फिरोजपुर, जेएनएन। राजस्थान की सांभर झील में हजारों विदेशी पक्षियों की मौत के बाद वन्य जीव विभाग ने हरिके वेटलैंड में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। पक्षियों पर निगरानी व देखभाल के लिए छह चेक पोस्ट बनाए गए हैं। 24 घंटे कर्मचारियों की ड्यूटी रहेगी। प्राथमिकता के तौर पर पक्षियों की जांच करवाई जा रही है।

पता किया जा रहा है कि कहीं किसी प्रकार का कोई वायरस या बीमारी पक्षियों में तो नहीं आ रही है। इस मुस्तैदी के साथ ही विभाग ने हरिके वेटलैंड में हरिके मित्र भी तैनात किए गए हैं, जिन्हें वेटलैंड के आसपास नजर रखने को कहा गया है।  वीरवार को सेंचुरी के पानी की जांच के लिए पानी के सैैंपल भी लिए गए हैैं। हालांकि संबंधित अधिकारियों का कहना है कि पानी के सैैंपल लेने का काम रूटीन प्रक्रिया है।

पानी के सैंपल भी लिए, पक्षियों की देखरेख लिए ग्रामीणों को बनाया 'हरिके मित्र'    

हरिके वर्ल्‍ड वाइल्ड लाइफ की डीएफओ कल्पना ने कहा कि वेटलैंड में किसी भी पक्षी के मरने की खबर नहीं है। विभाग ने वेटरनरी विशेषज्ञों की सूची तैयार की है, ताकि जरूरत के समय उनकी सहायता ली जा सके। पक्षियों का इलाज करना या उनका मेडिकल आदि करना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए पहले से ही इंतजाम किए गए हैं।  विभाग ने हरिके मित्रों से मदद के तौर पर कहा है कि अगर उन्हें कहीं कोई मृत पक्षी मिलता है तो उन्हें तुरंत सूचित करें, ताकि उसका मेडीकल करवाया जा सके।

उन्‍होंने बताया कि हरिके वेटलैंड में करीब 60 हजार से ज्यादा विदेशी पक्षी पहुंच चुके हैं। उम्मीद है कि इनकी संख्या एक लाख से ऊपर जाएगी। पिछले दस दिनों से सभी कर्मचारियों की 24 घंटे की ड्यूटी कर दी गई है। पक्षियों पर पूरा ध्यान दिया जा रहा है ताकि किसी अनहोनी से होने से पहले रोका जा सके। 

गांवों वालों को किया गया है सतर्क : वन रेंज अधिकारी

वन रेंज अधिकारी कमलजीत सिंह ने कहा कि अलर्ट के चलते पूरी सावधानी बरती जा रही है। विभाग द्वारा हरिके मित्र बनाने के अलावा आसपास के गांवों में सूचित करवाया है कि अगर किसी को कोई भी पक्षी मृत अवस्था में मिले तो इसकी सूचना उन्हें तुरंत दें।

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86 वर्ग किलोमीटर में फैली है बर्ड सेंचुरी

जिला तरनतारन, कपूरथला, फिरोजपुर जिले के अधीन 86 वर्ग किलोमीटर में फैली हरिके पत्तन बर्ड सेंचुरी 1953 में सामने आई थी। केंद्रीय पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा साल 1987-88 में इस बर्ड सेंचुरी पर विशेष ध्यान दिया गया। वहीं, 2012-13 में यहां पर डॉलफिन देखे जाने के बाद इसका महत्व और बढ़ गया था। 

वर्ल्‍ड वाइल्ड लाइफ प्रोजेक्ट अधिकारी गीतांजलि कंवर ने बताया कि हरिके पत्तन बर्ड सेंचुरी में पहुंच रहे विदेशी पक्षियों की सुरक्षा के लिए प्रशासन पूरी तरह से गंभीर है। यहां पर पानी के प्रदूषित होने या खारा होने का मामला सामने नहीं आया है। यहां आने वाले पक्षी सुरक्षित हैैं।

 

Posted By: Sunil Kumar Jha

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