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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 29, 2018 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

10 गांवों में 5 हजार एकड़ धान की फसल खराब, होगी स्पेशल गिरदावरी

By JagranEdited By:
Published: Sat, 29 Sep 2018 04:51 PM (IST)

जासं, फिरोजपुर : तीन दिन में 26 हजार क्यूसिक पानी कम होने से सतलुज दरिया के बांध क्षेत्र में खेती कर

10 गांवों में 5 हजार एकड़ धान की फसल खराब, होगी स्पेशल गिरदावरी
10 गांवों में 5 हजार एकड़ धान की फसल खराब, होगी स्पेशल गिरदावरी

जासं, फिरोजपुर : तीन दिन में 26 हजार क्यूसिक पानी कम होने से सतलुज दरिया के बांध क्षेत्र में खेती करने वाले किसानों ने राहत की सांस ली है। एक सप्ताह तक बारिश से ज्यादा पानी का बहाव होने से 10 गांवों में धान की करीब पांच हजार एकड़ फसल खराब हो गई। जिला प्रशासन ने फसल खराबे का जायजा लेने के लिए रेवेन्यू विभाग को स्पेशल गिरदावरी करने के निर्देश दिए हैं, जो अगले दो-चार दिन में पानी सूखने पर शुरू होगी। 26 सितंबर को हरिके हैड पर पौंग और भाखड़ा बांध से 54 हजार 869 क्यूसिक पानी पहुंच रहा था। अब पानी के इस बहाव में 26 हजार क्यूसिक की कमी आई है। शनिवार सुबह पानी की आवक महज 28 हजार क्यूसिक रह गई।

जब एकाएक पानी बढ़ा तो कई जगह किसानों द्वारा फसल के इर्दगिर्द लगाए बांध टूट गए। कई जगह बांधों के ऊपर से पानी खेतों में घुस गया। इससे करीब पांच हजार हैक्टेयर धान की फसल डूब गई। जीरा क्षेत्र में गांव महमूदवाला, रुकनेवाला, रंगा टिब्बी, भूतीवाला, मनू माछी, बदरा टिब्बी, टैब टिब्बी और ममदोट क्षेत्र में भी बांध टूटने से गांव गट्टू किलचा, दोना तेलूमल, भंबा हाजी और किलचा उताड़ में फसल का नुकसान हुआ है। गांव महमूदवाला के किसान गुरमुख ¨सह, कलवंत ¨सह और जोगेंद्र ¨सह के अनुसार उनकी धान की फसल दो दिन तक पानी में डूबी रही। धान की फसल इससे खराब हो गई है। पानी सूखने में अभी कई दिन लगेंगे। सरकार को जिन किसानों का नुकसान हुआ है, उन्हें मुआवजा देना चाहिए। इससे पहले 2015 में जिले में कई जगह ज्यादा पानी की वजह से धान की फसल खराब हो गई थी।

बरसात थमने के बाद बांधों से पानी की आमद बिल्कुल कम हो गई है। अब ज्यादा पानी बढ़ने की संभावना नहीं है। एक्सईएन जैन के अनुसार बांधों से हरिके हैड पर 26 हजार क्यूसिक पानी पहुंच रहा है। इसमें से 16 हजार क्यूसिक पानी पंजाब और राजस्थान की नहरों में छोड़ा जा रहा है। बाकी 12 हजार क्यूसिक पानी हुसैनीवाला की तरफ दरिया के बहाव क्षेत्र में छोड़ा जा रहा है।

चंद्रमोहन जैन, एक्सईएन, नहरी विभाग