झोटा हत्याकांड के बाद जिलों में कार्रवाई

जिला स्टोर में छापा लाइसेंस रद गिरफ्तार नोटिस स्टोर सील
तरनतारन 19 0 3 0 0
लुधियाना 1 1 0 0 0
गुरदासपुर 15 0 0 7 0
फाजिल्का 8 0 0 0 0
मालेरकोटला 16 0 2 0 2
संगरूर 45 0 0 0 0
अमृतसर 4 0 0 0 0
श्री मुक्तसर साहिब 7 0 0 5 1
कुल (Total) 115 1 5 12 3

36 हजार विक्रेताओं की निगरानी, अधिकारी सिर्फ 51 

पंजाब में खुदरा और थोक दवा विक्रेताओं की संख्या 36 हजार से अधिक है, जबकि उनकी निगरानी के लिए केवल 51 ड्रग कंट्रोल अधिकारी हैं। कई जिलों में एक ही अधिकारी तैनात है। लुधियाना में छह, अमृतसर में पांच तथा जालंधर, मोहाली और पटियाला में चार-चार अधिकारी हैं। वर्ष 2020 में 11 अधिकारियों की भर्ती के बाद छह साल से अधिक समय तक नई भर्ती नहीं हुई।

फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के आंकड़ों के अनुसार, अप्रैल 2025 से सितंबर 2026 के बीच 16,788 निरीक्षण किए गए और 20.64 करोड़ रुपये की दवाएं जब्त की गईं। इस दौरान 520 केमिस्ट लाइसेंस निलंबित हुए, 54 मामले अदालतों में पहुंचे और 35 मामलों में दोषसिद्धि या जुर्माना हुआ।

सप्लाई चेन और मनी ट्रेल की जांच जरूरी

पूर्व डीएसपी वरिंदर महाजन के मुताबिक, केवल मेडिकल स्टोरों पर छापेमारी करने से फार्मा ड्रग्स के अवैध कारोबार को खत्म नहीं किया जा सकता। दवा कंपनियों से लेकर उनकी मार्केटिंग टीम, डिस्ट्रीब्यूटर और मेडिकल स्टोर तक पूरी सप्लाई चेन की जांच जरूरी है। कंपनियों से दवाओं की खेप रिकार्ड के साथ निकलती है।

यदि किसी खेप को हरियाणा के किसी जिले में पहुंचना था, लेकिन जांच में पता चले कि वह वहां पहुंची ही नहीं, तो यह पता लगाना होगा कि दवा रास्ते में कहां गई और किसके पास पहुंची। रिकार्ड में दर्ज डिलीवरी का वास्तविक सप्लाई से मिलान करना जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि पुलिस और ड्रग विभाग को दवा की सप्लाई के साथ भुगतान और पैसों के लेनदेन की कड़ियां भी खंगालनी होंगी।

सप्लाई चेन और मनी ट्रेल तोड़े बिना अवैध कारोबार पर स्थायी रोक लगाना मुश्किल है। परविंदर सिंह झोटा की मौत के बाद हुई कार्रवाई के बाद भी लगातार निगरानी जरूरी है, ताकि कुछ समय बाद यह कारोबार फिर सक्रिय न हो सके।

जिम्मेदार कौन?

नशे के इस अवैध कारोबार में सबसे बड़ा सवाल है कि दवाओं की खेप पर दर्ज पते फर्जी हैं, तो सत्यापन किसकी जिम्मेदारी है? जब प्रदेश में इतने मेडिकल स्टोर हैं तो स्टाफ इतना कम क्यों है? ड्रग कंट्रोल विभाग छापेमारी और लाइसेंस निलंबन के बाद पूरे नेटवर्क को तोड़ने में असमर्थ साबित हो रहा है तो जवाबदेही किसकी है? इक्का-दुक्का मामलों को छोड़ दें तो पुलिस भी अंतिम सप्लायर तक क्यों नहीं पहुंच पा रही।

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