पंजाब विधानसभा सत्र से पहले कांग्रेस का ‘लानत पत्र’, बेअदबी-नशा और किसानों के मुद्दे पर उठाए सवाल
पंजाब विधानसभा सत्र से पहले कांग्रेस विधायकों ने AAP सरकार के खिलाफ 'लानत पत्र' जारी कर विरोध प्रदर्शन किया।

पंजाब विधानसभा सत्र के दौरान पत्रकारों से बातें करते हुए कांग्रेस विधायक (जागरण फोटो)
HighLights
कांग्रेस ने AAP सरकार के खिलाफ 'लानत पत्र' जारी किया
बेअदबी, नशा, अवैध खनन जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा
किसानों और कर्मचारियों के बकाया मुद्दों पर भी सवाल उठाए
रोहित कुमार, चंडीगढ़। पंजाब विधानसभा के सत्र के दौरान सदन में जाने से पहले ही नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
कांग्रेस ने सरकार के नाम ‘लानत पत्र’ जारी कर बेअदबी के मामलों में इंसाफ में देरी, नशे के कारोबार, बढ़ते कर्ज, अवैध खनन और गैंगस्टरों के मुद्दे पर सरकार को घेरा। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार पंजाब के अहम मुद्दों पर जवाब देने में विफल रही है।
कांग्रेस के इस पत्र में बेअदबी के मामलों को प्रमुखता से उठाते हुए सवाल किया गया कि आरोपितों के खिलाफ कार्रवाई क्यों रोकी गई और मामले में नामजद डेरा प्रमुख के खिलाफ मुकदमा चलाने की मंजूरी क्यों नहीं दी गई। पार्टी ने यह भी आरोप लगाया कि बेअदबी के मामले पंजाब से बाहर भेजने में सरकार ने मदद की।
नशे और गैंगस्टरों के मुद्दे पर घेरा
कांग्रेस ने नशे के मुद्दे पर अरविंद केजरीवाल की तीन महीने में नशा खत्म करने की गारंटी पर सवाल उठाए। पत्र में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले परमिंदर सिंह झोटा की मौत के मामले में जवाबदेही तय करने की मांग की गई। इसके साथ ही मोहनजीत सिंह की पिटाई तथा गुलजार सिंह और बिक्रमजीत सिंह की हत्याओं का मुद्दा भी उठाया गया।
गैंगस्टरों के मुद्दे पर कांग्रेस ने लॉरेंस बिश्नोई के जेल से दो इंटरव्यू होने और डीजीपी के बयानों पर सवाल उठाए। पार्टी ने दावा किया कि हाईकोर्ट की जांच ने पुलिस और गैंगस्टरों के बीच कथित गठजोड़ को उजागर किया।
कर्ज, किसान और कर्मचारियों के मुद्दे भी उठाए
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि पंजाब पर कर्ज पांच लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है और सरकारी संस्थानों की बिक्री पर सरकार को जवाब देना चाहिए। अवैध खनन रोकने और इससे 20 हजार करोड़ रुपये की आमदनी के दावे का हिसाब भी मांगा गया।
किसान आंदोलन के दौरान शंभू बॉर्डर पर रास्ते बंद कराने, हरियाणा सरकार की ओर से गोली चलाने की सहमति देने और किसानों का सामान लूटे जाने के आरोप भी पत्र में शामिल किए गए। कांग्रेस ने डैम सेफ्टी कानून लागू होने और बांधों पर केंद्र के सीधे हस्तक्षेप तथा सीआइएसएफ की तैनाती पर भी सवाल उठाए।
इसके अलावा सरकारी कर्मचारियों के बकाया महंगाई भत्ते और धान खरीद में किसानों को कथित तौर पर हुए 3600 करोड़ रुपये के नुकसान का मुद्दा उठाया गया। कांग्रेस ने 180 लाख मीट्रिक टन धान पर 200 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती का हवाला देते हुए किसानों को पूरी कीमत सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी तय करने की मांग की।
