बंटवारे के समय रावी नदी के जरिए भारत आया था महेंद्र का परिवार, कहा- वर्दी के बल पर राम लुभाया ने बचाई थी जान
आजादी का जश्न मनाने की तैयारियां चल रही हैं लेकिन आजादी के समय हुए बंटवारे के दौरान जो हुआ उसे दलेरपुर निवासी महिंदर सिंह रामगढ़िया ने बताया। उन्होंने बताया कि उनके पड़ोसी ब्राह्मण के बेटे पुलिसकर्मी राम लुभाय ने वर्दी और बंदूक से मदद करके उनके परिवार की जान बचाई थी। उन्होंने कहा कि राम लुभाय ने हमपर बहुत बड़ा उपकार किया था।

कलानौर, गुरदासपुर, जागरण संवाददाता। देशभर में आजादी का जश्न मनाने की तैयारियां (Preparation of Independence Day) चल रही हैं, लेकिन आजादी के समय हुए बंटवारे (Indo-Pak Partition) के दौरान जो हुआ उसे दलेरपुर निवासी महिंदर सिंह रामगढ़िया ने बताया। उन्होंने बताया कि उनके पड़ोसी ब्राह्मण के बेटे पुलिसकर्मी राम लुभाय ने वर्दी और बंदूक से मदद करके उनके परिवार की जान बचाई थी।
उन्होंने कहा कि राम लुभाय ने हमपर बहुत बड़ा उपकार किया था। उन्होंने बताया कि बंटवारे के दौरान उनकी सभी वस्तुएं और बुजुर्ग दादा सुचेत सिंह लौटने की आस में पाकिस्तान में ही रह गए। बंटवारे के बारे में बताते हुए दलेरपुर निवासी महिंदर सिंह रामगढ़िया ने अपना दर्द बयां किया।
पाकिस्तान में हुआ था जन्म
महिंदर सिंह रामगढ़िया ने बताया कि वह लोहार हैं और उनका जन्म भारत-पाकिस्तान विभाजन से पहले गांव कक्का क्लास तहसील नारोवाल जिला सियालकोट, पाकिस्तान में हुआ था। उनके पिता का नाम संता सिंह था। उन्होंने बताया कि उनके 6 भाई थे। सबसे बड़े भाई हरि सिंह, दर्शन सिंह, दलीप सिंह, अजीत सिंह, प्रीतम सिंह और सुरिंदर सिंह सहित उनके छह भाई पाकिस्तान में पैदा हुए थे। जबकि एक बहन का जन्म दलेरपुर गांव में हुआ था।
उन्होंने बताया कि उनके पिता संता सिंह अपने पैतृक गांव क्लास में लोहार का काम करते थे और उनके बड़े गांव कक्का कलास, चंदोवाल, कालू पद्दा के लोग हल, फाले, जुए, दरांती, रंबे और खरास बनाने का काम करते थे।
रावी नदी के जरिए भारत आया था परिवार
महिंदर सिंह ने बताया कि उनके घर के सामने वाली गली में ब्राह्मणों का घर है। उनके तीन बेटे ब्रिटिश पुलिस में थे। उन्होंने बताया कि बंटवारे के दिन पुलिस में नौकरी करने वाला एक ब्राह्मण का एक लड़का राम लुभाया आया और उसने अपने पिता से कहा कि जल्दी जाओ, जल्दी उठो बंटवारा हो गया है। उन्होंने बताया कि उस टाइम उसके पिता घर के पालतू जानवरों के लिए चारा लेने गए थे।
कुछ देर बाद अचानक राम लुभाया ने अपने परिवार और रिश्तेदारों को छोड़ कर आ रही पुलिस पार्टी पर हमला कर दिया। इसके बाद वह उन्हें रावी नदी पर एक नाव पर बिठाया गया और भारतीय सीमा का पास ले गया।
कहा- सौभाग्य था की वह भारत आ गए
महिंदर सिंह ने बताया कि उन्होंने लोगों के शव देखें थे, लेकिन वह आज भी कहते हैं कि राम लुभाया ने उनकी जान बचा कर उन पर उपकार किया है। उन्होंने बताया कि राम लुभाया के पास बंदूक थी। वह बार-बार मुसलमानों पर चिल्ला रहा था कि मेरी ड्यूटी लगा दी है। मैं उन्हें छोड़ने जा रहा हूं और कहा कि मैं वापस आऊंगा। उन्होंने बताया कि उनका सौभाग्य था की वह भारत आ गए हैं।
बाजरे के खेत में गाढ़े थे गहने और जेवर
वहां से निकलने से पहले उन्होंने अपने सारे गहने और जेवर बाजरे के खेत में गाढ़ दिए थे। उन्होंने बताया कि उनके बूढ़े दादा सुचेत सिंह पाकिस्तान में रह गए थे और उनसे कहा था कि मौसम ठीक होने पर वह वापस आ जाएंगे। उन्होंने कहा कि पढ़े-लिखे लोग जानते हैं कि भारत-पाकिस्तान का स्थायी बंटवारा हो चुका है, लेकिन कई अनपढ़ लोग वापसी की उम्मीद कर रहे हैं।
जान बचाने वाले राम लुभाया की याद आती है
बापू महिंदर सिंह ने कहा कि बंटवारे के बाद वह दो महीने तक घोनेवाल गांव में रहे और वहां के बुजुर्गों ने उनके पिता से कहा कि बंटवारा हो चुका है, आप जाकर अपने लिए घर ढूंढ लें और उसके बाद वह अपने भाई के पास चले गए डेरा बाबा नानक दरबार साहिब के पास। वह एक खाली मुस्लिम घर में बस गए।
उन्होंने कहा कि भारत-पाकिस्तान की आजादी के दौरान जहां कई लोगों ने अपनी जान गंवाई, वहीं उनके दादा और उनके गहने और घर हमेशा के लिए पीछे छूट गए और आज भी उन्हें पुरानी बातें याद आती हैं और उनकी जान बचाने वाले राम लुभाया की याद आती है।
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