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पंजाब कांग्रेस को बड़ा झटका, पूर्व विधायक रामिंदर सिंह ने थामा SAD का दामन; फिरोजपुर की राजनीति का बदला समीकरण

Published: Sun, 25 Oct 2026 01:35 PM (IST)

पूर्व विधायक रामिंदर सिंह आंवला ने कांग्रेस का हाथ छोड़कर शिरोमणि अकाली दल का दामन थाम लिया है। उनके इस ...और पढ़ें

रमिंदर सिंह आंवला के साथ सुखबीर बादल।

रमिंदर सिंह आंवला के साथ सुखबीर बादल।

HighLights

  1. रामिंदर सिंह आंवला ने कांग्रेस छोड़ अकाली दल ज्वाइन किया।

  2. सुखबीर बादल की मौजूदगी में अकाली दल की सदस्यता ली।

  3. फिरोजपुर, जलालाबाद की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना।

डाॅ. तरुण जैन, जागरण, फिरोजपुर। पंजाब की राजनीति में रविवार को बड़ा उलटफेर देखने को मिला। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व विधायक रामिंदर सिंह आंवला ने कांग्रेस का हाथ छोड़कर शिरोमणि अकाली दल का दामन थाम लिया। चंडीगढ़ में अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल के नेतृत्व में उन्होंने पार्टी की सदस्यता ग्रहण की।

आंवला ने कहा कि उन्हें गर्व है कि सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब की जनता की सेवा के लिए उन पर भरोसा जताया है। उनके इस फैसले से सीमावर्ती जिले फिरोजपुर की राजनीति में नए समीकरण बनने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।

रामिंदर सिंह आंवला का अकाली दल में शामिल होना इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि उन्होंने अक्टूबर 2019 में जलालाबाद विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में अकाली दल के मजबूत गढ़ में सेंध लगाकर कांग्रेस की टिकट पर बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। वह 16 अक्टूबर 2019 से 10 मार्च 2022 तक विधायक रहे। इसके बाद गुरुहरसहाय में नगर कौंसिल चुनावों के दौरान भी उन्होंने कांग्रेस की राजनीतिक ताकत बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई थी।

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गुरुहरसहाय और जलालाबाद पर नजर

राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, रामिंदर सिंह आंवला की पकड़ गुरुहरसहाय के साथ-साथ जलालाबाद में भी है। चर्चा है कि वह आगामी विधानसभा चुनाव में जलालाबाद से अपनी दावेदारी पेश कर सकते हैं। हालांकि, उनकी ओर से चुनाव लड़ने को लेकर अभी किसी आधिकारिक फैसले की पुष्टि नहीं हुई है।

आंवला पिछले दिनों गुरुहरसहाय के विकास कार्यों के लिए अपने निजी फंड से एक करोड़ रुपये नगर कौंसिल की प्रधान को देने के कारण भी चर्चा में रहे थे। उन्होंने 251 बेटियों की शादी करवाकर उन्हें दान-दहेज देने का कार्यक्रम भी आयोजित किया था, जिसमें बागेश्वर धाम के स्वामी धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पहुंचे थे।

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गुटबाजी के बीच बदला राजनीतिक पाला

रामिंदर सिंह आंवला के पिता डा. हरभजन सिंह आंवला गुरुहरसहाय में लंबे समय तक नगर कौंसिल के प्रधान रहे हैं। रामिंदर सिंह खुद भी यूथ कांग्रेस में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। दिसंबर 2025 में उनके कारोबारी संस्थानों पर आयकर विभाग की छापेमारी भी हुई थी, जो करीब एक सप्ताह तक चली थी।

अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अकाली दल में शामिल होने के बाद रामिंदर सिंह आंवला गुरुहरसहाय में वरदेव सिंह नोनी मान का समर्थन करेंगे या अपने बेटे जतिन आंवला को चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति बनाएंगे। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि आंवला का यह कदम अकाली दल को कितना मजबूत करता है और कांग्रेस के राजनीतिक समीकरणों पर इसका कितना असर पड़ता है।

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