गुरदासपुर में मुगल सम्राट अकबर के सिंहासन की सुर्खी का रंग पड़ा काला, पंचायत ने पुरातत्व विभाग से मांगा जवाब
कलानौर में अकबर की ऐतिहासिक ताजपोशी स्थल की बदहाली पर सवाल उठ रहे हैं। पार्क में घास उगी, कमरे जर्जर हैं और सिंहासन का रंग काला पड़ चुका है।

बदहाल पार्क में उगी जंगली बूटी
महिंदर सिंह अर्लीभन्न, कलानौर। गुरदासपुर के ऐतिहासिक कस्बा कलानौर में मुगल सम्राट जलालुद्दीन मुहम्मद अकबर की ताजपोशी से जुड़े स्थल की बदहाली ने पर्यटकों और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा दी है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार करवाया गया पार्क लंबे समय से उचित देखरेख के अभाव में बदहाल हो गया है।
पार्क में जगह-जगह घास-फूस और जंगली बूटी उग आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इससे यहां सांपों का खतरा भी बढ़ गया है। अकबर की ताजपोशी के ऐतिहासिक सिंहासन की हालत भी खराब बताई जा रही है। सिंहासन पर किया गया सुर्ख रंग समय के साथ काला पड़ चुका है। यहां पहुंचने वाले पर्यटकों को रास्ते की बदहाली के साथ-साथ स्थल पर सफाई की कमी का सामना करना पड़ रहा है।
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कमरे जर्जर, छतें भी गिर चुकीं
पार्क में पर्यटकों की सुविधा के लिए बनाए गए दो छोटे कमरों की छतें भी गिर चुकी हैं। परिसर में सफाई व्यवस्था नहीं होने के कारण चारों तरफ घास और झाड़ियां दिखाई देती हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार लंबे समय से रखरखाव नहीं होने के कारण ऐतिहासिक स्थल की सुंदरता प्रभावित हो रही है।
ग्राम पंचायत मौजोवाल कलानौर के सरपंच हरदीप सिंह मठारू ने कहा कि अकबर की ताजपोशी का यह स्थल ऐतिहासिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इसे देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। इसके बावजूद यहां उचित देखभाल नहीं हो रही।
उन्होंने बताया कि सिंहासन के चबूतरे पर कुछ शरारती युवकों ने अभद्र भाषा भी लिख दी है। स्थल पर छेड़छाड़ करने वालों पर पांच हजार रुपये जुर्माने का सूचना बोर्ड लगाया गया है, लेकिन निगरानी और रखरखाव की कमी के कारण ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं।
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1556 में हुई थी अकबर की ताजपोशी
इतिहास के अनुसार अकबर के पिता हुमायूं की मृत्यु के बाद 14 फरवरी 1556 को कलानौर में अकबर की ताजपोशी हुई थी। उस समय अकबर की उम्र करीब 13 वर्ष थी। उनके संरक्षक बैरम खां ने यहां चबूतरा बनवाकर शाही रस्मों के साथ उनका राज्याभिषेक करवाया था।
ताजपोशी के बाद कलानौर का ऐतिहासिक महत्व काफी बढ़ गया। मुगल काल में इस क्षेत्र के आसपास बाग और कई इमारतें बनवाई गई थीं। समय के साथ इनमें से कई इमारतें बाढ़ और अन्य कारणों से नष्ट हो गईं।
पंचायत ने रखी जिम्मेदारी सौंपने की मांग
सरपंच हरदीप सिंह मठारू ने पुरातत्व विभाग से ऐतिहासिक स्थल की तत्काल सफाई और मरम्मत करवाने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि विभाग के लिए इसकी नियमित देखभाल करना संभव नहीं है तो सिंहासन और पार्क की जिम्मेदारी पंचायत को सौंपी जानी चाहिए। इससे ऐतिहासिक स्थल की सुंदरता और पर्यटकों की सुविधा दोनों को बेहतर बनाया जा सकेगा।
